हिंदू परिवारों में लड्डू गोपाल को घर के एक छोटे सदस्य या बच्चे की तरह रखा जाता है और उनकी निस्वार्थ सेवा की जाती है। पुराणों के अनुसार प्रभु का गोपाल रूप साक्षात प्रेम, आनंद और सकारात्मकता का भंडार है जिनकी पूजा करने से घर का पूरा माहौल एकदम खुशहाल हो जाता है। कलयुग के इस दौर में भगवान श्री कृष्ण की दिव्य कृपा पाने, अपनी सोई हुई किस्मत को चमकाने और जीवन की हर छोटी-बड़ी टेंशन को दूर करने के लिए श्री गोपाल चालीसा का पाठ सबसे ज्यादा आसान और असरदार तरीका माना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में भी ऐसा माना गया है कि जो लोग नियम से या हर बुधवार और एकादशी को इस चालीसा का गान करते हैं उनके घर से हर तरह की निगेटिविटी और वास्तु दोष हमेशा के लिए खत्म हो जाते हैं। अगर आपके काम बनते-बनते अचानक बिगड़ जाते हैं या घर में हमेशा अशांति रहती है तो इस पावन चालीसा की शरण लेना सबसे बेस्ट और सरल उपाय है। श्री गोपाल चालीसा पाठ वास्तव में चालीस पंक्तियों की एक बेहद सुंदर और प्रभावशाली स्तुति है जिसमें भगवान श्री कृष्ण के बचपन की लीलाओं, उनके अद्भुत अवतार और दुष्टों के संहार का पूरा वर्णन किया गया है।
इस चालीसा में विस्तार से बताया गया है कि कैसे प्रभु ने खेल-खेल में पूतना, तृणावर्त और बकासुर जैसे बड़े-बड़े राक्षसों का अंत किया और कैसे अपनी छोटी सी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर पूरे ब्रजमंडल की रक्षा की थी। इस पावन पाठ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके शब्द बहुत ही सीधे और सरल हैं जिसे कोई भी साधारण व्यक्ति अपनी रोज की पूजा में बहुत ही सहजता से शामिल कर सकता है। यह चालीसा इंसान के दिल से हर तरह के डर और कड़वाहट को दूर करती है और पूरे परिवार के चारों तरफ सुख-शांति का एक मजबूत सुरक्षा कवच बना देती है।
|| श्री गोपाल चालीसा (Gopal Chalisa PDF) ||
॥ दोहा ॥
श्री राधापद कमल रज, सिर धरि यमुना कूल।
वरणो चालीसा सरस, सकल सुमंगल मूल॥
॥ चौपाई ॥
जय जय पूरण ब्रह्म बिहारी। दुष्ट दलन लीला अवतारी॥
जो कोई तुम्हरी लीला गावै। बिन श्रम सकल पदारथ पावै॥
श्री वसुदेव देवकी माता। प्रकट भये संग हलधर भ्राता॥
मथुरा सों प्रभु गोकुल आये। नन्द भवन मे बजत बधाये॥
जो विष देन पूतना आई। सो मुक्ति दै धाम पठाई॥
तृणावर्त राक्षस संहारयौ। पग बढ़ाय सकटासुर मार्यौ॥
खेल खेल में माटी खाई। मुख मे सब जग दियो दिखाई॥
गोपिन घर घर माखन खायो। जसुमति बाल केलि सुख पायो॥
ऊखल सों निज अंग बँधाई। यमलार्जुन जड़ योनि छुड़ाई॥
बका असुर की चोंच विदारी। विकट अघासुर दियो सँहारी॥
ब्रह्मा बालक वत्स चुराये। मोहन को मोहन हित आये॥
बाल वत्स सब बने मुरारी। ब्रह्मा विनय करी तब भारी॥
काली नाग नाथि भगवाना। दावानल को कीन्हों पाना॥
सखन संग खेलत सुख पायो। श्रीदामा निज कन्ध चढ़ायो॥
चीर हरन करि सीख सिखाई। नख पर गिरवर लियो उठााई॥
दरश यज्ञ पत्निन को दीन्हों। राधा प्रेम सुधा सुख लीन्हों॥
नन्दहिं वरुण लोक सों लाये। ग्वालन को निज लोक दिखाये॥
शरद चन्द्र लखि वेणु बजाई। अति सुख दीन्हों रास रचाई॥
अजगर सों पितु चरण छुड़ायो। शंखचूड़ को मूड़ गिरायो॥
हने अरिष्टा सुर अरु केशी। व्योमासुर मार्यो छल वेषी॥
व्याकुल ब्रज तजि मथुरा आये। मारि कंस यदुवंश बसाये॥
मात पिता की बन्दि छुड़ाई। सान्दीपन गृह विघा पाई॥
पुनि पठयौ ब्रज ऊधौ ज्ञानी। पे्रम देखि सुधि सकल भुलानी॥
कीन्हीं कुबरी सुन्दर नारी। हरि लाये रुक्मिणि सुकुमारी॥
भौमासुर हनि भक्त छुड़ाये। सुरन जीति सुरतरु महि लाये॥
दन्तवक्र शिशुपाल संहारे। खग मृग नृग अरु बधिक उधारे॥
दीन सुदामा धनपति कीन्हों। पाराि रथ सारथि यश लीन्हों॥
गीता ज्ञान सिखावन हारे। अर्जुन मोह मिटावन हारे॥
केला भक्त बिदुर घर पायो। युद्ध महाभारत रचवायो॥
द्रुपद सुता को चीर बढ़ायो। गर्भ परीक्षित जरत बचायो॥
कच्छ मच्छ वाराह अहीशा। बावन कल्की बुद्धि मुनीशा॥
ह्वै नृसिंह प्रह्लाद उबार्यो। राम रुप धरि रावण मार्यो॥
जय मधु कैटभ दैत्य हनैया। अम्बरीय प्रिय चक्र धरैया॥
ब्याध अजामिल दीन्हें तारी। शबरी अरु गणिका सी नारी॥
गरुड़ासन गज फन्द निकन्दन। देहु दरश धु्रव नयनानन्दन॥
देहु शुद्ध सन्तन कर सग्ड़ा। बाढ़ै प्रेम भक्ति रस रग्ड़ा॥
देहु दिव्य वृन्दावन बासा। छूटै मृग तृष्णा जग आशा॥
तुम्हरो ध्यान धरत शिव नारद। शुक सनकादिक ब्रह्म विशारद॥
जय जय राधारमण कृपाला। हरण सकल संकट भ्रम जाला॥
बिनसैं बिघन रोग दुःख भारी। जो सुमरैं जगपति गिरधारी॥
जो सत बार पढ़ै चालीसा। देहि सकल बाँछित फल शीशा॥
॥ छन्द ॥
गोपाल चालीसा पढ़ै नित, नेम सों चित्त लावई।
सो दिव्य तन धरि अन्त महँ, गोलोक धाम सिधावई॥
संसार सुख सम्पत्ति सकल, जो भक्तजन सन महँ चहैं।
जयरामदेव सदैव सो, गुरुदेव दाया सों लहैं॥
॥ दोहा ॥
प्रणत पाल अशरण शरण, करुणा सिन्धु ब्रजेश।
चालीसा के संग मोहि, अपनावहु प्राणेश॥
॥ इति श्री गोपाल चालीसा समाप्त ॥
श्री गोपाल चालीसा पाठ के लाभ
सच्चे दिल और पूरी निष्ठा के साथ भगवान गोपाल जी की चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से भक्तों को अपने जीवन में कई तरह के चमत्कारी और सुखद बदलाव महसूस होने लगते हैं। कान्हा अपने सेवकों की पुकार बहुत जल्दी सुनते हैं और उनके जीवन की हर बड़ी से बड़ी बाधा को हंसते-हंसते दूर कर देते हैं।
यदि कोई भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ इस पवित्र चालीसा को अपनी रोज की पूजा का हिस्सा बनाता है तो उसे मिलने वाले मुख्य लाभ और पुण्य फल कुछ इस प्रकार हैं:
- जो शादीशुदा जोड़े लंबे समय से संतान सुख से वंचित हैं उनके लिए यह पाठ एक अचूक वरदान की तरह है। इसके नियमित जाप से घर में गुणी और संस्कारी संतान का जन्म होता है और साथ ही घर के बच्चों की बुद्धि बहुत तेज होती है जिससे उनका पढ़ाई में मन लगने लगता है।
- आज के समय में काम के प्रेशर और लाइफस्टाइल की वजह से लोग अक्सर मानसिक रूप से परेशान रहते हैं। गोपाल चालीसा की मधुर पंक्तियों का पाठ करने से दिमाग एकदम रिलैक्स हो जाता है और मन का हर तरह का डर या डिप्रेशन हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
- इस पावन पाठ के नियमित गान से घर की कंगाली, दरिद्रता और पैसों की तंगी हमेशा के लिए दूर भाग जाती है। व्यापार और नौकरी में आ रही सारी रुकावटें अपने आप खत्म हो जाती हैं जिससे घर में बरकत आती है और सुख-सुविधाओं में लगातार बढ़ोतरी होती है।
- चालीसा की पंक्तियों के अनुसार जो व्यक्ति इस पाठ को करता है उसके जीवन के बड़े से बड़े विघ्न, रोग और भारी दुख पल भर में नष्ट हो जाते हैं। प्रभु अपने भक्तों की सेहत की रक्षा करते हैं और उन्हें एक लंबी और सेहतमंद जिंदगी का आशीर्वाद देते हैं।
- इस चालीसा के नियमित पाठ से इंसान के जनम-जनम के पाप धुल जाते हैं। व्यक्ति इस संसार के सभी सुखों को भोगते हुए अंत समय में सीधे भगवान के परम धाम यानी गोलोक धाम को सिधारता है जहाँ उसे परम आनंद की प्राप्ति होती है।
श्री गोपाल चालीसा पाठ की सही विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी पूजा या पाठ का पूरा पुण्य फल तभी मिलता है जब उसे सही नियमों, सही दिशा और शुद्ध भाव के साथ किया जाए। लड्डू गोपाल की पूजा में सादगी, मन की पवित्रता और बाल भाव का होना बहुत बड़ा महत्व रखता है क्योंकि वे प्रेम के भूखे हैं। सही तरीके से किया गया यह पाठ हमेशा बहुत जल्दी और उत्तम फल देने वाला साबित होता है।
अगर आप भी अपने जीवन के कष्टों को दूर करने और भगवान श्री कृष्ण का आशीर्वाद पाने के लिए इस चालीसा का पाठ शुरू करना चाहते हैं तो इस बेहद आसान और सही विधि का पालन करें:
- पाठ करने के लिए सुबह का समय सबसे बढ़िया माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इस पूजा में साधक का पूरी तरह साफ-सुथरे कपड़े पहनना जरूरी है और यदि संभव हो तो पीले रंग के कपड़े पहनें क्योंकि पीला रंग कान्हा को बहुत ज्यादा पसंद है।
- अपने घर के मंदिर या किसी पवित्र स्थान को अच्छे से साफ कर लें। एक छोटी चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं और उस पर लड्डू गोपाल या राधा-कृष्ण की तस्वीर स्थापित करें। कान्हा की मूर्ति को गंगाजल और चंदन से अच्छे से साफ करके सुंदर कपड़े पहनाएं।
- भगवान की प्रतिमा के सामने शुद्ध देसी घी का एक दीपक जलाएं और साथ में सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। प्रभु को चंदन का तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें। पूजा में ताजे फूल और सबसे जरूरी तुलसी का पत्ता जरूर चढ़ाएं क्योंकि कान्हा तुलसी के बिना कोई पूजा स्वीकार नहीं करते।
- पूजा के दौरान गोपाल जी को उनकी सबसे प्रिय चीजें जैसे माखन, मिश्री, पंचामृत, पेड़े या फिर ताजे फलों का सात्विक भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद माता यशोदा के लाल से अपने परिवार की सुख-शांति के लिए सच्चे दिल से प्रार्थना करें।
- अब कुशा या ऊन के एक साफ आसन पर बैठ जाएं और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखें। पूरी एकाग्रता और साफ उच्चारण के साथ श्री गोपाल चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद कान्हा की आरती करें और थोड़ा सा पंचामृत प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या घर की महिलाएं या कुंवारी लड़कियां भी गोपाल चालीसा का पाठ कर सकती हैं?
हाँ, घर की महिलाएं या कुंवारी लड़कियां भी अपने घर की सुख-समृद्धि, अच्छे जीवनसाथी की कामना या संतान सुख के लिए गोपाल चालीसा का पाठ पूरी श्रद्धा के साथ कर सकती हैं। भगवान अपने हर भक्त की सच्ची पुकार बहुत जल्दी सुनते हैं।
गोपाल चालीसा का पाठ किस दिन से शुरू करना सबसे अच्छा माना जाता है?
इस पवित्र चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए बुधवार का दिन, एकादशी की तिथि या फिर जन्माष्टमी का पावन दिन सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा आप किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से इसकी शुरुआत बहुत ही आराम से कर सकते हैं।
क्या शाम के समय भी इस चालीसा का पाठ किया जा सकता है?
हाँ, अगर आपको सुबह के समय किसी वजह से टाइम नहीं मिल पाता है तो आप शाम को सूर्यास्त के समय हाथ-पैर धोकर, पूरी तरह साफ होकर माता यशोदा के लल्ला के सामने घी का दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ बहुत ही शांत मन से कर सकते हैं।
पाठ के दिनों में खान-पान को लेकर क्या परहेज रखना जरूरी है?
भगवान कृष्ण की साधना पूरी तरह सात्विक होती है। इसलिए जितने दिन भी आप गोपाल चालीसा का नियमपूर्वक पाठ करते हैं उतने दिन घर में पूरी तरह सात्विक माहौल रखें और मांस, मदिरा, अंडा या किसी भी तरह के तामसिक भोजन जैसे प्याज और लहसुन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें।

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