भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है यानी किसी भी शुभ काम, शादी-ब्याह या पूजा-पाठ की शुरुआत करने से पहले हमेशा गजानन की आराधना की जाती है। वे विघ्नहर्ता हैं जिसका सीधा मतलब है कि वे आपके रास्ते में आने वाली हर छोटी-बड़ी रुकावट को पल भर में दूर कर देते हैं। कलयुग के इस बिजी और तनावभरे समय में बप्पा को प्रसन्न करने का सबसे आसान और असरदार तरीका श्री गणेश चालीसा का पाठ करना है। शास्त्रों और धार्मिक विद्वानों के अनुसार जो लोग विशेष रूप से हर बुधवार, गणेश चतुर्थी या साल के बड़े त्योहारों पर बप्पा की सच्चे दिल से आराधना करते हैं, उनके घर में कभी नेगेटिविटी नहीं टिकती।
इस चमत्कारी चालीसा का पाठ करने से इंसान की सोचने-समझने की क्षमता यानी आईक्यू लेवल बहुत अच्छा होता है और लाइफ में सही डिसीजन लेने का कॉन्फिडेंस आता है। श्री गणेश चालीसा पाठ चालीस बेहद सुंदर और चमत्कारी पंक्तियों का एक ऐसा संग्रह है जो साधारण भक्तों के लिए बप्पा का आशीर्वाद पाने का सबसे सरल माध्यम है। इस पूरे पाठ में गणेश जी के सुंदर रूप, उनके सोने के मुकुट, विशाल आंखों, उनके अस्त्र-शस्त्र और उनके प्रिय भोग मोदक का बहुत ही प्यारा वर्णन मिलता है। इस पावन चालीसा में बप्पा के जन्म की वह मशहूर कथा भी शामिल है जब माता पार्वती ने पुत्र प्राप्ति के लिए भारी तपस्या की थी। साथ ही इसमें यह भी बताया गया है कि कैसे बप्पा ने अपनी तीव्र बुद्धि का इस्तेमाल करके अपने माता-पिता की सात परिक्रमा की और पूरी दुनिया में प्रथम पूज्य होने का गौरव प्राप्त किया।
आज के इस आधुनिक और स्मार्टफोन के दौर में ज्यादातर लोग पूजा की भारी-भरकम किताबें हर जगह साथ ले जाने के बजाय अपने मोबाइल फोन या टैबलेट में ही पाठ पढ़ना ज्यादा पसंद करते हैं। श्री गणेश चालीसा पाठ PDF को ऑनलाइन डाउनलोड करके अपने डिवाइस में सेव रखना एक बहुत ही अच्छा और स्मार्ट तरीका बन चुका है। इसकी मदद से आप सुबह ऑफिस जाते समय मेट्रो या बस में, यात्रा के दौरान या घर से बाहर होने पर भी अपनी रोज की पूजा को बिना किसी नागे के बहुत ही आराम से पूरा कर सकते हैं। यह पीडीएफ फाइल इंटरनेट पर पूरी तरह से फ्री में मिल जाती है।
|| श्री गणेश चालीसा (Ganesh Chalisa PDF) ||
॥ दोहा ॥
जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल ।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल ॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय गणपति गणराजू । मंगल भरण करण शुभः काजू ॥
जै गजबदन सदन सुखदाता । विश्व विनायका बुद्धि विधाता ॥
वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना । तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ॥
राजत मणि मुक्तन उर माला । स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं । मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजित । चरण पादुका मुनि मन राजित ॥
धनि शिव suvan षडानन भ्राता । गौरी लालन विश्व-विख्याता ॥
ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे । मुषक वाहन सोहत द्वारे ॥
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी । अति शुची पावन मंगलकारी ॥
एक समय गिरिराज कुमारी । पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ॥
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा । तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा ॥
अतिथि जानी के गौरी सुखारी । बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ॥
अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा । मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला । बिना गर्भ धारण यहि काला ॥
गणनायक गुण ज्ञान निधाना । पूजित प्रथम रूप भगवाना ॥
अस कही अन्तर्धान रूप हवै । पालना पर बालक स्वरूप हवै ॥
बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना । लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना ॥
ककल मगन, सुखमंगल गावहिं । नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ॥
शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं । सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ॥
लखि अति आनन्द मंगल साजा । देखन भी आये शनि राजा ॥
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं । बालक, देखन चाहत नाहीं ॥
गिरिजा कछु मन भेद बढायो । उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ॥
कहत लगे शनि, मन सकुचाई । का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई ॥
नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ । शनि सों बालक देखन कहयऊ ॥
पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा । बालक सिर उड़ि गयो अकाशा ॥
गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी । सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी ॥
हाहाकार मच्यौ कैलाशा । शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा ॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो । काटी चक्र सो गज सिर लाये ॥
बालक के धड़ ऊपर धारयो । प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ॥
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे । प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ॥
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा । पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ॥
चले षडानन, भरमि भुलाई । रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ॥
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें । तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें ॥
धनि गणेश कही शिव हिये हरषे । नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ॥
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई । शेष सहसमुख सके न गाई ॥
मैं मतिहीन मलीन दुखारी । करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ॥
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा । जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ॥
अब प्रभु दया दीना पर कीजै । अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ॥
॥ दोहा ॥
श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान ।
नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान ॥
सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश ।
पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश ॥
॥ इति श्री गणेश चालीसा सम्पूर्ण ॥
श्री गणेश चालीसा पाठ के लाभ
सच्चे दिल, साफ नियत और पूरे विश्वास के साथ गजानन की चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से भक्तों को अपनी लाइफ में कई तरह के चमत्कारी और शुभ बदलाव खुद महसूस होने लगते हैं। बुद्धि के दाता श्री गणेश अपने बच्चों की पुकार बहुत जल्दी सुनते हैं और उनके घर-परिवार के चारों तरफ एक ऐसा पॉजिटिव सुरक्षा कवच बना देते हैं जिससे कोई भी बड़ी मुसीबत उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाती।
यदि कोई भी श्रद्धालु इस पावन चालीसा को अपनी रोज की पूजा का हिस्सा बनाता है या हर बुधवार को इसका विशेष पाठ करता है तो बप्पा की कृपा से उसे नीचे दिए गए मुख्य लाभ बहुत ही जल्दी प्राप्त होते हैं:
- विद्यार्थियों और किसी भी नए काम की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह पाठ सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। बप्पा बुद्धि के विधाता हैं, इसलिए इस चालीसा को पढ़ने से याददाश्त बहुत तेज होती है और कठिन से कठिन विषयों को समझने की क्षमता बढ़ जाती है।
- यदि आपके बनते हुए काम ऐन वक्त पर बिगड़ जाते हैं या नौकरी और बिजनेस में लगातार रुकावटें आ रही हैं, तो यह पाठ आपके सारे रास्ते खोल देता है। विघ्नहर्ता आपके जीवन की सभी बाधाओं को दूर करके आपको सफलता की राह पर ले जाते हैं।
- बप्पा के साथ हमेशा रिद्धि और सिद्धि का वास होता है जो धन और वैभव की देवियां हैं। इस चालीसा का नियमित गान करने से घर में पैसों की तंगी हमेशा के लिए खत्म हो जाती है, फिजूलखर्च रुकता है और परिवार में बरकत आती है।
- आज की भागदौड़ भरी और बिजी लाइफ में लोग अक्सर मानसिक अशांति का शिकार हो जाते हैं। बप्पा की चालीसा का पाठ करने से दिमाग को बहुत सुकून मिलता है, मन का हर तरह का अनजाना डर पूरी तरह दूर होता है और आत्मिक शांति मिलती है।
- जिस घर में नियमित रूप से गणेश चालीसा की आवाज गूंजती है, वहाँ का माहौल हमेशा खुशनुमा रहता है। परिवार के सदस्यों के बीच चल रहे आपसी मतभेद या लड़ाई-झगड़े शांत होते हैं और समाज में व्यक्ति की प्रतिष्ठा बहुत बढ़ती है।
श्री गणेश चालीसा पाठ की सही विधि
शास्त्रों के अनुसार किसी भी देवी-देवता की पूजा या स्तुति का पूरा पुण्य फल तभी प्राप्त होता है जब उसे सही नियमों, सही दिशा और शुद्ध भाव के साथ संपन्न किया जाए। वैसे तो बप्पा बहुत ही भोले हैं और केवल एक दूर्वा चढ़ाने से भी प्रसन्न हो जाते हैं, लेकिन पूजा के दौरान साफ-सफाई रखना और पवित्रता का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है। सही तरीके से किया गया यह पाठ हमेशा बहुत जल्दी और मनचाहा फल देने वाला साबित होता है।
यदि आप भी अपने जीवन के कष्टों को दूर करने और भगवान गणेश का दिव्य आशीर्वाद पाने के लिए इस चालीसा का पाठ शुरू करना चाहते हैं तो इस आसान और सही विधि का पालन करें:
- इस पावन पाठ को करने के लिए सुबह या ब्रह्म मुहूर्त का समय सबसे बढ़िया माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर नहा धो लें और पूरी तरह साफ कपड़े पहनें। बप्पा की पूजा में पीले, लाल या हरे रंग के कपड़ों का प्रयोग करना सबसे ज्यादा फलदायी और शुभ माना गया है।
- अपने घर के पूजा स्थल को अच्छे से साफ कर लें। एक लकड़ी की छोटी चौकी पर पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान श्री गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। पूजा करते समय आपका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
- गणेश जी की प्रतिमा के सामने गाय के शुद्ध देसी घी का एक दीपक जलाएं और साथ में एक सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। बप्पा को कुंकुम, रोली और चंदन का तिलक लगाएं। उन्हें दूर्वा यानी तीन हरी घास की पत्तियां और लाल रंग के फूल चढ़ाना बेहद जरूरी और उत्तम माना जाता है।
- पूजा के समय माता गौरी के लाल को उनकी सबसे प्रिय चीजें जैसे बेसन या बूंदी के लड्डू, मोदक, या फिर ताजे फल अर्पित करें। तामसिक चीजों का भोग भूलकर भी न लगाएं। भोग लगाने के बाद बप्पा से अपने अनजाने में हुए पापों के लिए क्षमा मांगें।
- अब ऊन या कुशा के बने साफ आसन पर बैठ जाएं और पूरी एकाग्रता और साफ शब्दों में श्री गणेश चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद खड़े होकर बप्पा की आरती करें, उन्हें अपनी मनोकामना बताएं और शांत मन से कुछ देर उनका ध्यान लगाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या बप्पा की पूजा में दूर्वा यानी घास चढ़ाना बहुत जरूरी होता है?
हाँ, भगवान श्री गणेश की पूजा में दूर्वा का होना बेहद जरूरी और शुभ माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार दूर्वा चढ़ाने से बप्पा के शरीर की गर्मी शांत हुई थी, इसलिए यदि आप चालीसा पाठ के समय उन्हें 21 दूर्वा की गांठ अर्पित करते हैं तो वे बहुत जल्दी प्रसन्न होकर अपना आशीर्वाद देते हैं।
श्री गणेश चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए कौन सा दिन सबसे बेस्ट माना जाता है?
इस पवित्र चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए बुधवार का दिन सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है क्योंकि यह दिन विशेष रूप से बप्पा की साधना के लिए समर्पित है। इसके अलावा आप गणेश चतुर्थी के पावन दिन से या किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं।
क्या इस पावन चालीसा का पाठ शाम के समय भी किया जा सकता है?
हाँ, अगर आपको सुबह के समय किसी वजह से टाइम नहीं मिल पाता है तो आप शाम को सूर्यास्त के समय यानी प्रदोष काल में हाथ-पैर धोकर, पूरी तरह साफ होकर माता गौरी के लाल के सामने घी का दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ बहुत ही शांत और एकाग्र मन से कर सकते हैं।
गणेश चालीसा पाठ के दौरान किन बातों का परहेज करना बहुत जरूरी है?
इस पाठ की साधना के दिनों में सात्विकता का कड़ाई से पालन करना चाहिए। जितने दिन भी आप इस चालीसा का पाठ विशेष मन्नत के लिए करते हैं उतने दिन आपको पूरी तरह से सात्विक रहना होगा और घर में मांस, मदिरा, अंडा, लहसुन और प्याज जैसे हर तरह के तामसिक भोजन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगानी होगी।

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