भारतीय संस्कृति और ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को बुद्धि, ज्ञान, भाग्य और सुख-समृद्धि का सबसे बड़ा कारक माना गया है। नवग्रहों में सबसे शांत और शुभ माने जाने वाले गुरु ग्रह की कृपा जिस व्यक्ति पर हो जाए, उसका जीवन राजा जैसा ठाठ-बाठ वाला बन जाता है। जीवन में मनचाही सफलता पाने, पढ़ाई-लिखाई में अव्वल रहने और वैवाहिक जीवन की हर परेशानी को जड़ से खत्म करने के लिए श्री बृहस्पतिदेव चालीसा का पाठ सबसे अचूक और सरल माध्यम माना जाता है। 

विद्वानों का मानना है कि जो लोग नियमित रूप से या हफ्ते के हर गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति का सुमरन करते हैं, उनके जीवन से हर तरह का दुर्भाग्य कोसों दूर भाग जाता है। यदि कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर स्थिति में हो, तो इस पवित्र चालीसा की शरण लेना अपनी सोई हुई किस्मत को जगाने और सभी संकटों से परमानेंट मुक्ति पाने का सबसे बढ़िया घरेलू उपाय है। श्री बृहस्पतिदेव चालीसा पाठ 40 पंक्तियों की एक बहुत ही सुंदर और प्रभावशाली स्तुति है जिसमें देवगुरु के स्वरूप, उनके अद्‍भुत ज्ञान और सिद्धाश्रम की दिव्य कथाओं का पूरा वर्णन मिलता है। 

इस पवित्र पाठ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें गुरु के 156 ग्रंथों के रचयिता होने, आयुर्वेद और ज्योतिष के सागर होने की बात कही गई है जो साधक को अध्यात्म के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान भी देती है। जहाँ बहुत बड़े यज्ञ या कठिन संस्कृत मंत्रों का जाप करने के लिए बहुत सारे कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है, वहीं इस चालीसा का पाठ एक आम इंसान भी पूरी श्रद्धा के साथ अपने घर के मंदिर में बैठकर कर सकता है। यह पाठ इंसान की मति यानी बुद्धि को तीव्र करता है और अज्ञानता के अंधेरे को मिटाकर जीवन में सुख-समृद्धि का उजाला फैलाता है।


|| श्री बृहस्पतिदेव चालीसा (Brihaspati Dev Chalisa PDF) ||

|| दोहा ||

प्रन्वाऊ प्रथम गुरु चरण, बुद्धि ज्ञान गुन खान |
श्रीगणेश शारदसहित, बसों ह्रदय में आन ||
अज्ञानी मति मंद मैं, हैं गुरुस्वामी सुजान |
दोषों से मैं भरा हुआ हूं, तुम हो कृपा निधान।

|| चौपाई ||

जय नारायण जय निखिलेशवर, विश्व प्रसिद्ध अखिल तंत्रेश्वर |
यंत्र-मंत्र विज्ञानं के ज्ञाता, भारत भू के प्रेम प्रेनता |
जब जब हुई धरम की हानि, सिद्धाश्रम ने पठए ज्ञानी |
सच्चिदानंद गुरु के प्यारे, सिद्धाश्रम से आप पधारे |
उच्चकोटि के ऋषि-मुनि स्वेच्छा, ओय करन धरम की रक्षा |

अबकी बार आपकी बारी, त्राहि त्राहि है धरा पुकारी |
मरुन्धर प्रान्त खरंटिया ग्रामा, मुल्तानचंद पिता कर नामा |
शेषशायी सपने में आये, माता को दर्शन दिखलाये |
रुपादेवि मातु अति धार्मिक, जनम भयो शुभ इक्कीस तारीख |
जन्म दिवस तिथि शुभ साधक की, पूजा करते आराधक की |

जन्म वृतन्त सुनाये नवीना, मंत्र नारायण नाम करि दीना |
नाम नारायण भव भय हारी, सिद्ध योगी मानव तन धारी |
ऋषिवर ब्रह्म तत्व से ऊर्जित, आत्म स्वरुप गुरु गोरवान्वित |
एक बार संग सखा भवन में, करि स्नान लगे चिन्तन में |
चिन्तन करत समाधि लागी, सुध-बुध हीन भये अनुरागी |

पूर्ण करि संसार की रीती, शंकर जैसे बने गृहस्थी |
अदभुत संगम प्रभु माया का, अवलोकन है विधि छाया का |
युग-युग से भव बंधन रीती, जंहा नारायण वाही भगवती |
सांसारिक मन हुए अति ग्लानी, तब हिमगिरी गमन की ठानी |
अठारह वर्ष हिमालय घूमे, सर्व सिद्धिया गुरु पग चूमें |

त्याग अटल सिद्धाश्रम आसन, करम भूमि आये नारायण |
धरा गगन ब्रह्मण में गूंजी, जय गुरुदेव साधना पूंजी |
सर्व धर्महित शिविर पुरोधा, कर्मक्षेत्र के अतुलित योधा |
ह्रदय विशाल शास्त्र भण्डारा, भारत का भौतिक उजियारा |
एक सौ छप्पन ग्रन्थ रचयिता, सीधी साधक विश्व विजेता |

प्रिय लेखक प्रिय गूढ़ प्रवक्ता, भुत-भविष्य के आप विधाता |
आयुर्वेद ज्योतिष के सागर, षोडश कला युक्त परमेश्वर |
रतन पारखी विघन हरंता, सन्यासी अनन्यतम संता |
अदभुत चमत्कार दिखलाया, पारद का शिवलिंग बनाया |
वेद पुराण शास्त्र सब गाते, पारेश्वर दुर्लभ कहलाते |

पूजा कर नित ध्यान लगावे, वो नर सिद्धाश्रम में जावे |
चारो वेद कंठ में धारे, पूजनीय जन-जन के प्यारे |
चिन्तन करत मंत्र जब गायें, विश्वामित्र वशिष्ठ बुलायें |
मंत्र नमो नारायण सांचा, ध्यानत भागत भुत-पिशाचा |
प्रातः कल करहि निखिलायन, मन प्रसन्न नित तेजस्वी तन |

निर्मल मन से जो भी ध्यावे, रिद्धि सिद्धि सुख-सम्पति पावे |
पथ करही नित जो चालीसा, शांति प्रदान करहि योगिसा |
अष्टोत्तर शत पाठ करत जो, सर्व सिद्धिया पावत जन सो |
श्री गुरु चरण की धारा, सिद्धाश्रम साधक परिवारा |
जय-जय-जय आनंद के स्वामी, बारम्बार नमामी नमामी |

|| इति श्री बृहस्पतिदेव चालीसा ||

श्री बृहस्पतिदेव चालीसा पाठ के लाभ

सच्चे दिल और पूरी निष्ठा के साथ श्री बृहस्पतिदेव चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से भक्तों को अपने जीवन में कई तरह के चमत्कारी और शुभ लाभ देखने को मिलते हैं। देवगुरु अपने भक्तों की सच्ची पुकार बहुत जल्दी सुनते हैं और उनके चारों तरफ एक ऐसा पॉजिटिव घेरा बना देते हैं जिससे घर में हमेशा सुख-शांति बनी रहती है।

यदि कोई भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ इस पवित्र चालीसा को अपनी रोज की पूजा का हिस्सा बनाता है या हर गुरुवार को इसका नियम से पाठ करता है, तो उसे मिलने वाले मुख्य लाभ और पुण्य फल कुछ इस प्रकार हैं:

  • इस चालीसा का नियमित पाठ करने से स्मरण शक्ति बहुत तेज होती है और एकाग्रता बढ़ती है। जो छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं या पढ़ाई में कमजोर हैं, उनके लिए यह पाठ किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि गुरु ग्रह ही ज्ञान के असली दाता हैं।
  • जिन लड़के या लड़कियों के विवाह में लगातार देरी हो रही है या रिश्ते बनते-बनते टूट जाते हैं, उनके लिए यह पाठ बेहद चमत्कारी है। इसके प्रभाव से शादी के योग बहुत जल्दी बनते हैं और शादीशुदा जिंदगी में भी आपसी प्यार और तालमेल हमेशा बना रहता है।
  • अगर आपके काम-धंधे में लगातार नुकसान हो रहा है, नौकरी में प्रमोशन रुका हुआ है या सिर पर कर्ज का भारी बोझ बढ़ गया है, तो इस चालीसा का पाठ करें। गुरुदेव की दया से आय के नए रास्ते खुलते हैं और घर में बरकत हमेशा बनी रहती है।
  • जो लोग अक्सर डिप्रेशन, काम के तनाव या किसी अनजाने डर से परेशान रहते हैं, उनके लिए यह पाठ मन को शांत करने की सबसे अच्छी दवा है। इसके नियमित जाप से दिमाग एकदम रिलैक्स रहता है और स्वास्थ्य भी काफी अच्छा बना रहता है।
  • चालीसा की पंक्तियों के अनुसार जो व्यक्ति निर्मल मन से गुरु का ध्यान धरकर अष्टोत्तर शत यानी 108 बार इसका पाठ पूरा कर लेता है, उसे सभी प्रकार की सांसारिक सिद्धियां और सुख-संपत्ति बहुत ही आसानी से मिल जाती है।

श्री बृहस्पतिदेव चालीसा पाठ की सही विधि

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी देवी-देवता की पूजा या पाठ का पूरा पुण्य फल तभी प्राप्त होता है जब उसे सही नियमों, सही दिशा और शुद्ध भाव के साथ किया जाए। देवगुरु बृहस्पति की पूजा में पीले रंग की सामग्रियों का विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि पीला रंग गुरु ग्रह, सोने और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। सही तरीके से किया गया यह पाठ हमेशा बहुत जल्दी और उत्तम फल देने वाला साबित होता है।

अगर आप भी अपने जीवन के कष्टों को दूर करने और देवगुरु बृहस्पति का आशीर्वाद पाने के लिए इस चालीसा का पाठ शुरू करना चाहते हैं, तो इस बेहद आसान और सही विधि का पालन करें:

  • पाठ करने के लिए सुबह का समय सबसे बढ़िया माना जाता है। गुरुवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इस पूजा में साधक का पूरी तरह साफ-सुथरे कपड़े पहनना जरूरी है, यदि संभव हो तो पीले रंग के कपड़े पहनें।
  • अपने घर के मंदिर या किसी पवित्र स्थान को अच्छे से साफ कर लें। एक छोटी चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान विष्णु या देवगुरु बृहस्पति की तस्वीर स्थापित करें। यदि घर में केले का पेड़ हो, तो वहां पूजा करना और भी शुभ होता है।
  • भगवान की प्रतिमा के सामने गाय के शुद्ध घी का एक दीपक जलाएं और साथ में सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। देवगुरु को रोली, अक्षत, पीला चंदन और साफ जल अर्पित करें। उन्हें पीले फूल चढ़ाना और चने की दाल चढ़ाना बहुत शुभ होता है।
  • पूजा के दौरान गुरुदेव को मुनक्का, मिश्री, बेसन के लड्डू, चने की दाल और गुड़ या फिर गूलर के फल का सात्विक भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद भगवान से अपनी भूल-चूक के लिए हाथ जोड़कर क्षमा जरूर मांगें।
  • अब कुशा या ऊन के एक साफ आसन पर बैठ जाएं और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखें। पूरी एकाग्रता और साफ उच्चारण के साथ श्री बृहस्पतिदेव चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद भगवान की आरती करें और सुखी जीवन की प्रार्थना करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या महिलाएं भी श्री बृहस्पतिदेव चालीसा का पाठ बहुत आराम से कर सकती हैं?

हाँ, महिलाएं भी पूरी शुद्धता, पवित्रता और सच्ची श्रद्धा के साथ देवगुरु बृहस्पति की चालीसा का पाठ बहुत आराम से कर सकती हैं। बस इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि अशुद्ध दिनों या मासिक धर्म के दौरान इस पाठ को करने से पूरी तरह बचना चाहिए।

बृहस्पतिदेव चालीसा का पाठ किस दिन से शुरू करना सबसे अच्छा माना जाता है?

इस पवित्र चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए गुरुवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है क्योंकि यह दिन देवगुरु को ही समर्पित है। इसके अलावा आप किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार से इसकी शुरुआत कर सकते हैं जो बेहद शुभ फल देता है।

क्या इस पाठ को करते समय खान-पान का कोई विशेष परहेज रखना पड़ता है?

हाँ, गुरुदेव की साधना के दौरान सात्विकता का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है। गुरुवार के दिन जितने समय आप पूजा और पाठ करते हैं, उस दिन मांस, मदिरा, तामसिक भोजन और विशेष रूप से नमक या खट्टी चीजों के सेवन से पूरी तरह परहेज रखना चाहिए।

क्या शाम के समय भी इस चालीसा का पाठ किया जा सकता है?

हाँ, अगर आपको सुबह के समय किसी वजह से फुर्सत नहीं मिल पाती है, तो आप शाम को सूर्यास्त के समय हाथ-पैर धोकर, साफ होकर भगवान के सामने घी का दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ बहुत ही शांत मन से कर सकते हैं। शाम को पाठ करने से भी मानसिक शांति मिलती है।