हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत पहाड़ों में स्थित मां ज्वाला देवी का मंदिर भारत के सबसे अनोखे और जाग्रत 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। इस पावन धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ माता की कोई मूर्ति नहीं है बल्कि सदियों से बिना किसी तेल, घी या बाती के नौ प्राकृतिक ज्वालाएं लगातार जल रही हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के पार्थिव शरीर के हिस्से किए थे तब इस जगह पर माता की जिह्वा यानी जीभ गिरी थी। कलयुग के इस मुश्किल समय में जो भी भक्त सच्चे दिल से श्री ज्वाला देवी चालीसा का पाठ करता है उसके जीवन के सारे संकट और अंधकार मां की दिव्य ज्योति की तरह पल भर में भस्म हो जाते हैं।
ज्योतिष और धार्मिक विद्वानों के अनुसार जो लोग विशेष रूप से साल के दोनों नवरात्रों में, हर महीने की अष्टमी तिथि को या मंगलवार के दिन मां की ज्योति का ध्यान करते हैं उनके घर में कभी कंगाली नहीं आती। मां ज्वाला जी की कृपा से बड़े से बड़े मुकदमों में जीत मिलती है और जीवन में छिपी हर तरह की नेगेटिव एनर्जी जड़ से खत्म हो जाती है। श्री ज्वाला देवी चालीसा पाठ में विस्तार से बताया गया है कि कैसे मुगल बादशाह अकबर ने मां की दिव्य ज्योति को बुझाने के लिए नहर खुदवाई और लोहे की चादरें चढ़वाईं लेकिन मां की अखंड ज्योत को कोई बुझा नहीं पाया। इसके बाद अपनी भूल का अहसास होने पर अकबर नंगे पैर मां के दरबार में सोने का छत्र चढ़ाने आया था।
इस चालीसा की एक-एक चौपाई भक्त के भीतर अटूट विश्वास और भक्ति का रस घोल देती है। आज के इस आधुनिक और डिजिटल जमाने में बहुत से लोग पूजा-पाठ की किताबों को साथ रखने के बजाय अपने मोबाइल फोन या टैबलेट में पढ़ना ज्यादा पसंद करते हैं। श्री ज्वाला देवी चालीसा पाठ PDF को इंटरनेट से डाउनलोड करके अपने पास सुरक्षित रखना बहुत ही सुविधाजनक होता है जिससे आप यात्रा के दौरान या ऑफिस में भी समय मिलने पर मां की ज्योति का ध्यान कर सकते हैं। यह पीडीएफ फाइल इंटरनेट पर बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध है जहाँ से इसे आसानी से सेव किया जा सकता है।
|| ज्वाला देवी चालीसा (Jwala Devi Chalisa PDF) ||
॥ दोहा ॥
शक्ति पीठ माँ ज्वालपा, धरूं तुम्हारा ध्यान।
हृदय से सिमरन करूं, दो भक्ति वरदान॥
सुख वैभव सब दीजिए, बनूं तिहारा दास।
दया दृष्टि करो भगवती, आपमें है विश्वास॥
॥ चौपाई ॥
नमस्कार हे ज्वाला माता, दीन दुखी की भाग्य विधाता।
ज्योति आपकी जगमग जागे, दर्शन कर अंधियारा भागे॥
नव दुर्गा है रूप तिहारा, चौदह भुवन में दो उजियारा।
ब्रह्मा विष्णु शंकर द्वारे, जै मां जै मां सभी उच्चारे॥
ऊँचे पर्वत धाम तिहारा, मंदिर जग में सबसे न्यारा।
काली लक्ष्मी सरस्वती मां, एक रूप हो पार्वती मां॥
रिद्धि-सिद्धि चंवर डुलावें, आ गणेश जी मंगल गावें।
गौरी कुंड में आन नहाऊं, मन का सारा मैल हटाऊं॥
गोरख डिब्बी दर्शन पाऊं, बाबा बालक नाथ मनाऊं।
आपकी लीला अमर कहानी, वर्णन कैसे करें ये प्राणी॥
राजा दक्ष ने यज्ञ रचाया, कंखल हरिद्वार सजाया।
शंकर का अपमान कराया, पार्वती ने क्रोध दिखाया॥
मेरे पति को क्यों ना बुलाया, सारा यज्ञ विध्वंस कराया।
कूद गई माँ कुंड में जाकर, शिव भोले से ध्यान लगाया॥
गौरा का शव कंधे रखकर चले, नाथ जी बहुत क्रोध कर।
विष्णु जी सब जान के माया, चक्र चलाकर बोझ हटाया॥
अंग गिरे जा पर्वत ऊपर, बन गए मां के मंदिर उस पर।
बावन है शुभ दर्शन मां के, जिन्हें पूजते हैं हम जा के॥
जिह्वा गिरी कांगड़े ऊपर, अमर तेज एक प्रगटा आकर।
जिह्वा पिंडी रूप में बदली, अनसुइया गैया वहां निकली॥
दूध पिया मां रूप में आके, घबराया ग्वाला वहां जाके।
मां की लीला सब पहचाना, पाया उसने वहींं ठिकाना॥
सारा भेद राजा को बताया, ज्वालाजी मंदिर बनवाया।
चंडी मां का पाठ कराया, हलवे चने का भोग लगाया॥
कलयुग वासी पूजन कीना, मुक्ति का फल सबको दीना।
चौंसठ योगिनी नाचें द्वारे, बावन भैरो हैं मतवारे॥
ज्योति को प्रसाद चढ़ावें, पेड़े दूध का भोग लगावें।
ढोल ढप्प बाजे शहनाई, डमरू छैने गाएं बधाई॥
तुगलक अकबर ने आजमाया, ज्योति कोई बुझा नहीं पाया।
नहर खोदकर अकबर लाया, ज्योति पर पानी भी गिराया॥
लोहे की चादर थी ठुकवाई, जोत फैलकर जगमग आई।
अंधकार सब मन का हटाया, छत्र चढ़ाने दर पर आया॥
शरणागत को मां अपनाया, उसका जीवन धन्य बनाया।
तन मन धन मैं करुँ न्यौछावर, मांगूं मां झोली फैलाकर॥
मुझको मां विपदा ने घेरा, काम क्रोध ने लगाया डेरा।
सेज भवन के दर्शन पाऊं, बार-बार मैं शीश नवाऊं॥
जै जै जै जगदम्ब ज्वालपा, ध्यान रखेगी तू ही बालका।
ध्यानु भगत तुम्हारा यश गाया, उसका जीवन धन्य बनाया॥
कलिकाल में तुम वरदानी, क्षमा करो मेरी नादानी।
शरण पड़े को गले लगाओ, ज्योति रूप में सान्मुख आओ॥
॥ दोहा ॥
रहूं पूजता ज्वालपा, जब तक हैं ये स्वांस।
“ओम” को दर प्यारा लगे, तुम्हारा ही विश्वास॥
॥ इति श्री ज्वाला देवी चालीसा सम्पूर्ण ॥
श्री ज्वाला देवी चालीसा पाठ के लाभ
सच्चे मन, साफ नियत और अटूट विश्वास के साथ ज्वाला मैया की चालीसा का नियमित रूप से गान करने से भक्तों को अपने जीवन में कई तरह के चमत्कारी और शुभ बदलाव महसूस होने लगते हैं। ज्योत वाली मां अपने बच्चों की पुकार बहुत जल्दी सुनती हैं और उनके जीवन के हर बड़े संकट को पल भर में दूर कर देती हैं।
यदि कोई भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ इस पावन चालीसा को अपनी रोज की पूजा का हिस्सा बनाता है या विशेष अवसरों पर इसका पाठ करता है तो उसे मिलने वाले मुख्य लाभ कुछ इस प्रकार हैं:
- आज के समय में काम के अत्यधिक बोझ की वजह से लोग अक्सर तनाव का शिकार हो जाते हैं। इस चालीसा की मधुर चौपाइयों का पाठ करने से दिमाग को गजब की शांति मिलती है, मन का हर तरह का अनजाना डर पूरी तरह दूर होता है और पॉजिटिव विचार आते हैं।
- यदि आपके गुप्त दुश्मन आपको लगातार परेशान कर रहे हैं या ऑफिस में कोई आपकी तरक्की रोक रहा है तो यह पाठ आपके लिए रामबाण है। इसके प्रभाव से आपके विरोधियों की हर चाल नाकाम हो जाती है और मुकदमों में आपको बड़ी सफलता मिलती है।
- जिस घर में नियमित रूप से ज्वाला देवी चालीसा की आवाज गूंजती है वहाँ कभी भी कंगाली या दरिद्रता कदम नहीं रख सकती। माता के आशीर्वाद से आमदनी के नए और अच्छे स्रोत खुलते हैं जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति हमेशा बहुत मजबूत बनी रहती है।
- मां ज्वाला जी साक्षात तेज का रूप हैं इसलिए इस चालीसा का नियमित गान करने वाले व्यक्ति पर किसी भी तरह के काले जादू, ऊपरी हवा या बुरी नजर का असर बिल्कुल नहीं होता और घर का माहौल हमेशा सुरक्षित रहता है।
- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां की ज्योत के दर्शन और इस चालीसा के जाप से शरीर के भीतर एक नई ऊर्जा का वास होता है जिससे पुरानी और असाध्य बीमारियां धीरे-धीरे ठीक होने लगती हैं और व्यक्ति दीर्घायु होता है।
श्री ज्वाला देवी चालीसा पाठ की सही विधि
शास्त्रों के अनुसार किसी भी देवी-देवता की पूजा या स्तुति का पूरा पुण्य फल तभी प्राप्त होता है जब उसे सही नियमों, सही दिशा और शुद्ध भाव के साथ संपन्न किया जाए। मां ज्वाला देवी की पूजा में साफ-सफाई रखना और पवित्रता का पालन करना बहुत जरूरी माना गया है क्योंकि वे स्वयं तेज और पावनता की देवी हैं। सही तरीके से किया गया यह पाठ हमेशा बहुत जल्दी और उत्तम फल देने वाला साबित होता है।
अगर आप भी अपने जीवन के कष्टों को दूर करने और मां ज्वाला जी का दिव्य आशीर्वाद पाने के लिए इस चालीसा का पाठ शुरू करना चाहते हैं तो इस बेहद आसान और सही विधि का पालन करें:
- इस पावन पाठ को करने के लिए सुबह या ब्रह्म मुहूर्त का समय सबसे बढ़िया माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर नहा धो लें और पूरी तरह साफ कपड़े पहनें। मां की पूजा में लाल या पीले रंग के कपड़ों का प्रयोग करना सबसे ज्यादा फलदायी और शुभ माना गया है।
- अपने घर के पूजा स्थल को अच्छे से साफ कर लें। एक लकड़ी की छोटी चौकी पर लाल रंग का नया कपड़ा बिछाएं और उस पर मां ज्वाला देवी या मां दुर्गा की तस्वीर स्थापित करें और उनके सामने बैठ जाएं।
- माता की प्रतिमा के सामने गाय के शुद्ध देसी घी का एक दीपक जलाएं और साथ में एक सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। मां को कुंकुम, रोली और अक्षत का तिलक लगाएं। उन्हें लाल रंग के ताजे फूल या गुड़हल की माला चढ़ाना बेहद उत्तम माना जाता है।
- पूजा के समय माता रानी को उनकी प्रिय चीजें जैसे खोये के पेड़े, कच्चा दूध, या फिर सूजी का हलवा और चने का सात्विक भोग लगाएं। तामसिक चीजों का भोग भूलकर भी न लगाएं। भोग लगाने के बाद मां से अपने अनजाने में हुए पापों के लिए क्षमा मांगें।
- अब ऊन या कुशा के बने साफ आसन पर बैठ जाएं और अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें। पूरी एकाग्रता और साफ शब्दों में श्री ज्वाला देवी चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद कपूर से मां की आरती करें और शांत मन से कुछ देर ध्यान लगाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या घर में मां ज्वाला देवी की फोटो या मूर्ति रखना शुभ होता है?
हाँ, आप अपने घर के मंदिर में मां ज्वाला देवी की सुंदर तस्वीर रख सकते हैं। चूंकि उनका वास्तविक रूप ज्योति का है, इसलिए जब भी आप उनकी पूजा करें तो उनके सामने एक घी का दीपक जरूर जलाएं और उसी दीपक की लौ को मां का स्वरूप मानकर ध्यान करें।
ज्वाला देवी चालीसा का पाठ किस दिन से शुरू करना सबसे अच्छा माना जाता है?
इस पवित्र चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए मंगलवार या शुक्रवार का दिन सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है। इसके अलावा आप किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार, पूर्णिमा तिथि या नवरात्रि के पावन पर्व से भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं जो बहुत शुभ होता है।
क्या शाम के समय भी इस चालीसा का पाठ किया जा सकता है?
हाँ, अगर आपको सुबह के समय किसी वजह से टाइम नहीं मिल पाता है तो आप शाम को सूर्यास्त के समय यानी गोधूलि बेला में हाथ-पैर धोकर, पूरी तरह साफ होकर माता के सामने घी का दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ बहुत ही शांत मन से कर सकते हैं। शाम के समय पाठ करने से भी मानसिक शांति मिलती है।
मां ज्वाला देवी चालीसा पाठ के दौरान किन बातों का परहेज करना जरूरी है?
इस पाठ की साधना के दौरान सात्विकता का कड़ाई से पालन करना चाहिए। जितने दिन भी आप इस चालीसा का पाठ करते हैं उतने दिन आपको पूरी तरह से सात्विक रहना होगा और घर में मांस, मदिरा, अंडा, लहसुन और प्याज जैसे हर तरह के तामसिक भोजन के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगानी होगी।

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