उत्तर और मध्य भारत के लोक देवताओं में बाबा जाहरवीर गोगाजी का नाम बहुत ही श्रद्धा और आदर के साथ लिया जाता है। राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के इलाकों में गोगाजी को संकटमोचन वीर योद्धा के रूप में पूजा जाता है, जिन्हें गुरु गोरखनाथ जी का परम आशीर्वाद प्राप्त था। मान्यताओं के अनुसार, जाहरवीर गोगाजी महाराज अपने भक्तों की पुकार बहुत जल्दी सुनते हैं और उनकी शरण में आने वाले व्यक्ति के जीवन के सभी कष्ट और विपत्तियां पल भर में दूर हो जाती हैं। उनकी असीम कृपा पाने के लिए श्री जाहरवीर गोगाजी चालीसा का पाठ सबसे सरल और अचूक माध्यम माना गया है। 

भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की नवमी, जिसे गोगा नवमी भी कहा जाता है, इस दिन बाबा के दरबार में लाखों श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं। अगर आप गोगा नवमी या किसी भी सामान्य दिन अपने घर पर ही बाबा जाहरवीर की चालीसा का नियमित गान करते हैं, तो आपके घर-परिवार के चारों तरफ एक ऐसा सुरक्षा कवच बन जाता है जिसे कोई भी नकारात्मक शक्ति भेद नहीं पाती है। आइए इस पावन पाठ के महत्व, इसके फायदे और पूजा के सही नियमों को बहुत ही आसान शब्दों में समझते हैं। श्री जाहरवीर गोगाजी चालीसा पाठ चालीस पंक्तियों की एक अत्यंत प्रभावशाली और सुंदर स्तुति है, जिसमें वीर गोगाजी महाराज के चमत्कारी जन्म, उनके पराक्रम, विवाह और गुरु गोरखनाथ की भक्ति का पूरा वर्णन मिलता है। 

चौहान वंश के राजा जेवर और रानी बाछल के घर जन्मे बाबा गोगाजी को नागां के देवता के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि उन्हें सर्पों को वश में करने की अद्‍भुत सिद्धि प्राप्त थी। इस पावन चालीसा में उनके इसी दिव्य और जोधा स्वरूप की प्रशंसा की गई है जो दुखी जनों का सहारा बनते हैं। यह पाठ इतना सीधा और सरल है कि कोई भी साधारण व्यक्ति इसे बहुत ही आसानी से समझ और पढ़ सकता है। जहां बहुत बड़े अनुष्ठान या कठिन मंत्रों का जाप करने के लिए कड़े नियमों की जरूरत होती है, वहीं इस चालीसा का पाठ कोई भी भक्त अपने घर के शांत कोने में बैठकर कर सकता है। यह चालीसा भक्तों के मन से हर तरह के अनजाने डर को पूरी तरह खत्म कर देती है और उनके भीतर एक नई सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करती है।


|| श्री जाहरवीर गोगाजी चालीसा (Jaharveer Gogaji Chalisa PDF) ||

॥ दोहा ॥

सुवन केहरी जेवर, सुत महाबली रनधीर ।
बन्दौं सुत रानी बाछला, विपत निवारण वीर ॥
जय जय जय चौहान, वन्स गूगा वीर अनूप ।
अनंगपाल को जीतकर, आप बने सुर भूप ॥

॥ चौपाई ॥

जय जय जय जाहर रणधीरा । पर दुख भंजन बागड़ वीरा ॥१॥
गुरु गोरख का है वरदानी । जाहरवीर जोधा लासानी ॥२॥
गौरवरण मुख महा विशाला । माथे मुकट घुंघराले बाला ॥३॥
कांधे धनुष गले तुलसी माला । कमर कृपान रक्षा को डाला ॥४॥
जन्में गूगावीर जग जाना । ईसवी सन हजार दरमियाना ॥५॥

बल सागर गुण निधि कुमारा । दुखी जनों का बना सहारा ॥६॥
बागड़ पति बाछला नन्दन । जेवर सुत हरि भक्त निकन्दन ॥७॥
जेवर राव का पुत्र कहाये । माता पिता के नाम बढ़ाये ॥८॥
पूरन हुई कामना सारी । जिसने विनती करी तुम्हारी ॥९॥
सन्त उबारे असुर संहारे । भक्त जनों के काज संवारे ॥१०॥

गूगावीर की अजब कहानी । जिसको ब्याही श्रीयल रानी ॥११॥
बाछल रानी जेवर राना । महादुःखी थे बिन सन्ताना ॥१२॥
भंगिन ने जब बोली मारी । जीवन हो गया उनको भारी ॥१३॥
सूखा बाग पड़ा नौलक्खा । देख-देख जग का मन दुक्खा ॥१४॥
कुछ दिन पीछे साधू आये । चेला चेली संग में लाये ॥१५॥

जेवर राव ने कुआ बनवाया । उद्घाटन जब करना चाहा ॥१६॥
खारी नीर कुए से निकला । राजा रानी का मन पिघला ॥१७॥
रानी तब ज्योतिषी बुलवाया । कौन पाप मैं पुत्र न पाया ॥१८॥
कोई उपाय हमको बतलाओ । उन कहा गोरख गुरु मनाओ ॥१९॥
गुरु गोरख जो खुश हो जाई । सन्तान पाना मुश्किल नाई ॥२०॥

बाछल रानी गोरख गुन गावे । नेम धर्म को न बिसरावे ॥२१॥
करे तपस्या दिन और राती । एक वक्त खाय रूखी चपाती ॥२२॥
कार्तिक माघ में करे स्नाना । व्रत इकादसी नहीं भुलाना ॥२३॥
पूरनमासी व्रत नहीं छोड़े । दान पुण्य से मुख नहीं मोड़े ॥२४॥
चेलों के संग गोरख आये । नौलखे में तम्बू तनवाये ॥२५॥

मीठा नीर कुए का कीना । सूखा बाग हरा कर दीना ॥२६॥
मेवा फल सब साधु खाए । अपने गुरु के गुन को गाये ॥२७॥
औघड़ भिक्षा मांगने आए । बाछल रानी ने दुख सुनाये ॥२८॥
औघड़ जान लियो मन माहीं । तप बल से कुछ मुश्किल नाहीं ॥२९॥
रानी होवे मनसा पूरी । गुरु शरण है बहुत जरूरी ॥३०॥

बारह बरस जपा गुरु नामा । तब गोरख ने मन में जाना ॥३१॥
पुत्र देन की हामी भर ली । पूरनमासी निश्चय कर ली ॥३२॥
काछल कपटिन गजब गुजारा । धोखा गुरु संग किया करारा ॥३३॥
बाछल बनकर पुत्र पाया । बहन का दरद जरा नहीं आया ॥३४॥
औघड़ गुरु को भेद बताया । तब बाछल ने गूगल पाया ॥३५॥

कर परसादी दिया गूगल दाना । अब तुम पुत्र जनो मरदाना ॥३६॥
लीली घोड़ी और पण्डतानी । लूना दासी ने भी जानी ॥३७॥
रानी गूगल बाट के खाई । सब बांझों को मिली दवाई ॥३८॥
नरसिंह पंडित लीला घोड़ा । भज्जु कुतवाल जना रणधीरा ॥३९॥
रूप विकट धर सब ही डरावे । जाहरवीर के मन को भावे ॥४०॥

भादों कृष्ण जब नौमी आई । जेवरराव के बजी बधाई ॥४१॥
विवाह हुआ गूगा भये राना । संगलदीप में बने मेहमाना ॥४२॥
रानी श्रीयल संग परे फेरे । जाहर राज बागड़ का करे ॥४३॥
अरजन सरजन काछल जने । गूगा वीर से रहे वे तने ॥४४॥
दिल्ली गए लड़ने के काजा । अनंग पाल चढ़े महाराजा ॥४५॥

उसने घेरी बागड़ सारी । जाहरवीर न हिम्मत हारी ॥४६॥
अरजन सरजन जान से मारे । अनंगपाल ने शस्त्र डारे ॥४७॥
चरण पकड़कर पिण्ड छुड़ाया । सिंह भवन माड़ी बनवाया ॥४८॥
उसीमें गूगावीर समाये । गोरख टीला धूनी रमाये ॥४९॥
पुण्य वान सेवक वहाँ आये । तन मन धन से सेवा लाए ॥५०॥

मनसा पूरी उनकी होई । गूगावीर को सुमरे जोई ॥५१॥
चालीस दिन पढ़े जाहर चालीसा । सारे कष्ट हरे जगदीसा ॥५२॥
दूध पूत उन्हें दे विधाता । कृपा करे गुरु गोरखनाथ ॥५३॥

॥ इति श्री जाहरवीर चालीसा संपूर्णम् ॥

श्री जाहरवीर गोगाजी चालीसा पाठ के लाभ

सच्चे दिल और पूरी निष्ठा के साथ जाहरवीर गोगाजी की चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से भक्तों को अपने जीवन में कई तरह के चमत्कारी और सुखद लाभ महसूस होने लगते हैं। बाबा गोगाजी अपने सेवकों की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं और उनके घर को धन-धान्य से भर देते हैं।

यदि कोई भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ इस पवित्र चालीसा को अपनी रोज की पूजा का हिस्सा बनाता है, तो उसे मिलने वाले मुख्य लाभ और पुण्य फल कुछ इस प्रकार हैं:

  • बाबा गोगाजी को सर्पों का स्वामी माना जाता है। इस चालीसा का पाठ करने वाले व्यक्ति और उसके परिवार को कभी भी सांप, बिच्छू या किसी अन्य जहरीले जीव का डर नहीं सताता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
  • चालीसा की कथा के अनुसार रानी बाछल ने गुरु गोरखनाथ के आशीर्वाद से गूगल फल खाकर बाबा गोगाजी को पुत्र रूप में पाया था। इसलिए जो भी संतानहीन दंपति इस पाठ को नियम से करते हैं, उन्हें सुंदर और गुणवान संतान का सुख बहुत जल्दी प्राप्त होता है।
  • जो लोग अक्सर अस्वस्थ रहते हैं या किसी गंभीर शारीरिक कष्ट से जूझ रहे हैं, उन्हें इस पाठ से अद्‍भुत लाभ मिलता है। जाहरवीर बाबा की कृपा से शरीर के सारे पुराने रोग और कष्ट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं।
  • बाबा गोगाजी एक महाबली रणधीर जोधा थे जिन्होंने अपने दुश्मनों को धूल चटाई थी। इस चालीसा के प्रभाव से आपके गुप्त शत्रु शांत पड़ जाते हैं और यदि कोई भूमि विवाद या कानूनी मामला चल रहा है तो परिस्थितियां आपके पक्ष में आने लगती हैं।
  • इस पाठ के नियमित गान से घर में छिपी दरिद्रता और आर्थिक तंगी हमेशा के लिए भाग जाती है। व्यापार और नौकरी में आ रही रुकावटें खत्म होती हैं और मन पूरी तरह से शांत और तनावमुक्त हो जाता है।

श्री जाहरवीर गोगाजी चालीसा पाठ की सही विधि

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी पूजा या पाठ का पूरा पुण्य फल तभी प्राप्त होता है जब उसे सही नियमों, सही दिशा और शुद्ध भाव के साथ किया जाए। बाबा जाहरवीर गोगाजी की पूजा में नीले, पीले या भगवे रंग की सामग्रियों का विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि ये रंग बाबा के दरबार और उनके गुरु गोरखनाथ की धूनी से जुड़े हैं। सही तरीके से किया गया यह पाठ हमेशा बहुत जल्दी और उत्तम फल देने वाला साबित होता है।

अगर आप भी अपने जीवन के कष्टों को दूर करने और जाहरवीर बाबा का आशीर्वाद पाने के लिए इस चालीसा का पाठ शुरू करना चाहते हैं, तो इस बेहद आसान और सही विधि का पालन करें:

  • पाठ करने के लिए सुबह का समय सबसे बढ़िया माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इस पूजा में साधक का पूरी तरह साफ-सुथरे कपड़े पहनना जरूरी है, यदि संभव हो तो पीले या भगवे रंग के कपड़े पहनें।
  • अपने घर के मंदिर या किसी पवित्र स्थान को अच्छे से साफ कर लें। एक छोटी चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर जाहरवीर गोगाजी महाराज की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। यदि गुरु गोरखनाथ जी की भी तस्वीर हो तो उसे भी पास में रखें।
  • बाबा की प्रतिमा के सामने शुद्ध घी का या फिर सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं और साथ में सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। बाबा गोगाजी को रोली, अक्षत, चंदन और साफ जल अर्पित करें।
  • पूजा के दौरान बाबा गोगाजी को लापसी, चूरमा, मिश्री या फिर खीर का सात्विक भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद बाबा के लीले घोड़े के नाम पर भी थोड़ा सा अन्न या जल मानसिक रूप से अर्पित करें।
  • अब कुशा या ऊन के एक साफ आसन पर बैठ जाएं और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखें। पूरी एकाग्रता और साफ उच्चारण के साथ श्री जाहरवीर गोगाजी चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद बाबा की आरती करें और अपने संकटों को दूर करने की प्रार्थना करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या महिलाएं भी बाबा जाहरवीर गोगाजी की चालीसा का पाठ कर सकती हैं?

हाँ, महिलाएं भी पूरी शुद्धता, पवित्रता और सच्ची श्रद्धा के साथ बाबा जाहरवीर गोगाजी की चालीसा का पाठ बहुत आराम से कर सकती हैं। बस इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अशुद्ध दिनों या मासिक धर्म के दौरान इस पाठ को करने से पूरी तरह बचना चाहिए।

गोगाजी चालीसा का पाठ किस दिन से शुरू करना सबसे अच्छा माना जाता है?

इस पवित्र चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए शनिवार या गुरुवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा आप भाद्रपद मास की गोगा नवमी के पावन अवसर से भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं, जो बहुत ही फलदायी साबित होता है।

क्या इस पाठ को करते समय खान-पान का कोई परहेज रखना पड़ता है?

हाँ, बाबा जाहरवीर गोगाजी की साधना के दौरान सात्विकता का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है। जितने दिन भी आप बाबा की चालीसा का नियमपूर्वक पाठ करते हैं, उतने दिन मांस, मदिरा, तामसिक भोजन जैसे प्याज और लहसुन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखना चाहिए।

क्या शाम के समय भी इस चालीसा का पाठ किया जा सकता है?

हाँ, अगर आपको सुबह के समय किसी वजह से फुर्सत नहीं मिल पाती है, तो आप शाम को सूर्यास्त के समय हाथ-पैर धोकर, साफ होकर बाबा के सामने दीपक और धूप जलाकर इस चालीसा का पाठ बहुत ही शांत मन से कर सकते हैं।