राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित देशनोक धाम पूरे विश्व में अपनी अनोखी परंपराओं और चमत्कारों के लिए जाना जाता है। यहाँ विराजमान माँ करणी को साक्षात हिंगलाज माता का अवतार माना जाता है जिन्हें लोग आदर से करणी जी या काबा वाली करणी माई भी कहते हैं। इस पावन धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ हजारों की संख्या में चूहे बिना किसी को नुकसान पहुँचाए घूमते हैं जिन्हें काबा कहा जाता है और इनके दर्शन को बहुत ही भाग्यशाली माना जाता है। कलयुग के इस समय में जब इंसान मानसिक चिंताओं, पारिवारिक कलह और दुश्मनों के डर से परेशान रहता है तब माँ करणी की शरण में जाना हर संकट से परमानेंट मुक्ति पाने का सबसे आसान रास्ता माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो लोग देशनोक नहीं जा पाते वे अगर अपने घर पर ही नियम से करणी माता की चालीसा का गान करते हैं तो उन्हें भी धाम के दर्शन जितना ही पुण्य फल मिलता है। यदि आपके घर में सुख-शांति की कमी है या बहुत कोशिशों के बाद भी आपके जरूरी काम अटक जाते हैं तो इस चमत्कारी चालीसा का पाठ करना आपके दुखों को दूर करने का सबसे बेस्ट और आसान घरेलू माध्यम है। श्री करणी माता चालीसा पाठ चालीस पंक्तियों की एक बहुत ही सुंदर और शक्तिशाली प्रार्थना है जिसमें माता के दिव्य चमत्कारों, उनके पराक्रम और देशनोक धाम की महिमा का पूरा वर्णन मिलता है।
इस चालीसा में साफ़ बताया गया है कि माँ करणी ने चारण वंश में जन्म लेकर किस तरह गरीबों, निर्बलों और अपने सच्चे भक्तों की रक्षा की थी। चालीसा के सीधे-साधे और मधुर शब्द इतने प्रभावशाली हैं कि इनके उच्चारण मात्र से ही मन का सारा डर और डिप्रेशन दूर भाग जाता है। इस पावन पाठ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें माता के उन ऐतिहासिक चमत्कारों की याद दिलाई गई है जब उन्होंने डूबते हुए जहाज को बचाया था और यमराज से लड़कर अपने भक्त के प्राण वापस ले आए थे। यह पाठ इंसान की सोई हुई किस्मत को जगाता है और घर के भीतर छिपी हर तरह की नेगेटिव एनर्जी को जड़ से मिटाकर पॉजिटिविटी का संचार करता है।
|| श्री करणी माता चालीसा (Karni Mata Chalisa PDF) ||
॥ दोहा ॥
जय गणेश जय गज बदन, करण सुमंगल मूल।
करहू कृपा निज दास पर, रहहू सदा अनूकूल॥
जय जननी जगदीश्वरी, कह कर बारम्बार।
जगदम्बा करणी सुयश, वरणउ मति अनुसार ॥
॥ चौपाई ॥
सूमिरौ जय जगदम्ब भवानी। महिमा अकथन जाय बखानी॥
नमो नमो मेहाई करणी। नमो नमो अम्बे दुःख हरणी॥
आदि शक्ति जगदम्बे माता। दुःख को हरणि सुख कि दाता॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैलि उजियारो॥
जो जेहि रूप से ध्यान लगावे। मन वांछित सोई फल पावे॥
धौलागढ़ में आप विराजो। सिंह सवारी सन्मुख साजो॥
भैरो वीर रहे अगवानी। मारे असुर सकल अभिमानी॥
ग्राम suap नाम सुखकारी। चारण वंश करणी अवतारी॥
मुख मण्डल की सुन्दरताई। जाकी महिमा कही न जाई॥
जब भक्तों ने सुमिरण कीन्हा। ताही समय अभय करि दीन्हा॥
साहूकार की करी सहाई। डूबत जल में नाव बचाई॥
जब कान्हे न कुमति बिचारी। केहरि रूप धरयो महतारी॥
मारयो ताहि एक छन मांई। जाकी कथा जगत में छाई॥
नेड़ी जी शुभ धाम तुम्हारो। दर्शन करि मन होय सुखारो॥
कर सौहै त्रिशूल विशाल। गल राजे पुष्प की माला॥
शेखोजी पर किरपा कीन्ही। क्षुधा मिटाय अभय कर दीन्हा॥
निर्बल होई जब सुमिरन कीन्हा। कारज सबि सुलभ कर दीन्हा॥
देशनोक पावन थल भारी। सुन्दर मंदिर की छवि न्यारी॥
मढ़ में ज्योति जले दिन राती। निखरत ही त्रय ताप नशाती॥
कीन्ही यहाँ तपस्या आकर। नाम उजागर सब सुख सागर॥
जय करणी दुःख हरणी मइया। भव सागर से पार करइया॥
बार बार ध्याऊं जगदम्बा। कीजे दया करो न विलम्बा॥
धर्मराज नै जब हठ कीन्हा। निज सुत को जीवित करि लीन्हा॥
ताहि समय मर्याद बनाई। तुम पह मम वंशज नहि आई॥
मूषक बन मंदिर में रहि है। मूषक ते पुनि मानुष तन धरि है॥
दिपोजी को दर्शन दीन्हा। निज लीला से अवगत कीन्हा॥
बने भक्त पर कृपा कीन्ही। दो नैनन की ज्योति दीन्ही॥
चरित अमित अति कीन्ह अपारा। जाको यश छायो संसारा॥
भक्त जनन को मात तारती। मगन भक्त जन करत आरती॥
भीड़ पड़ी भक्तों पर जब ही। भई सहाय भवानी तब ही॥
मातु दया अब हम पर कीजै। सब अपराध क्षма कर दीजे॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरे दुःख मेरो॥
जो नर धरे मात कर ध्यान। ताकर सब विधि हो कल्याण॥
निशि वासर पूजहिं नर-नारी। तिनको सदा करहूं रखवारी॥
भव सागर में नाव हमारी। पार करहु करणी महतारी॥
कंह लगी वर्णऊ कथा तिहारी। लिखत लेखनी थकत हमारी॥
पुत्र जानकर कृपा कीजै। सुख सम्पत्ति नव निधि कर दीजै॥
जो यह पाठ करे हमेशा। ताके तन नहि रहे कलेशा॥
संकट में जो सुमिरन करई। उनके ताप मात सब हरई॥
गुण गाथा गाऊं कर जोरे। हरह मात सब संकट मोरे॥
॥ दोहा ॥
आदि शक्ति अम्बा सुमिर, धरि करणी का ध्यान।
मन मंदिर में बास करो मैया, दूर करो अज्ञान॥
॥ इति श्री करणी माता चालीसा समाप्त ॥
श्री करणी माता चालीसा पाठ के लाभ
सच्चे दिल और पूरी निष्ठा के साथ श्री करणी माता की चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से भक्तों को अपने जीवन में कई तरह के चमत्कारी और शुभ बदलाव महसूस होने लगते हैं। जगदम्बा अपने बच्चों की पुकार बहुत जल्दी सुनती हैं और उनके चारों तरफ एक ऐसा मजबूत सुरक्षा कवच बना देती हैं जिससे कोई भी संकट छू नहीं पाता।
यदि कोई भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ इस पवित्र चालीसा को अपनी रोज की पूजा का हिस्सा बनाता है या हर शुक्रवार को इसका नियम से पाठ करता है तो उसे मिलने वाले मुख्य लाभ और पुण्य फल कुछ इस प्रकार हैं:
- इस चालीसा का पाठ करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र और हर तरह की ऊपरी बाधाओं का साया तुरंत हट जाता है। माता के नाम के प्रभाव से बुरी बलाएं कोसों दूर रहती हैं और व्यक्ति खुद को बहुत ही सुरक्षित और निडर महसूस करता है।
- अगर आपके काम-धंधे में लगातार नुकसान हो रहा है या सिर पर कर्ज का बोझ बहुत ज्यादा बढ़ता जा रहा है तो इस चालीसा का सहारा लें। माँ करणी की कृपा से आमदनी के नए और अच्छे रास्ते खुलते हैं जिससे घर में सुख-समृद्धि हमेशा बनी रहती है।
- जिन लोगों के जीवन में बहुत सारे विरोधी खड़े हो गए हैं या जो लोग किसी कानूनी पचड़े में फंस चुके हैं उन्हें इस पाठ से जबरदस्त मदद मिलती है। माता का त्रिशूल शत्रुओं के हौसले पस्त कर देता है और भक्त की जीत का रास्ता साफ़ करता है।
- जो लोग अक्सर बीमार रहते हैं या मानसिक तनाव की वजह से रात को सो नहीं पाते उनके लिए यह पाठ किसी औषधि से कम नहीं है। इसके नियमित जाप से शरीर में एक नई और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है जिससे पुरानी बीमारियां धीरे-धीरे ठीक होने लगती हैं।
- देशनोक धाम की मान्यता के अनुसार माता अपने वंश और अपने भक्तों की रक्षा स्वयं करती हैं। इस चालीसा का पाठ करने से बच्चों पर आने वाले संकट टल जाते हैं और परिवार में सुख-शांति के साथ वंश की उन्नति होती है।
श्री करणी माता चालीसा पाठ की सही विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी देवी-देवता की पूजा या पाठ का पूरा फल तभी प्राप्त होता है जब उसे सही नियमों, सही दिशा और शुद्ध भाव के साथ संपन्न किया जाए। माँ करणी की पूजा में साफ़-सफाई रखना और पवित्रता का पालन करना बहुत जरूरी माना गया है क्योंकि माता शक्ति का जाग्रत स्वरूप हैं। सही तरीके से किया गया यह पाठ हमेशा बहुत जल्दी और उत्तम फल देने वाला साबित होता है।
अगर आप भी अपने जीवन के कष्टों को दूर करने और करणी माई का आशीर्वाद पाने के लिए इस चालीसा का पाठ शुरू करना चाहते हैं तो इस बेहद आसान और सही विधि का पालन करें:
- पाठ करने के लिए सुबह का समय सबसे बेस्ट माना जाता है। शुक्रवार या मंगलवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इस पूजा में साधक का पूरी तरह साफ-सुथरे कपड़े पहनना जरूरी है और यदि संभव हो तो पीले या लाल रंग के कपड़े पहनें।
- अपने घर के मंदिर या किसी पवित्र स्थान को अच्छे से साफ कर लें। एक छोटी लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर माँ करणी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। माता के सामने सिंह सवारी या उनके त्रिशूल का ध्यान करना बहुत शुभ होता है।
- माता की प्रतिमा के सामने गाय के शुद्ध देसी घी का या फिर चमेली के तेल का एक दीपक जलाएं और साथ में सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। माँ करणी को कुंकुम, सिंदूर और अक्षत का तिलक लगाएं। उन्हें लाल रंग के फूल चढ़ाना बहुत ही प्रिय माना जाता है।
- पूजा के दौरान करणी माता को उनकी प्रिय चीजें जैसे मिश्री, चिरौंजी, पेड़े या फिर ताजे फलों का सात्विक भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद माता से अपनी अनजानी भूल-चूक के लिए हाथ जोड़कर सच्चे दिल से क्षमा जरूर मांगें।
- अब ऊन या कुशा के एक साफ लाल आसन पर बैठ जाएं और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखें। पूरी एकाग्रता और साफ उच्चारण के साथ श्री करणी माता चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद माता की आरती करें और उनसे अपने संकट हरने की विनती करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या महिलाएं भी करणी माता चालीसा का पाठ बहुत आराम से कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं भी पूरी शुद्धता, पवित्रता और सच्ची श्रद्धा के साथ करणी माता की चालीसा का पाठ बहुत आराम से कर सकती हैं। बस इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि अशुद्ध दिनों या मासिक धर्म के दौरान इस पाठ को करने से पूरी तरह बचना चाहिए और पूजा के नियमों का पालन करना चाहिए।
करणी माता चालीसा का पाठ किस दिन से शुरू करना सबसे अच्छा माना जाता है?
इस पवित्र चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए शुक्रवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है क्योंकि यह दिन देवी दुर्गा और उनके सभी स्वरूपों की पूजा के लिए विशेष रूप से समर्पित है। इसके अलावा आप किसी भी महीने के नवरात्रों के दौरान भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं जो बेहद शुभ फल देता है।
क्या शाम के समय भी इस चालीसा का पाठ किया जा सकता है?
हाँ, अगर आपको सुबह के समय किसी वजह से फुर्सत नहीं मिल पाती है तो आप शाम को सूर्यास्त के समय हाथ-पैर धोकर, पूरी तरह साफ होकर माता के सामने घी का दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ बहुत ही शांत मन से कर सकते हैं। शाम के समय पाठ करने से भी मानसिक शांति मिलती है।
क्या इस पाठ को करते समय खान-पान का कोई विशेष परहेज रखना पड़ता है?
हाँ, माँ शक्ति की साधना के दौरान सात्विकता का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है। जितने दिन भी आप करणी माता की चालीसा का नियमपूर्वक पाठ करते हैं उतने दिन मांस, मदिरा, अंडा और हर तरह के तामसिक भोजन जैसे प्याज और लहसुन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखना चाहिए ताकि पूजा का पूरा फल मिल सके।

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