दस महाविद्याओं में से एक माता बगलामुखी को शक्ति की साक्षात देवी माना जाता है। हिंदू धर्म में मां बगलामुखी की साधना को सबसे शक्तिशाली माना गया है जो इंसान को हर तरह के संकट से बाहर निकाल सकती है। शत्रुओं पर विजय पाने और जीवन की बड़ी से बड़ी रुकावटों को दूर करने के लिए श्री बगलामुखी चालीसा का पाठ करना एक बहुत ही सरल और अचूक उपाय माना जाता है। जो भी व्यक्ति पूरी आस्था के साथ मां की शरण में जाता है, उसे कभी हार का मुंह नहीं देखना पड़ता। आज के समय में जब हर इंसान किसी न किसी कानूनी विवाद, दफ्तर की राजनीति या आपसी दुश्मनी से परेशान है, तब मां बगलामुखी की आराधना बहुत सहारा देती है।
इस दिव्य चालीसा के नियमित जाप से साधक के चारों तरफ एक ऐसा रक्षा कवच बन जाता है जिसे कोई भी बुरी शक्ति भेद नहीं पाती। कलयुग में मां की भक्ति बहुत जल्दी फल देती है। आइए बहुत ही आसान शब्दों में समझते हैं कि इस चालीसा के क्या फायदे हैं और इसे करने का सही नियम क्या है। श्री बगलामुखी चालीसा पाठ वास्तव में चालीस पंक्तियों की एक अत्यंत प्रभावशाली स्तुति है जिसमें माता के रूप, उनकी शक्ति और महिमा का सुंदर वर्णन किया गया है। मां बगलामुखी को पीतांबरा भी कहा जाता है क्योंकि उन्हें पीला रंग बहुत ज्यादा प्रिय है।
इस चालीसा में उनके इसी अद्भुत रूप की प्रशंसा की गई है और बताया गया है कि कैसे वे अपने भक्तों के दुखों का नाश करती हैं। इसके शब्द इतने शक्तिशाली हैं कि इनके उच्चारण मात्र से ही मन के भीतर का सारा डर गायब हो जाता है। तांत्रिक और सामान्य दोनों ही तरह की पूजा में इस चालीसा का बहुत बड़ा स्थान है। जहां कठिन मंत्रों का जाप करने के लिए बहुत सारे कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है, वहीं चालीसा का पाठ एक आम इंसान भी पूरी श्रद्धा के साथ घर पर कर सकता है। यह पाठ व्यक्ति की वाणी को प्रभावशाली बनाता है और उसके जीवन में चल रही सभी तरह की नकारात्मकता को सकारात्मक ऊर्जा में बदल देता है।
|| श्री बगलामुखी चालीसा (Baglamukhi Chalisa PDF) ||
॥ दोहा ॥
सिर नवाइ बगलामुखी, लिखूं चालीसा आज ॥
कृपा करहु मोपर सदा, पूरन हो मम काज ॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय श्री बगला माता । आदिशक्ति सब जग की त्राता ॥
बगला सम तब आनन माता । एहि ते भयउ नाम विख्याता ॥
शशि ललाट कुण्डल छवि न्यारी । असतुति करहिं देव नर-नारी ॥
पीतवसन तन पर तव राजै । हाथहिं मुद्गर गदा विराजै ॥
तीन नयन गल चम्पक माला । अमित तेज प्रकटत है भाला ॥
रत्न-जटित सिंहासन सोहै । शोभा निरखि सकल जन मोहै ॥
आसन पीतवर्ण महारानी । भक्तन की तुम हो वरदानी ॥
पीताभूषण पीतहिं चन्दन । सुर नर नाग करत सब वन्दन ॥
एहि विधि ध्यान हृदय में rakhai । वेद पुराण संत अस भाखै ॥
अब पूजा विधि करौं प्रकाशा । जाके किये होत दुख-नाशा ॥
प्रथमहिं पीत ध्वजा फहरावै । पीतवसन देवी पहिरावै ॥
कुंकुम अक्षत मोदक बेसन । अबिर गुलाल सुपारी चन्दन ॥
माल्य हरीद्रा अरु फल पाना । सबहिं चढ़इ धरै उर ध्याना ॥
धूप दीप कर्पूर की बाती । प्रेम-सहित तब करै आरती ॥
अस्तुति करै हाथ दोउ जोरे । पुरवहु मातु मनोरथ मोरे ॥
मातु भगति तब सब सुख खानी । करहुं कृपा मोपर जनजानी ॥
त्रिविध ताप सब दुख नशावहु । तिमिर मिटाकर ज्ञान बढ़ावहु ॥
बार-बार मैं बिनवहुं तोहीं । अविरल भगति ज्ञान दो मोहीं ॥
पूजनांत में हवन करावै । सा नर मनवांछित फल पावै ॥
सर्षप होम करै जो कोई । ताके वश सचराचर होई ॥
तिल तण्डुल संग क्षीर मिरावै । भक्ति प्रेम से हवन करावै ॥
दुख दरिद्र व्यापै नहिं सोई । निश्चय सुख-सम्पत्ति सब होई ॥
फूल अशोक हवन जो करई । ताके गृह सुख-सम्पत्ति भरई ॥
फल सेमर का होम करीजै । निश्चय वाको रिपु सब छीजै ॥
गुग्गुल घृत होमै जो कोई । तेहि के वश में राजा होई ॥
गुग्गुल तिल संग होम करावै । ताको सकल बंध कट जावै ॥
बीलाक्षर का पाठ जो करहीं । बीज मंत्र तुम्हरो उच्चरहीं ॥
एक मास निशि जो कर जापा । तेहि कर मिटत सकल संतापा ॥
घर की शुद्ध भूमि जहं होई । साध्का जाप करै तहं सोई ॥
सेइ इच्छित फल निश्चय पावै । यामै नहिं कदु संशय लावै ॥
अथवा तीर नदी के जाई । साधक जाप करै मन लाई ॥
दस सहस्र जप करै जो कोई । सक काज तेहि कर सिधि होई ॥
जाप करै जो लक्षहिं बारा । ताकर होय सुयशविस्तारा ॥
जो तव नाम जपै मन लाई । अल्पकाल महं रिपुहिं नसाई ॥
सप्तरात्रि जो पापहिं नामा । वाको पूरन हो सब कामा ॥
नव दिन जाप करे जो कोई । व्याधि रहित ताकर तन होई ॥
ध्यान करै जो बन्ध्या नारी । पावै पुत्रादिक फल चारी ॥
प्रातः सायं अरु मध्याना । धरे ध्यान होवैकल्याना ॥
कहं लगि महिमा कहौं तिहारी । नाम सदा शुभ मंगलकारी ॥
पाठ करै जो नित्या चालीसा । तेहि पर कृपा करहिं गौरीशा ॥
॥ दोहा ॥
सन्तशरण को तनय हूं, कुलपति मिश्र सुनाम ।
हरिद्वार मण्डल बसूं , धाम हरिपुर ग्राम ॥
उन्नीस सौ पिचानबे सन् की, श्रावण शुक्ला मास ।
चालीसा रचना कियौ, तव चरणन को दास ॥
श्री बगलामुखी चालीसा पाठ के लाभ
मां बगलामुखी की चालीसा का पाठ करने से साधक को अपने जीवन में ऐसे चमत्कारी बदलाव देखने को मिलते हैं जिनकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की होती। मां अपने भक्तों की सच्ची पुकार सुनकर उनके सारे संकटों को पल भर में हर लेती हैं।
यदि कोई व्यक्ति पूरी निष्ठा और विश्वास के साथ इस पवित्र चालीसा का नियमित पाठ करता है, तो उसे निम्नलिखित मुख्य लाभ और फायदे प्राप्त होते हैं:
- अगर आप किसी कानूनी मामले या जमीनी विवाद में फंसे हैं और लंबे समय से परेशान हैं, तो इस चालीसा का पाठ आपके लिए वरदान साबित हो सकता है। इसके प्रभाव से विरोधी शांत पड़ जाते हैं और फैसला आपके पक्ष में आने के योग बनते हैं।
- जीवन में कई बार ऐसे गुप्त शत्रु बन जाते हैं जो पीठ पीछे नुकसान पहुंचाते हैं। मां बगलामुखी की कृपा से ऐसे सभी शत्रुओं का नाश होता है और घर को किसी की बुरी नजर या तंत्र-मंत्र का दोष नहीं लगता।
- व्यापार में घाटा हो रहा हो या नौकरी पर संकट आया हो, तो यह पाठ बहुत मददगार होता है। मां की कृपा से धन आने के नए रास्ते खुलते हैं और इंसान धीरे-धीरे अपने पुराने कर्ज के बोझ से आजाद हो जाता है।
- जो लोग अक्सर बीमार रहते हैं या जिनके मन में हमेशा किसी अनहोनी का डर बना रहता है, उन्हें इस पाठ से आत्मिक बल मिलता है। यह चालीसा सेहत में सुधार लाती है और मानसिक तनाव को जड़ से खत्म करती है।
- इस अद्भुत पाठ के प्रभाव से सूने घर में खुशियां लौट आती हैं। परिवार के लोगों के बीच चल रहे आपसी मतभेद हमेशा के लिए खत्म हो जाते हैं और घर का वातावरण पूरी तरह से पवित्र और शांतिमय बन जाता है।
श्री बगलामुखी चालीसा पाठ की सही विधि
शास्त्रों के अनुसार मां बगलामुखी की पूजा में रंग और दिशा का बहुत विशेष महत्व बताया गया है। चूंकि माता को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए उनकी पूजा में पीले रंग की सामग्रियों का ही मुख्य रूप से उपयोग किया जाता है। सही विधि से किया गया पाठ हमेशा उत्तम और शीघ्र फल देने वाला होता है।
अगर आप भी अपने जीवन के कष्टों को दूर करने के लिए मां बगलामुखी की चालीसा का पाठ करना चाहते हैं, तो इस सरल और सही विधि का पालन करें:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इस पूजा में साधक का पीले रंग के कपड़े पहनना बहुत जरूरी माना गया है। कपड़े पूरी तरह साफ और शुद्ध होने चाहिए।
- पूजा के लिए घर के किसी शांत कोने को चुनें और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखें। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर मां बगलामुखी की तस्वीर या यंत्र स्थापित करें।
- माता को पीले फूल, हल्दी की गांठें और पीले रंग के फल अर्पित करें। इसके साथ ही भोग में बेसन के लड्डू या केसरिया हलवा चढ़ाएं। पूजा के स्थान पर हल्दी से एक छोटा सा स्वास्तिक भी बना लें।
- माता की प्रतिमा के सामने शुद्ध घी का या फिर तिल के तेल का दीपक जलाएं और साथ में सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। हल्दी की माला से मां के किसी सरल नाम का जाप करना भी बहुत शुभ होता है।
- अब कुशा या ऊन के पीले आसन पर बैठ जाएं और पूरी एकाग्रता के साथ श्री बगलामुखी चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद मां की कपूर से आरती करें और अपने शत्रुओं व संकटों से मुक्ति की प्रार्थना करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या महिलाएं भी मां बगलामुखी की चालीसा का पाठ कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं भी पूरी शुद्धता और आस्था के साथ मां बगलामुखी की चालीसा का पाठ कर सकती हैं। बस इस बात का ध्यान रखें कि अशुद्ध दिनों में इस पाठ को करने से पूरी तरह बचना चाहिए।
बगलामुखी चालीसा का पाठ किस दिन से शुरू करना सबसे अच्छा होता है?
इस चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए गुरुवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है क्योंकि यह दिन पीले रंग और देवताओं के गुरु से जुड़ा है। इसके अलावा आप किसी भी शुभ तिथि या नवरात्रि के दिनों से भी इसे शुरू कर सकते हैं।
क्या इस पाठ को करते समय खान-पान का परहेज करना जरूरी है?
हाँ, मां बगलामुखी की साधना के दौरान सात्विकता का पालन करना बेहद जरूरी है। जितने दिन भी आप पाठ करें, उतने दिन मांस, मदिरा, अंडा और तामसिक भोजन जैसे प्याज और लहसुन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें।
शाम के समय इस चालीसा का पाठ किया जा सकता है या नहीं?
हाँ, मां बगलामुखी की पूजा रात्रि के समय भी बहुत फलदायी मानी जाती है। अगर आपको सुबह समय न मिले, तो शाम को सूर्यास्त के बाद हाथ-पैर धोकर और पीले कपड़े पहनकर दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ किया जा सकता है।

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