|| श्री होलिका चालीसा (होली) (Holika Chalisa Hindi PDF) ||
|| दोहा ||
याद करें प्रहलाद को, भले भलाई प्रीत।
तजें बुराई मानवी, यही होलिका रीत ।।
|| चौपाई ||
हे शिव सुत गौरी के नंदन। करूँ आपका नित अभिनंदन।।
मातु शारदे वंदन गाता। भाव गीत कविता में आता।।
भारत है अति देश विशाला। विविध धर्म संस्कृतियों वाला।।
नित मनते त्यौहार अनोखे। मेल मिलाप,रिवाजें चोखे।।
दीवाली अरु ईद मनाएँ। फोड़ पटाखे आयत गाएँ।।
रोजे रखें करे नवराते। जैनी पर्व सुगंध मनाते।।
मकर ताजिए लोह्ड़ी मनते। खीर सिवैंया घर घर बनते।।
एक बने हम भले विविधता। भारत में है निजता समता।।
क्रिसमस से गुरु दिवस मनाते। गुरु गोविंद से नेह निभाते।।
भिन्न धर्म भल भिन्न सु भाषा। देश एकता मन अभिलाषा।।
मकर गये आये बासन्ती। प्राकृत धरा सुरंगी बनती।।
विटप लता कलि पुष्प नवीना। उत्तम जीवन कलुष विहीना।।
झूमे फसल चले पछुवाई। प्राकृत नव तरुणाई पाई।।
अल्हड़ नर नारी मन गावे। फागुन मानो होली आवे।।
होली है त्यौहार अजूबा। लगे बाँधने सब मंसूबा।।
खेल कबड्डी रसिया भाते। होली पर पहले से गाते।।
पकती फसल कृषक मन हरषे। तन मन नेह नयन से बरसे।।
प्रीत रीत की राग सुनाती। कोयल काली विरहा गाती।।
मौसम बनता प्रीत मिताई। फागुन होली गान बधाई।।
तरुवर भी नव वसन सजाए। मधुमक्खी भँवरे मँडराए।।
पुष्प गंध रस प्रीत निराली। रसिया पीते भर भर प्याली।।
बौराए जन मन अमराई। तब माने मन होली आई।।
हिरणाकुश सुत थे प्रल्हादा। ईश निभाए रक्षण वादा।।
बहिन होलिका गोद बिठाकर। जली स्वयं ही अग्नि जलाकर।।
बचे प्रल्हाद मनाई खुशियाँ। अब भी कहते गाते रसियाँ।।
खुशी खुशी होलिका जला ते। डाँड रूप प्रल्हाद बचाते।।
ईश संग प्रल्हाद बधाई। होली पर सजती तरुणाई।।
कन्या सधवा व्रत बहु धरती। दहन होलिका पूजन करती।।
दहन ज्वाल जौं बालि सेंकते। मौसम के अनुमान देखते।।
दूजे दिवस रंगीली होली। रंग अबीर संग मुँहजोली।।
रंग चंग मय भंग विलासी। गाते फाग करे जन हाँसी।।
ऊँच नीच वय भेद भुलाकर। मीत गले मिल रंग लगाकर।।
कहीं खेलते कोड़ा मारी। नर सोचे मन ही मन गारी।।
चले डोलची पत्थर मारी। विविध होलिका रीत हमारी।।
बृज में होली अजब मनाते। देश विदेशी दर्शक आते।।
खाते गुझिया खीर मिठाई। जोर से कहते होली आई।।
मेले भरते विविध रंग के। रीत रिवाज अनेक ढंग के।।
पकते गेंहूँ,कटती सरसों। कहें इन्द्र से अब मत बरसो।।
होली प्यारी प्रीत सुहानी। चालीसा में यही कहानी।।
शर्मा बाबू लाल निहारे। मीत प्रीत निज देश हमारे।।
|| दोहा ||
होली पर हे सज्जनो, भली निभाओ प्रीत।
सबकी संगत से सजे, देश प्रेम के गीत।।
श्री होलिका चालीसा पाठ के लाभ
होलिका दहन के पावन अवसर पर या होली के दिनों में इस पवित्र चालीसा का पाठ करने से भक्तों को कई प्रकार के शारीरिक, मानसिक और पारिवारिक लाभ मिलते हैं। जो लोग पूरे विश्वास के साथ इस कथा और स्तुति को सुनते या पढ़ते हैं, उनके जीवन के सारे संकट दूर हो जाते हैं।
अगर कोई भी व्यक्ति इस चालीसा को पूरी श्रद्धा के साथ अपने जीवन में शामिल करता है, तो उसे मिलने वाले मुख्य लाभ और फायदे कुछ इस प्रकार हैं:
- होलिका दहन की रात को बहुत शक्तिशाली माना जाता है। इस समय चालीसा का पाठ करने से घर में मौजूद हर तरह की नकारात्मक ऊर्जा, तंत्र-मंत्र का असर और बुरी नजर का दोष हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
- जैसे भगवान ने हर संकट से बालक प्रहलाद की रक्षा की थी, वैसे ही इस पाठ को करने वाले इंसान के मन का सारा डर दूर हो जाता है। चिंता और डिप्रेशन जैसी मानसिक परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।
- इस चालीसा में समाज को एक साथ मिलकर रहने की सीख दी गई है। इसका पाठ करने से परिवार के लोगों के बीच चल रहे आपसी मनमुटाव दूर होते हैं और आपस में प्रेम तथा सौहार्द की भावना बढ़ती है।
- होलिका दहन के समय हवा में एक खास तरह की गर्मी और ऊर्जा होती है। चालीसा का पाठ करते हुए होलिका की परिक्रमा करने से मौसमी बीमारियों से राहत मिलती है और शरीर में नई ताकत का संचार होता है।
- बिजनेस या नौकरी में अगर लंबे समय से कोई रुकावट आ रही है, तो होलिका माता की कृपा से वह दूर हो जाती है। नए साल की शुरुआत के साथ ही धन और सफलता के नए रास्ते खुलने लगते हैं।
श्री होलिका चालीसा पाठ की सही विधि
किसी भी पूजा या पाठ का पूरा पुण्य तभी प्राप्त होता है जब उसे सही नियम और सलीके से किया जाए। होलिका माता की पूजा का विधान मुख्य रूप से फागुन पूर्णिमा के दिन यानी होलिका दहन की शाम को किया जाता है। इस दौरान कुछ बेहद आसान नियमों का पालन करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
अपने परिवार की खुशहाली के लिए अगर आप इस बार होलिका पूजन और चालीसा का पाठ करने जा रहे हैं, तो नीचे दी गई आसान विधि को जरूर अपनाएं:
- पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर घर की अच्छे से सफाई करें और स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनें। शाम की पूजा के लिए पहले से ही सारी सामग्रियां एक जगह इकट्ठी करके रख लें।
- दोपहर या शाम के समय जहां होलिका दहन होना हो, वहां जाकर गोबर से बनी होलिका और प्रहलाद की मूर्तियों की पूजा करें। वहां जल, रोली, अक्षत, फूल और सूत का धागा लपेटकर पूजा संपन्न करें।
- इस मौसम में गेहूं और चने की नई फसल पककर तैयार होती है। पूजा के दौरान होलिका माता को गेहूं की बालियां, चने के होले और गुड़-मिश्री का भोग लगाएं, जिससे घर में साल भर अनाज की कमी न हो।
- जब शुभ मुहूर्त में होलिका में अग्नि जलाई जाए, तब वहां शांत मन से खड़े होकर या बैठकर श्री होलिका चालीसा का पूरा पाठ करें। पाठ करते समय अपना पूरा ध्यान भगवान के चरणों में लगाएं।
- चालीसा का पाठ पूरा होने के बाद जल का लोटा लेकर होलिका की कम से कम तीन या सात बार परिक्रमा करें। अंत में होलिका की पवित्र अग्नि की राख को तिलक के रूप में माथे पर लगाएं और बड़ों का आशीर्वाद लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या महिलाएं और बच्चे भी होलिका चालीसा का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, घर की महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी लोग मिलकर इस चालीसा का पाठ कर सकते हैं। यह पाठ परिवार में अच्छे संस्कार लाता है और बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़ता है।
होलिका चालीसा का पाठ किस समय करना सबसे ज्यादा फलदायी होता है?
इस चालीसा का पाठ करने का सबसे उत्तम समय होलिका दहन की शाम का होता है, जब अग्नि प्रज्वलित की जाती है। हालांकि आप इसे होली के पूरे त्योहार के दौरान कभी भी पढ़ सकते हैं।
क्या इस पूजा में नई फसल को आग में सेकना जरूरी होता है?
हाँ, भारतीय परंपरा के अनुसार नई फसल की बालियों को होलिका की आग में सेकना बहुत शुभ माना जाता है। इसे प्रसाद के रूप में घर लाकर परिवार के सभी लोगों में बांटा जाता है।
होलिका दहन की राख का क्या महत्व होता है?
होलिका दहन के अगले दिन सुबह उसकी ठंडी राख को घर लाना बहुत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस राख का तिलक लगाने से इंसान का शरीर रोगों से मुक्त रहता है और नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं।

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