असम की राजधानी गुवाहाटी के पास नीलांचल पहाड़ी पर स्थित मां कामाख्या देवी का मंदिर पूरे भारत में सबसे चमत्कारी और जाग्रत शक्तिपीठ माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब भगवान शिव माता सती के शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे तब इस पावन पहाड़ी पर माता का योनि भाग गिरा था। इसी वजह से इस जगह को इच्छा पूरी करने वाला और तंत्र साधना का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। कलयुग के इस दौर में मां कामाख्या की भक्ति करना और उनकी चालीसा का जाप करना जीवन के सबसे बड़े दुखों और दुःस्वप्नों को तुरंत दूर करने का एक बहुत ही सरल माध्यम है।
धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष विज्ञान के अनुसार जो लोग हर महीने आने वाली मासिक अष्टमी, गुप्त नवरात्रि या विशेष रूप से जून के महीने में होने वाले प्रसिद्ध अंबुबाची मेले के दौरान मां की स्तुति करते हैं उनके जीवन में सुख और समृद्धि का वास होता है। मां कामाख्या की कृपा से इंसान की बंद किस्मत का ताला खुल जाता है और समाज में उसे भरपूर मान सम्मान प्राप्त होता है। मां कामाख्या देवी चालीसा में विस्तार से बताया गया है कि कैसे मां कामाख्या साक्षात दुर्गा, काली, सरस्वती और लक्ष्मी का ही रूप हैं। इस पाठ को करने से भक्तों को यह समझ आता है कि मां की शरण में जाने के लिए किसी कठिन तंत्र क्रिया की जरूरत नहीं है बल्कि सच्चे मन से किया गया एक छोटा सा पाठ भी मां को प्रसन्न करने के लिए काफी है।
आजकल के इस डिजिटल और स्मार्ट युग में बहुत से लोग अपने पास मोटी-मोटी किताबें रखने के बजाय अपने स्मार्टफोन या लैपटॉप में पाठ पढ़ना ज्यादा पसंद करते हैं। मां कामाख्या देवी चालीसा पाठ PDF को ऑनलाइन डाउनलोड करके अपने फोन में रखना एक बहुत ही अच्छा और आसान तरीका बन चुका है। इसकी मदद से आप ऑफिस जाते समय, यात्रा के दौरान या घर से बाहर होने पर भी अपनी रोज की पूजा को बिना किसी नागे के बहुत ही आराम से पूरा कर सकते हैं। यह पीडीएफ फाइल इंटरनेट पर पूरी तरह से मुफ्त मिल जाती है।
|| कामाख्या देवी चालीसा (Kamakhya Chalisa PDF) ||
॥ दोहा ॥
सुमिरन कामाख्या करुँ, सकल सिद्धि की खानि।
होइ प्रसन्न सत करहु माँ, जो मैं कहौं बखानि॥
॥ चौपाई ॥
जै जै कामाख्या महारानी। दात्री सब सुख सिद्धि भवानी॥
कामरुप है वास तुम्हारो। जहँ ते मन नहिं टरत है टारो॥
ऊँचे गिरि पर करहुँ निवासा। पुरवहु सदा भगत मन आसा॥
ऋद्धि सिद्धि तुरतै मिलि जाई। जो जन ध्यान धरै मनलाई॥
जो देवी का दर्शन चाहे। हृदय बीच याही अवगाहे॥
प्रेम सहित पंडित बुलवावे। शुभ मुहूर्त निश्चित विचारवे॥
अपने गुरु से आज्ञा लेकर। यात्रा विधान करे निश्चय धर।
पूजन गौरि गणेश करावे। नान्दीमुख भी श्राद्ध जिमावे॥
शुक्र को बाँयें व पाछे कर। गुरु अरु शुक्र उचित रहने पर॥
जब सब ग्रह होवें अनुकूला। गुरु पितु मातु आदि सब हूला॥
नौ ब्राह्मण बुलवाय जिमावे। आशीर्वाद जब उनसे पावे॥
सबहिं प्रकार शकुन शुभ होई। यात्रा तबहिं करे सुख होई॥
जो चह सिद्धि करन कछु भाई। मंत्र लेइ देवी कहँ जाई॥
आदर पूर्वक गुरु बुलावे। मन्त्र लेन हित दिन ठहरावे॥
शुभ मुहूर्त में दीक्षा लेवे। प्रसन्न होई दक्षिणा देवै॥
ॐ का नमः करे उच्चारण। मातृका न्यास करे सिर धारण॥
षडङ्ग न्यास करे सो भाई। माँ कामाक्षा धर उर लाई॥
देवी मन्त्र करे मन सुमिरन। सन्मुख मुद्रा करे प्रदर्शन॥
जिससे होई प्रसन्न भवानी। मन चाहत वर देवे आनी॥
जबहिं भगत दीक्षित होइ जाई। दान देय ऋत्विज कहँ जाई॥
विप्रबंधु भोजन करवावे। विप्र नारि कन्या जिमवावे॥
दीन अनाथ दरिद्र बुलावे। धन की कृपणता नहीं दिखावे॥
एहि विधि समझ कृतारथ होवे। गुरु मन्त्र नित जप कर सोवे॥
देवी चरण का बने पुजारी। एहि ते धरम न है कोई भारी॥
सकल ऋद्धि - सिद्धि मिल जावे। जो देवी का ध्यान लगावे॥
तू ही दुर्गा तू ही काली। माँग में सोहे मातु के लाली॥
वाक् सरस्वती विद्या गौरी। मातु के सोहैं सिर पर मौरी॥
क्षुधा, दुरत्यया, निद्रा तृष्णा। तन का रंग है मातु का कृष्णा।
कामधेनु सुभगा और सुन्दरी। मातु अँगुलिया में है मुंदरी॥
कालरात्रि वेदगर्भा धीश्वरि। कंठमाल माता ने ले धरि॥
तृषा सती एक वीरा अक्षरा। देह तजी जानु रही नश्वरा॥
स्वरा महा श्री चण्डी। मातु न जाना जो रहे पाखण्डी॥
महामारी भारती आर्या। शिवजी की ओ रहीं भार्या॥
पद्मा, कमला, लक्ष्मी, शिवा। तेज मातु तन जैसे दिवा॥
उमा, जयी, ब्राह्मी भाषा। पुर हिं भगतन की अभिलाषा॥
रजस्वला जब रुप दिखावे। देवता सकल पर्वतहिं जावें॥
रुप गौरि धरि करहिं निवासा। जब लग होइ न तेज प्रकाशा॥
एहि ते सिद्ध पीठ कहलाई। जउन चहै जन सो होई जाई॥
जो जन यह चालीसा गावे। सब सुख भोग देवि पद पावे॥
होहिं प्रसन्न महेश भवानी। कृपा करहु निज - जन असवानी॥
॥ दोहा ॥
कहे गोपाल सुमिर मन, कामाख्या सुख खानि।
जग हित माँ प्रगटत भई, सके न कोऊ खानि॥
॥ इति श्री कामाख्या देवी चालीसा सम्पूर्ण ॥
मां कामाख्या देवी चालीसा पाठ के लाभ
सच्चे दिल, साफ नियत और पूरे विश्वास के साथ मां कामाख्या देवी की चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से भक्तों को अपनी लाइफ में कई तरह के चमत्कारी और सुखद बदलाव देखने को मिलते हैं। आदि शक्ति अपने बच्चों की पुकार बहुत जल्दी सुनती हैं और उनके चारों तरफ एक ऐसा पॉजिटिव सुरक्षा कवच बना देती हैं जिससे कोई भी बुरी शक्ति उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाती।
यदि कोई भी श्रद्धालु इस पावन चालीसा को अपनी रोज की पूजा का हिस्सा बनाता है या हर शुक्रवार को इसका विशेष पाठ करता है तो माता रानी की कृपा से उसे नीचे दिए गए मुख्य लाभ बहुत ही जल्दी प्राप्त होते हैं:
- मां कामाख्या को इच्छाओं को पूरा करने वाली देवी माना गया है। इस चालीसा का नियमित पाठ करने से आपके बिजनेस में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और नौकरी पेशा लोगों को प्रमोशन और कार्यस्थल पर अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलने लगता है।
- यदि आपके ऊपर बहुत सारा कर्ज हो गया है और लाख कोशिशों के बाद भी पैसा घर में नहीं टिक रहा है तो यह पाठ आपके लिए बहुत फायदेमंद है। मां की कृपा से आय के नए स्रोत बनते हैं और घर में धन-धान्य का भंडार हमेशा भरा रहता है।
- मां कामाख्या तंत्र विद्या की सबसे बड़ी देवी मानी जाती हैं इसलिए इस चालीसा का पाठ करने वाले व्यक्ति पर किसी भी तरह के काले जादू, बुरी नजर या भूत-प्रेत की बाधा का असर नहीं होता और घर का माहौल हमेशा एकदम सुरक्षित रहता है।
- जिन युवक-युवतियों के विवाह में लगातार देरी हो रही है या कोई न कोई बाधा आ रही है उनके लिए यह पाठ बहुत शुभ माना जाता है। इसके प्रभाव से शादी के अच्छे योग बनते हैं और शादीशुदा जिंदगी में आपसी प्यार और तालमेल बहुत मजबूत होता है।
- आज की तनावभरी लाइफ में यह चालीसा मन को गजब का सुकून और शांति देती है। इसका नियमित जाप करने से शरीर के भीतर एक नई और फ्रेश एनर्जी का संचार होता है जिससे पुरानी बीमारियां धीरे-धीरे ठीक होने लगती हैं।
मां कामाख्या देवी चालीसा पाठ की सही विधि
शास्त्रों के अनुसार किसी भी देवी-देवता की पूजा का पूरा पुण्य फल तभी मिलता है जब उसे सही नियमों, सही दिशा और शुद्ध तन-मन के साथ किया जाए। मां कामाख्या देवी की पूजा में साफ-सफाई रखना और मन में सात्विक भाव बनाए रखना सबसे ज्यादा जरूरी माना गया है क्योंकि वे साक्षात आदि शक्ति का रूप हैं। सही तरीके से और सही नियम से किया गया यह पाठ हमेशा बहुत जल्दी और मनचाहा फल देने वाला साबित होता है।
अगर आप भी अपने जीवन के दुखों को समाप्त करने और मां कामाख्या का दिव्य आशीर्वाद पाने के लिए इस चालीसा का पाठ शुरू करना चाहते हैं तो इस आसान और सही विधि को अपनाएं:
- इस पावन पाठ को करने के लिए सुबह या ब्रह्म मुहूर्त का समय सबसे बढ़िया माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर नहा धो लें और पूरी तरह साफ कपड़े पहनें। मां की पूजा में लाल या पीले रंग के कपड़ों का प्रयोग करना सबसे ज्यादा फलदायी और शुभ माना गया है।
- अपने घर के पूजा स्थल को अच्छे से साफ कर लें। एक लकड़ी की छोटी चौकी पर लाल रंग का नया कपड़ा बिछाएं और उस पर मां कामाख्या देवी की तस्वीर स्थापित करें। यदि उनकी तस्वीर न हो तो आप मां दुर्गा की मूर्ति के सामने भी यह पाठ शुरू कर सकते हैं।
- माता रानी की प्रतिमा के सामने गाय के शुद्ध घी का एक दीपक जलाएं। साथ में अच्छी सुगंध वाली धूपबत्ती भी सुलगाएं। मां को कुंकुम, रोली और अक्षत का तिलक लगाएं और उनके चरणों में लाल रंग के फूल, विशेषकर गुड़हल या गुलाब अर्पित करें।
- पूजा के समय माता को भोग लगाने के लिए दूध से बनी सात्विक मिठाई, मिश्री, मखाने की खीर या ताजे फल अर्पित करें। तामसिक चीजों का भोग भूलकर भी न लगाएं। भोग लगाने के बाद मां से अपने अनजाने में हुए पापों के लिए क्षमा मांगें।
- अब ऊन या कुशा के बने साफ आसन पर बैठ जाएं और अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें। पूरी एकाग्रता और साफ शब्दों में मां कामाख्या देवी चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद कपूर से मां की आरती करें और शांत मन से कुछ देर ध्यान लगाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या महिलाएं पीरियड्स के दौरान मां कामाख्या चालीसा का पाठ कर सकती हैं?
नहीं, शास्त्रों के नियमों के अनुसार पीरियड्स या मासिक धर्म के दिनों में महिलाओं को घर पर किसी भी तरह की पूजा-पाठ या चालीसा का सीधे स्पर्श करके पाठ नहीं करना चाहिए। इन दिनों में आप केवल मन ही मन मां का ध्यान कर सकती हैं और मानसिक रूप से उनके मंत्रों का जाप कर सकती हैं।
मां कामाख्या चालीसा का पाठ किस दिन से शुरू करना सबसे अच्छा माना जाता है?
इस पवित्र चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए शुक्रवार का दिन सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है क्योंकि यह दिन देवी साधना के लिए विशेष रूप से समर्पित है। इसके अलावा आप किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले शुक्रवार, अष्टमी तिथि या नवरात्रि के पावन दिनों से भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं।
क्या इस चालीसा का पाठ रात के समय भी किया जा सकता है?
हाँ, चूंकि मां कामाख्या एक शक्तिशाली महाविद्या का रूप हैं, इसलिए तंत्र शास्त्र और शक्ति साधना में इनकी पूजा रात के समय करने का बहुत बड़ा महत्व है। आप चाहें तो रात को 9 बजे के बाद अच्छे से हाथ-पैर धोकर और साफ कपड़े पहनकर शांत माहौल में दीपक जलाकर इसका पाठ बहुत ही एकाग्र मन से कर सकते हैं।
पाठ के दिनों में खान-पान को लेकर क्या परहेज रखना जरूरी है?
इस पाठ की साधना के दौरान सात्विकता का कड़ाई से पालन करना चाहिए। जितने दिन भी आप इस चालीसा का पाठ करते हैं उतने दिन आपको पूरी तरह से सात्विक रहना होगा और घर में मांस, मदिरा, अंडा, लहसुन और प्याज जैसे हर तरह के तामसिक भोजन के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगानी होगी।

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