|| श्री जगन्नाथ चालीसा (Jagannath Chalisa PDF) ||
।। दोहा ।।
श्री जगन्नाथ जगत गुरू, आस भगत के आप।
नाम लेते ही आपका, मिटे कष्ट संताप ।।
मैं अधम हूँ मूढ़ मति, पूजा विधि का ना ज्ञान ।
दोष मेरा ना धरना नाथ, मैं हूँ तेरी संतान ।।
।। चौपाई ।।
जय जगन्नाथ जगत के पालक, भव भय भंजन कष्ट निवारक ।
संगी साथी ना जिसका कोई, आसरा उसका बस एक तू ही ।।
भगतों के दुख दूर करे तु, संतों के सदा मन में बसे तू ।
पतित पावन नाम तिहारा, सारे जग में तू इक प्यारा ।।
शंख क्षेत्र में धाम है तेरा, पीड़ हरे है नाम तिहारा ।
सागर तट में नीलगिरी पर, तूने बसा लिया अपना घर ।।
जो तेरे रूप को मन में बसाये, चिन्ता जगकी ना उसे सताये ।
तेरी शरण में जो भी आये, विपदा से तू उसे बचाये ।।
धाम तेरा हर धाम से न्यारा, जिसके बिना है तीर्थ अधूरा ।
ना हो जब तक तेरे दर्शन, निष्फल जीवन और तीर्थाटन ।।
हाथ पैर नहीं है प्रभु तेरा, फिर भी सभी को तेरा ही आसरा ।
नाथ जगत का तू कहलाता, हर कोई तेरी महिमा गाता ।।
भगतों को तू सदा लुभाता, महिमा अपनी उनसे गँवाता ।
दासी या भगत था एक अनोखा, रूप तेरा साग भात में देखा ।।
अपने बगीचे से श्रीफल तोड़ा, दे ब्राह्मण को हाथ वो जोड़ा।
जा रहे प्रभु का करने दर्शन, श्रीफल ये कर देना अर्पण ।।
अनहोनी ऐसी हुई भाई, प्रभु ने बाँहे अपनी बढ़ाई।
हाथ से विप्र के ले नारियल, दासिया को दिया भक्ति का फल ।।
बंधु महंती की भक्ति कहें क्या, प्रभु को मित्र सा प्यारा वो था ।
दर्श का आस तेरे ले मन में, आया तेरे पुनीत नगर में ।।
संग में लाया कुटुंब था अपना, पहुँचा तुझ तक जब हुई रैना ।
सिंह द्वार मंदिर का बंद था, भूखे पेट बंधु सोया था ।।
भगत का कष्ट ना सह पाये भगवन, स्वर्ण थाल में लाये भोजन ।
साल वेग पूत मुगल पिता का, नाम तेरा हर पल लेता था ।।
रथ यात्रा में आ पाये न पुरी, सैकड़ों कोस की थी जो दूरी।
गुहार लगाई जगन्नाथ को, आँऊ न जब तक रोकना रथ को ।।
सारा जग तब चकित हुआ था, भक्त की इच्छा जब पूर्ण हुई थी।
डूबे जग देव भक्ति में तेरे, गीत गोविंद रचा नाम में तेरे ।।
लिखते लिखते कवि ठहर गये, रचना पूर्ण कौन कर पाये।
पत्नि से कहा स्नान कर आँऊ, आकर फिर से बुद्धि लगाँऊ ।।
रूप कवि का धरा प्रभु ने, गीत अधूरा किया पूर्ण प्रभू ने ।
प्रेम से भक्त के प्रभु बंधे हैं, भक्ति प्रीति के डोर से जुड़े हैं।।
बिना मोल के प्यार से बिकता, कर्मा बाई की खिचड़ी खाता ।
जात पात का भेद न कोई, जो तुझे देखा सुध बिसराई ।।
शंकर देव निराकार उपासक, देख तुझे बने तेरे स्थापक ।
श्री गुरुनानक संत कबीरा, हर कोई तुझको एक सा प्यारा ।।
तुम सा प्रभु कोई और कहाँ है, भक्त जहाँ है तू भी वहाँ है।
भक्तों के मन को हरषाने, रथ पर आता दर्शन देने ।
पाकर प्यारे प्रभु का दर्शन, कर लो धन्य सभी यह जीवन ।।
जय जगन्नाथ प्रेम से बोलो, अमृत नाम का कहे कुंदन पी लो।
।। दोहा ।।
कृष्ण बलराम दोनों ओर, बीच सुभद्रा बहन ।
नीलंचल वासी जगन्नाथ, सदा बसो मोरे मन ।।
श्री जगन्नाथ चालीसा पाठ के लाभ
भगवान जगन्नाथ की चालीसा का नियमित पाठ करने से भक्तों को जीवन के हर क्षेत्र में चमत्कारी बदलाव देखने को मिलते हैं। जो लोग सच्चे दिल से प्रभु की शरण में आते हैं, उनकी खाली झोली खुशियों से भर जाती है। इस पाठ से मिलने वाले कुछ मुख्य फायदे इस प्रकार हैं:
जगन्नाथ चालीसा के नियमित पाठ से भक्तों को कई तरह के मानसिक, शारीरिक और आर्थिक लाभ प्राप्त होते हैं, जिन्हें विस्तार से समझा जा सकता है:
- आज के समय में हर व्यक्ति किसी न किसी बात को लेकर तनाव में रहता है। इस चालीसा का पाठ करने से मन को गजब की शांति मिलती है और दिमाग में चल रहे नकारात्मक विचार पूरी तरह दूर हो जाते हैं।
- अगर आप लंबे समय से पैसों की किल्लत का सामना कर रहे हैं या कर्ज के बोझ तले दबे हैं, तो जगन्नाथ जी की कृपा से आय के नए स्रोत बनते हैं और घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।
- नौकरीपेशा लोगों और बिजनेस करने वालों के लिए यह पाठ बेहद फायदेमंद है। इसके प्रभाव से कार्यक्षेत्र में आ रही सारी रुकावटें खत्म होती हैं और तरक्की के नए रास्ते खुलते हैं।
- जिस घर में रोज यह पाठ होता है, वहां का माहौल हमेशा खुशनुमा रहता है। परिवार के सदस्यों के बीच चल रहे झगड़े खत्म होते हैं और आपस में प्यार तथा तालमेल बढ़ता है।
- भगवान जगन्नाथ को संकटमोचन भी कहा जाता है। इस चालीसा की शक्ति से शरीर के पुराने रोग ठीक होने लगते हैं और मन से हर तरह का अनजाना डर या भूत-प्रेत का भय हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।
श्री जगन्नाथ चालीसा पाठ की सही विधि
किसी भी पूजा या पाठ का पूरा फल तभी मिलता है जब उसे सही नियम और कायदे से किया जाए। हालांकि भगवान केवल भाव के भूखे होते हैं, फिर भी शास्त्रों के अनुसार एक सही तरीका तय किया गया है ताकि पूजा का पूरा लाभ मिल सके। जगन्नाथ चालीसा शुरू करने से पहले कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है।
अगर आप इस चालीसा का पाठ करने जा रहे हैं, तो नीचे दी गई आसान विधि का पालन करें ताकि आपकी पूजा सीधे भगवान तक पहुंचे:
- पाठ करने के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना जाता है। सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे पीले या सफेद रंग के कपड़े पहनें क्योंकि भगवान विष्णु के अवतारों को पीला रंग बहुत प्रिय है।
- अपने घर के मंदिर में एक साफ चौकी बिछाएं और उस पर लाल या पीला कपड़ा रखें। फिर उस चौकी पर भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम और बहन सुभद्रा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- भगवान के सामने गाय के शुद्ध घी का एक दीपक जलाएं और साथ में सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। इसके बाद प्रभु को पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करें क्योंकि तुलसी के बिना जगन्नाथ जी की पूजा अधूरी रहती है।
- अब एक आसन पर आराम से बैठ जाएं और अपना पूरा ध्यान भगवान जगन्नाथ के चरणों में लगाएं। इसके बाद पूरी श्रद्धा और साफ उच्चारण के साथ श्री जगन्नाथ चालीसा का पाठ करें।
- पाठ पूरा होने के बाद भगवान को मिश्री, माखन या अपनी इच्छा के अनुसार सात्विक भोजन का भोग लगाएं। याद रहे कि भोग में तुलसी का पत्ता जरूर हो। आखिरी में भगवान की आरती करें और अनजाने में हुई गलतियों के लिए माफी मांगें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या महिलाएं भी श्री जगन्नाथ चालीसा का पाठ कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं भी पूरी शुद्धता और श्रद्धा के साथ इस चालीसा का पाठ कर सकती हैं। भगवान की भक्ति में लिंग का कोई भेद नहीं होता है, बस शुद्धता का ध्यान रखना जरूरी है।
जगन्नाथ चालीसा का पाठ किस दिन से शुरू करना सबसे अच्छा होता है?
वैसे तो आप इसे किसी भी दिन से शुरू कर सकते हैं, लेकिन गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और जगन्नाथ जी को समर्पित होता है, इसलिए गुरुवार या शुक्ल पक्ष के किसी शुभ दिन से इसकी शुरुआत करना बहुत अच्छा माना जाता है।
क्या इस पाठ के दौरान खान-पान का ध्यान रखना पड़ता है?
हाँ, जिस दिन आप पाठ कर रहे हों या अगर आप इसे रोज करते हैं, तो आपको पूरी तरह सात्विक भोजन करना चाहिए। मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसी चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
क्या शाम के समय भी जगन्नाथ चालीसा पढ़ी जा सकती है?
हाँ, अगर आपको सुबह समय नहीं मिलता है, तो आप शाम को सूर्यास्त के समय हाथ-पैर धोकर और साफ कपड़े पहनकर मंदिर में दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ कर सकते हैं।

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