भगवान धन्वंतरी को देवताओं का वैद्य यानी डॉक्टर माना गया है। वे साक्षात भगवान विष्णु के अवतार हैं जो समुद्र मंथन के समय अपने चार हाथों में अमृत कलश, आयुर्वेद ग्रंथ, शंख और जड़ी-बूटियाँ लेकर प्रकट हुए थे। हिंदू संस्कृति में इन्हें पूरी दुनिया के लिए आरोग्य और चिकित्सा का देवता माना जाता है जिनकी कृपा के बिना कोई भी बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो सकती। आज के इस दौर में जब हर दूसरा इंसान किसी न किसी शारीरिक या मानसिक बीमारी से जूझ रहा है तब श्री धन्वंतरी चालीसा का पाठ करना अच्छी सेहत और लंबी उम्र पाने का सबसे आसान और अचूक तरीका माना जाता है।
आजकल की इस भागदौड़ वाली लाइफ में खराब खान-पान और भारी तनाव की वजह से अस्पतालों के चक्कर काटना और दवाओं पर पानी की तरह पैसा बहाना एक आम बात हो गई है। ज्योतिष और आयुर्वेद विज्ञान के अनुसार जो लोग नियम से या विशेष रूप से धनतेरस और हर महीने के शुक्ल पक्ष के त्रयोदशी तिथि को भगवान धन्वंतरी की आराधना करते हैं उनके घर से बीमारियाँ कोसों दूर रहती हैं। यदि आपके परिवार में भी कोई व्यक्ति लंबे समय से बीमार है या आपको अपनी सेहत को लेकर कोई न कोई टेंशन बनी रहती है तो इस पावन चालीसा की शरण लेना जीवन में सुख और आरोग्य का वास करा देता है।
श्री धन्वंतरी चालीसा पाठ में विस्तार से बताया गया है कि कैसे महर्षि दुर्वासा के श्राप के बाद जब सारे देवता श्रीहीन और कमजोर हो गए थे तब समुद्र मंथन से प्रभु का अवतार हुआ था। आज के डिजिटल जमाने में बहुत से लोग पूजा-पाठ के लिए अपने मोबाइल या टैबलेट का इस्तेमाल करना ज्यादा पसंद करते हैं ताकि वे सफर में या ऑफिस में भी समय मिलने पर पाठ कर सकें। श्री धन्वंतरी चालीसा पाठ PDF को इंटरनेट से डाउनलोड करना बेहद आसान है जिससे आप कभी भी और कहीं भी भगवान का ध्यान लगा सकते हैं।
|| श्री धन्वंतरी चालीसा (Dhanvantri Chalisa PDF) ||
॥ दोहा ॥
करूं वंदना गुरू चरण रज, ह्रदय राखी श्री राम।
मातृ पितृ चरण नमन करूँ, प्रभु कीर्ति करूँ बखान ॥
तव कीर्ति आदि अनंत है, विष्णुअवतार भिषक महान।
हृदय में आकर विराजिए, जय धन्वंतरि भगवान ॥
॥ चौपाई ॥
जय धनवंतरि जय रोगारी। सुनलो प्रभु तुम अरज हमारी ॥
तुम्हारी महिमा सब जन गावें। सकल आजुजन हिय हरषावे ॥
शाश्वत है आयुर्वेद विज्ञाना। तुम्हरी कृपा से सब जग जाना ॥
कथा अनोखी सुनी प्रकाशा। वेदों में ज्यूँ लिखी ऋषि व्यासा ॥
कुपित भयऊ तब ऋषि दुर्वासा। दीन्हा सब देवन को श्रापा ॥
श्री हीन भये सब तबहि। दर दर भटके हुए दरिद्र हि ॥
सकल मिलत गए ब्रह्मा लोका। ब्रह्म विलोकत भये हुँ अशोका ॥
परम पिता ने युक्ति विचारी। सकल समीप गए त्रिपुरारी ॥
उमापति संग सकल पधारे। रमा पति के चरण पखारे ॥
आपकी माया आप ही जाने। सकल बद्धकर खड़े पयाने ॥
इक उपाय है आप हि बोले। सकल औषध सिंधु में घोंले ॥
क्षीर सिंधु में औषध डारी। तनिक हंसे प्रभु लीला धारी ॥
मंदराचल की मथानी बनाई। दानवो से अगुवाई कराई ॥
देव जनो को पीछे लगाया। तल पृष्ठ को स्वयं हाथ लगाया ॥
मंथन हुआ भयंकर भारी। तब जन्मे प्रभु लीलाधारी ॥
अंश अवतार तब आप ही लीन्हा। धनवंतरि तेहि नामहि दीन्हा ॥
सौम्य चतुर्भुज रूप बनाया। स्तवन सब देवों ने गाया ॥
अमृत कलश लिए एक भुजा। आयुर्वेद औषध कर दूजा ॥
जन्म कथा है बड़ी निराली। सिंधु में उपजे घृत ज्यों मथानी ॥
सकल देवन को दीन्ही कान्ति। अमर वैभव से मिटी अशांति ॥
कल्पवृक्ष के आप है सहोदर। जीव जंतु के आप है सहचर ॥
तुम्हरी कृपा से आरोग्य पावा। सुदृढ़ वपु अरु ज्ञान बढ़ावा ॥
देव भिषक अश्विनी कुमारा। स्तुति करत सब भिषक परिवारा ॥
धर्म अर्थ काम अरु मोक्षा। आरोग्य है सर्वोत्तम शिक्षा ॥
तुम्हरी कृपा से धन्व राजा। बना तपस्वी नर भू राजा ॥
तनय बन धन्व घर आये। अब्ज रूप धनवंतरि कहलाये ॥
सकल ज्ञान कौशिक ऋषि पाये। कौशिक पौत्र सुश्रुत कहलाये ॥
आठ अंग में किया विभाजन। विविध रूप में गावें सज्जन ॥
अथर्व वेद से विग्रह कीन्हा। आयुर्वेद नाम तेहि दीन्हा ॥
काय, बाल, ग्रह, उर्ध्वांग चिकित्सा। शल्य, जरा, दृष्ट्र, वाजी सा ॥
माधव निदान, चरक चिकित्सा। कश्यप बाल, शल्य सुश्रुता ॥
जय अष्टांग जय चरक संहिता। जय माधव जय सुश्रुत संहिता ॥
आप है सब रोगों के शत्रु। उदर नेत्र मष्तिक अरु जत्रु ॥
सकल औषध में है व्यापी। भिषक मित्र आतुर के साथी ॥
विश्वामित्र ब्रह्म ऋषि ज्ञान। सकल औषध ज्ञान बखानि ॥
भारद्वाज ऋषि ने भी गाया। सकल ज्ञान शिष्यों को सुनाया ॥
काय चिकित्सा बनी एक शाखा। जग में फहरी शल्य पताका ॥
कौशिक कुल में जन्मा दासा। भिषकवर नाम वेद प्रकाशा ॥
धन्वंतरि का लिखा चालीसा। नित्य गावे होवे वाजी सा ॥
जो कोई इसको नित्य ध्यावे। बल वैभव सम्पन्न तन पावें ॥
॥ दोहा ॥
रोग शोक सन्ताप हरण, अमृत कलश लिए हाथ।
जरा व्याधि मद लोभ मोह, हरण करो भिषक नाथ ॥
॥ इति श्री धन्वंतरि चालीसा सम्पूर्ण ॥
श्री धन्वंतरी चालीसा पाठ के लाभ
सच्चे दिल और पूरी निष्ठा के साथ भगवान धन्वंतरी जी की चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से भक्तों को अपने जीवन में कई तरह के चमत्कारी और सुखद बदलाव महसूस होने लगते हैं। आरोग्य के देवता अपने सेवकों की पुकार बहुत जल्दी सुनते हैं और उनके शरीर से हर तरह की व्याधि यानी बीमारी को हमेशा के लिए दूर कर देते हैं।
यदि कोई भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ इस पवित्र चालीसा को अपनी रोज की पूजा का हिस्सा बनाता है तो उसे मिलने वाले मुख्य लाभ और पुण्य फल कुछ इस प्रकार हैं:
- जो लोग लंबे समय से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और दवाइयाँ काम नहीं कर रही हैं उनके लिए यह पाठ एक संजीवनी की तरह है। इसके नियमित जाप से दवाओं का असर शरीर पर जल्दी होने लगता है और पुराना दर्द धीरे-धीरे गायब हो जाता है।
- इस पावन चालीसा के नियमित गान से इंसान के मन से अचानक होने वाली अनहोनी या अकाल मृत्यु का डर हमेशा के लिए दूर भाग जाता है। भगवान धन्वंतरी अपने भक्त की रक्षा करते हैं और उन्हें एक पूर्ण, सुखी और दीर्घायु जीवन का आशीर्वाद देते हैं।
- आज के समय में काम के प्रेशर और खराब लाइफस्टाइल की वजह से लोग अक्सर मानसिक रूप से परेशान रहते हैं। चालीसा की पंक्तियों का पाठ करने से दिमाग एकदम रिलैक्स हो जाता है और मन का हर तरह का अनजाना डर या डिप्रेशन पूरी तरह खत्म हो जाता है।
- जहाँ आरोग्य होता है वहाँ समृद्धि अपने आप आ जाती है क्योंकि बीमारी में होने वाला फालतू खर्च पूरी तरह रुक जाता है। इस पाठ के प्रभाव से घर के भीतर छिपी हर तरह की नेगेटिव एनर्जी नष्ट हो जाती है जिससे परिवार में खुशहाली आती है।
- जो लोग डॉक्टर, सर्जन, नर्स या आयुर्वेद के क्षेत्र से जुड़े हैं उनके लिए यह पाठ बहुत लाभकारी है। इसके जाप से उनकी निर्णय लेने की क्षमता और मरीजों को ठीक करने की योग्यता में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी होती है।
श्री धन्वंतरी चालीसा पाठ की सही विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी पूजा या पाठ का पूरा पुण्य फल तभी मिलता है जब उसे सही नियमों, सही दिशा और शुद्ध भाव के साथ किया जाए। भगवान धन्वंतरी की पूजा में सादगी, मन की पवित्रता और स्वच्छता का होना बहुत बड़ा महत्व रखता है क्योंकि वे स्वयं शुद्धि के देवता हैं। सही तरीके से किया गया यह पाठ हमेशा बहुत जल्दी और उत्तम फल देने वाला साबित होता है।
अगर आप भी अपने जीवन के कष्टों को दूर करने और आरोग्य का वरदान पाने के लिए इस चालीसा का पाठ शुरू करना चाहते हैं तो इस बेहद आसान और सही विधि का पालन करें:
- पाठ करने के लिए सुबह का समय सबसे बढ़िया माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और पूरी तरह साफ-सुथरे कपड़े पहनें। यदि संभव हो तो पीले या हरे रंग के कपड़े पहनें क्योंकि ये रंग आरोग्य की पूजा में शुभ माने जाते हैं।
- अपने घर के मंदिर या किसी पवित्र स्थान को अच्छे से साफ कर लें। एक छोटी चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान धन्वंतरी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। यदि मूर्ति न हो तो आप भगवान विष्णु की तस्वीर के सामने भी यह पाठ कर सकते हैं।
- भगवान की प्रतिमा के सामने शुद्ध देसी घी का एक दीपक जलाएं और साथ में सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। प्रभु को पीले चंदन या केसर का तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें। पूजा में ताजे पीले फूल और तुलसी का पत्ता जरूर चढ़ाएं।
- पूजा के दौरान भगवान को मौसमी फलों, मिश्री या फिर गाय के दूध से बनी सात्विक चीजों का भोग लगाएं। इसके साथ ही आप चाहें तो कुछ औषधीय चीजें जैसे तुलसी के पत्ते या गिलोय भी अर्पित कर सकते हैं और बाद में उसे प्रसाद रूप में ले सकते हैं।
- अब कुशा या ऊन के एक साफ आसन पर बैठ जाएं और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखें। पूरी एकाग्रता और साफ उच्चारण के साथ श्री धन्वंतरी चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद प्रभु की आरती करें और सुखी जीवन की प्रार्थना करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या घर की महिलाएं भी धन्वंतरी चालीसा का पाठ कर सकती हैं?
हाँ, घर की महिलाएं भी अपने परिवार की अच्छी सेहत, बच्चों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए धन्वंतरी चालीसा का पाठ पूरी श्रद्धा के साथ कर सकती हैं। भगवान अपने हर भक्त की सच्ची पुकार बहुत जल्दी सुनते हैं।
धन्वंतरी चालीसा का पाठ किस दिन से शुरू करना सबसे अच्छा माना जाता है?
इस पवित्र चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए धनतेरस का दिन सबसे उत्तम माना जाता है क्योंकि इसी दिन भगवान धन्वंतरी का जन्म हुआ था। इसके अलावा आप किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार या त्रयोदशी तिथि से इसकी शुरुआत कर सकते हैं।
क्या शाम के समय भी इस चालीसा का पाठ किया जा सकता है?
हाँ, अगर आपको सुबह के समय किसी वजह से टाइम नहीं मिल पाता है तो आप शाम को सूर्यास्त के समय हाथ-पैर धोकर, पूरी तरह साफ होकर भगवान के सामने घी का दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ बहुत ही शांत मन से कर सकते हैं।
पाठ के दिनों में खान-पान को लेकर क्या परहेज रखना जरूरी है?
चूंकि यह पूजा पूरी तरह से स्वास्थ्य और सात्विकता से जुड़ी है, इसलिए जितने दिन भी आप धन्वंतरी चालीसा का पाठ करते हैं उतने दिन घर में सात्विक माहौल रखें और मांस, मदिरा या किसी भी तरह के तामसिक भोजन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें।

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