श्री गौरी माँ चालीसा पाठ वास्तव में चालीस पंक्तियों की एक बेहद सुंदर और शक्तिशाली स्तुति है, जिसमें माता के ममतामयी रूप, उनके शिव परिवार और उनकी असीम महिमा का गुणगान किया गया है। माता गौरी को सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी कहा जाता है, जो अपने भक्तों के थोड़े से सुमरन से ही प्रसन्न हो जाती हैं। इस चालीसा की रचना इतनी सरल भाषा में की गई है कि इसका पाठ कोई भी आम इंसान अपने रोजमर्रा के जीवन में बहुत आसानी से कर सकता है। इस पवित्र पाठ में माता गौरी के दिव्य स्वरूप का वर्णन है, जो अपने भक्तों को संतान सुख, धन-धान्य और सुयोग्य वर का वरदान देती हैं।
जहां कठिन मंत्रों के जाप के लिए बहुत कड़े नियमों और शुद्ध उच्चारण की जरूरत होती है, वहीं इस चालीसा को कोई भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ अपने घर के मंदिर में बैठकर पढ़ सकता है। यह पाठ इंसान के मन को शांत करता है और पूरे परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। भगवान शिव की अर्धांगिनी मां पार्वती का ही सौम्य रूप माता गौरी हैं, जिनकी पूजा करने से वैवाहिक जीवन की सारी परेशानियां खत्म हो जाती हैं। माता गौरी की कृपा पाने का सबसे सरल और सीधा माध्यम श्री गौरी माँ चालीसा का पाठ करना है। इस पावन पाठ को करने से घर में सुख-शांति आती है और जीवन के सभी क्लेश हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं।
आज के समय में जब आपसी रिश्तों में तनाव और शादी-ब्याह में रुकावटें बहुत आम बात हो गई हैं, तब मां गौरी की शरण लेना एक बहुत बड़ा संबल देता है। कलयुग में इस चालीसा का पाठ श्रद्धा भाव से करने पर मनचाहे जीवनसाथी की इच्छा पूरी होती है। घर की सुख-समृद्धि बढ़ाने और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए भी यह पाठ अचूक माना जाता है। आइए बहुत ही आसान शब्दों में समझते हैं कि इस चालीसा के क्या फायदे हैं और इसे करने का सही नियम क्या है।
|| श्री गौरी माँ चालीसा (Gauri Maa Chalisa PDF) ||
॥ दोहा ॥
मन मन्दिर मेरे इन बसों, आरंभ करूं गुणगान।
गौरी माँ मातेश्वरी, दो चरणों का ध्यान।
पूजन विधि ना जानती, पर श्रद्धा है अपार,
प्रणाम मेरा स्वीकारिये, माँ प्राण आधार।।
॥ चौपाई ॥
नमो नमो हे गौरी माता। आप हो मेरी भाग्य विधाता।।
शरनागत न कभी घबराता। गौरी उमा शंकरी माता।।
आपका प्रिय है आदर पाता। जय हो कार्तिकेय गणेश की माता।।
महादेव गणपति संग आओ। मेरे सकल क्लेश मिटाओ।।
सार्थक हो जाए जग में जीना। सद्कर्मों से कभी हटूं ना।।
सकल मनोरथ पूर्ण कीजो। सुख सुविधा वरदान में दीजो।।
हे माँ भाग्य रेखा जगा दो। मन भावन संयोग मिला दो।।
मन को भाये वोह वर चाहूँ। ससुराल पक्ष का स्नेह मैं पाऊँ।।
परम आराध्या आप हो मेरी। फ़िर क्यों वर मे इतनी देरी।।
हमरे काज सम्पूर्ण कीजो। थोडे़ में बरकत भर दीजो।।
अपनी दया बनाए रखना। भक्ति भाव जगाये रखना।।
गौरी माता अंगसंग रहना। कभी न खोऊं मन का चैना।।
देव मुनि सब सीस निवाते। सुख सुविधा को वर में पाते।।
श्रद्धा भाव जो लेकर आया। बिन मांगे भी सब कुछ पाया।।
हर संकट से उसे उबारा। आगे बढ़ के दिया सहारा।।
जबहिं आप माँ स्नेह दिखलावें। निराश मन मे आस जगावें।।
शिव भी आपका कहा ना टालें। दया दृष्टि हम पे डालें।।
जो जन करता आपका ध्यान। जग में पाये मान सम्मान।।
सच्चे मन जो सिमरण करती। उसके सुहाग की रक्षा करती।।
दया दृष्टि जब माँ डारें। भवसागर से पार उतारें।।
जपे जो ॐ नमः शिवाय। शिव परिवार का स्नेह वो पाय।।
जिस पे आप दया दिखावें। दुष्ट आत्मा नहीं सतावें।।
सद्गुण की हो दाता आप। हर इक मन की ज्ञाता आप।।
काटो हमरे सकल क्लेश। निरोग रहे परिवार हमेश।।
दुख संताप मिटा देना माँ। मेघ दया के बरसा देना माँ।।
जबहिं आप मौज में आए। हठ जाए माँ सब विपदायें।।
जिसपे दयाल हों माता आप। उसका बढ़ता पुण्य प्रताप।।
फल-फूल मैं दुग्ध चढ़ाऊं। श्रद्धाभाव से आपको ध्याऊं।।
अवगुण मेरे ढक देना माँ। ममता आंचल कर देना माँ।।
कठिन नहीं कुछ आपको माता। जग ठुकराया दया को पाता।।
गिन पाऊं न गुन माँ तेरे। नाम धाम स्वरूप बहूतेरे।।
जितने आपके पावन धाम। सब धामों को माँ प्राणम।।
आपकी दया का है ना पार। तभी तो पूजे कुल संसार।।
निरमल मन जो शरण में आता। मुक्ति की वोह युक्ति पाता।।
संतोष धन से दामन भर दो। असंभव को माँ संभव कर दो।।
आपकी दया के भारे भण्डार। सुखी वसे मेरा परिवार।।
आपकी महिमा अति निराली। भक्तों के दुःख हरने वाली।।
मनोकामना पूर्ण करती। मन की दुविधा पल मे हरती।।
चालीसा जो भी पढे सुनाय। सुयोग्य वर वरदान मे पाय।।
आशा पूर्ण कर देना माँ। सुमंगल साखी वर देना माँ।।
॥ दोहा ॥
गौरी माँ विनती करूँ, आना आपके द्वार।
ऐसी माँ कृपा किजिये, हो जाए उद्धार।।
दीन-हीन हूँ शरण में, दो चरणों का ध्यान।
ऐसी कृपा कीजिये, पाऊँ मान सम्मान।।
श्री गौरी माँ चालीसा पाठ के लाभ
माता गौरी की चालीसा का नियमित रूप से या विशेष अवसरों पर पाठ करने से साधक को अपने जीवन में बहुत ही चमत्कारी और सुखद बदलाव महसूस होते हैं। मां अपने भक्तों की सच्ची पुकार बहुत जल्दी सुनती हैं और उनके दामन को खुशियों से भर देती हैं।
यदि कोई व्यक्ति पूरी निष्ठा और अटूट विश्वास के साथ इस पवित्र चालीसा को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाता है, तो उसे निम्नलिखित मुख्य लाभ और पुण्य फल प्राप्त होते हैं:
- जिन युवक-युवतियों के विवाह में लगातार रुकावटें आ रही हैं या मनमुताबिक रिश्ता नहीं मिल पा रहा है, उनके लिए यह पाठ सबसे उत्तम उपाय है। माता गौरी की कृपा से विवाह की सारी बाधाएं बहुत जल्दी दूर हो जाती हैं।
- सुहागिन महिलाओं के लिए यह पाठ बहुत ही फलदायी माना गया है। इसके प्रभाव से पति-पत्नी के बीच चल रहे आपसी मतभेद, लड़ाई-झगड़े हमेशा के लिए खत्म हो जाते हैं और आपसी प्रेम व विश्वास बहुत मजबूत होता है।
- चालीसा की पंक्तियों के अनुसार, जो लड़कियां शादी के बाद इस पाठ को करती हैं, उन्हें अपने ससुराल पक्ष से बहुत प्यार, सहयोग और मान-सम्मान मिलता है, जिससे उनका नया जीवन सुखमय बनता है।
- इस अद्भुत पाठ के असर से घर का वातावरण पूरी तरह से पवित्र और शांतिमय हो जाता है। परिवार के सदस्य गंभीर बीमारियों से बचे रहते हैं और घर में बरकत हमेशा बनी रहती है।
- जो लोग अक्सर मानसिक तनाव या अनजाने डर से परेशान रहते हैं, उन्हें इस चालीसा के जाप से अद्भुत आत्मिक बल मिलता है। मां गौरी साधक के जीवन के सभी संकटों को आगे बढ़कर दूर कर देती हैं।
श्री गौरी माँ चालीसा पाठ की सही विधि
शास्त्रों के अनुसार, किसी भी पूजा या पाठ का पूरा फल तभी मिलता है जब उसे सही नियमों और शुद्ध भाव के साथ किया जाए। माता गौरी की पूजा में लाल, पीले और गुलाबी रंगों का बहुत विशेष महत्व माना गया है क्योंकि ये रंग सौभाग्य के प्रतीक हैं। सही तरीके से किया गया पाठ हमेशा उत्तम और शीघ्र फल देने वाला साबित होता है।
अगर आप भी अपने जीवन के कष्टों को दूर करने और माता का आशीर्वाद पाने के लिए इस चालीसा का पाठ करना चाहते हैं, तो इस सरल और सही विधि का पालन करें:
- पाठ करने के लिए सुबह का समय सबसे बढ़िया माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इस पूजा में साधक का साफ-सुथरे कपड़े पहनना, खासकर लाल या पीले रंग के कपड़े पहनना बहुत शुभ होता है।
- अपने घर के मंदिर या किसी शांत कोने को अच्छे से साफ कर लें। एक छोटी चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर माता गौरी या शिव परिवार की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- माता की प्रतिमा के सामने शुद्ध घी का एक दीपक जलाएं और साथ में सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। मां गौरी को कुंकुम, अक्षत, लाल फूल और श्रृंगार की सामग्री जैसे चूड़ियां, बिंदी और सिंदूर श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
- माता को साफ जल का अर्घ्य दें और भोग में फल, मिठाई या गाय का शुद्ध दूध अर्पित करें। पूजा के समय अपना पूरा ध्यान माता के ममतामयी रूप पर ही केंद्रित रखें।
- अब कुशा या ऊन के आसन पर बैठ जाएं और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखें। पूरी एकाग्रता के साथ श्री गौरी माँ चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद माता की कपूर से आरती करें और सुखी जीवन की प्रार्थना करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कुंवारे लड़के भी मां गौरी की चालीसा का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, सुयोग्य पत्नी और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए कुंवारे लड़के भी पूरी श्रद्धा के साथ मां गौरी की चालीसा का पाठ कर सकते हैं। माता की भक्ति सबके लिए कल्याणकारी है।
गौरी माँ चालीसा का पाठ किस दिन से शुरू करना सबसे अच्छा होता है?
इस चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए सोमवार या शुक्रवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा आप नवरात्रि के पावन दिनों से या किसी भी शुभ तिथि से इस पाठ की शुरुआत कर सकते हैं।
क्या शाम के समय भी इस चालीसा का पाठ किया जा सकता है?
हाँ, अगर आपको सुबह के समय किसी कारणवश फुर्सत नहीं मिलती है, तो आप शाम को सूर्यास्त के बाद हाथ-पैर धोकर और साफ होकर मां के सामने घी का दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ बहुत आराम से कर सकते हैं।
पाठ के दौरान महिलाओं को किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए?
महिलाओं को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि अशुद्ध दिनों या मासिक धर्म के दौरान इस पाठ को करने से पूरी तरह बचना चाहिए। उन दिनों में आप केवल मन ही मन मां का ध्यान कर सकती हैं।

0 Comments