गंगा सप्तमी, जिसे जहनु सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र तिथि मानी जाती है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को माँ गंगा का पुनर्जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। यहाँ गंगा सप्तमी व्रत कथा, महत्व और पूजन विधि का विस्तृत विवरण दिया गया है
गंगा सप्तमी 2026 तिथि
- तारीख: 24 अप्रैल, 2026 (शुक्रवार)
- सप्तमी तिथि प्रारंभ: 23 अप्रैल, 2026 की रात से
- सप्तमी तिथि समाप्त: 24 अप्रैल, 2026 की शाम तक
गंगा सप्तमी व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरीं, तो उनके प्रचंड वेग को भगवान शिव ने अपनी जटाओं में समाहित कर लिया था। शिवजी की जटाओं से निकलकर जब गंगा जी ऋषि भगीरथ के पीछे-पीछे आगे बढ़ रही थीं, तब मार्ग में ऋषि जहनु का आश्रम आता था।
गंगा के तेज प्रवाह और कल-कल की ध्वनि से ऋषि जहनु की तपस्या में विघ्न पड़ गया। इससे क्रोधित होकर ऋषि जहनु ने अपनी योग शक्ति से पूरी गंगा नदी को पी लिया। यह देखकर भगीरथ और अन्य देवता व्याकुल हो गए और उन्होंने ऋषि जहनु से प्रार्थना की कि वे गंगा को मुक्त कर दें, अन्यथा सगर के पुत्रों का उद्धार नहीं हो पाएगा।
देवताओं के अनुनय-विनय और भगीरथ की तपस्या को देखते हुए ऋषि जहनु का क्रोध शांत हुआ। उन्होंने वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन गंगा को अपने कान से बाहर निकाला। चूंकि ऋषि जहनु ने गंगा को पुनर्जन्म दिया, इसलिए गंगा को "जाह्नवी" (जहनु की पुत्री) कहा जाने लगा और इसी कारण इस दिन को जहनु सप्तमी या गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है।
गंगा सप्तमी का महत्व
पाप मुक्ति: माना जाता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से मनुष्य के जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप धुल जाते हैं।
ग्रह दोष निवारण: विशेष रूप से जिन लोगों की कुंडली में मंगल भारी हो या अशुभ फल दे रहा हो, उन्हें इस दिन गंगा स्नान और दान करना चाहिए।
पुनर्जन्म का प्रतीक: गंगा अवतरण (गंगा दशहरा) के बाद यह तिथि गंगा के "पुनर्जन्म" की प्रतीक है, जो नई शुरुआत और शुद्धि का संदेश देती है।
गंगा सप्तमी पूजन विधि
- ब्रह्म मुहूर्त स्नान: इस दिन सूर्योदय से पूर्व गंगा स्नान का विशेष महत्व है। यदि गंगा तट पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- अर्घ्य और तर्पण: स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और "ॐ नमः शिवाय" व "गंगे च यमुने चैव..." मंत्रों का जाप करें।
- दीपदान: संध्या के समय किसी पवित्र नदी के किनारे या घर के मंदिर में दीपदान करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
- दान-पुण्य: इस दिन ब्राह्मणों और गरीबों को अन्न, वस्त्र और जल का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
गंगा सप्तमी पर विशेष मंत्र
स्नान या पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करना शुभ होता है:
"गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिंधु कावेरी जलेऽस्मिन् संनिधिं कुरु॥"
मुख्य बातें जो ध्यान रखें
इस दिन माँ गंगा की आरती अवश्य करें।
सात्विक भोजन ग्रहण करें और क्रोध या अपशब्दों से बचें।
यह दिन मोक्ष की कामना रखने वाले भक्तों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

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