हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत कांगड़ा जिले में स्थित मां बृजेश्वरी देवी का धाम भारत के सबसे जाग्रत और प्रमुख 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर तीनों लोकों में घूम रहे थे तब इस पावन जगह पर माता का दाहिना वक्ष गिरा था। इसी वजह से इन्हें नगरकोट की देवी या कांगड़ा देवी भी कहा जाता है। मान्यता है कि कलयुग के इस दौर में जो भी भक्त मां के दरबार में हाजिरी लगाता है या सच्चे मन से मां बृजेश्वरी देवी चालीसा का गान करता है उसकी झोली कभी खाली नहीं रहती और उसके जीवन के सारे कष्ट पल भर में दूर हो जाते हैं।
ज्योतिष और धार्मिक विद्वानों के अनुसार जो लोग विशेष रूप से चैत्र और आश्विन मास के नवरात्रों में या हर महीने की अष्टमी तिथि को मां की आराधना करते हैं उनके घर में सुख-समृद्धि का स्थाई वास होता है। मां बृजेश्वरी की कृपा से पुराने से पुराने अदालती विवाद, गंभीर बीमारियाँ और शत्रुओं का भय हमेशा के लिए खत्म हो जाता है। मां बृजेश्वरी देवी चालीसा पाठ में विस्तार से बताया गया है कि कैसे मुगल बादशाह और राजा मानसिंह जैसे बड़े-बड़े योद्धा भी मां की अद्भुत शक्ति को देखकर नतमस्तक हो गए थे। इसमें राजा त्रिलोक चंद के साथ मां के चौपड़ खेलने और डूबती हुई नाव को बचाने की सुंदर कहानियों को भी पिरोया गया है जो भक्तों के मन में अटूट विश्वास जगाती हैं।
आज के डिजिटल युग में बहुत से लोग अपने साथ भारी-भरकम धार्मिक किताबें रखने के बजाय अपने स्मार्टफोन या टैबलेट में पाठ पढ़ना ज्यादा पसंद करते हैं ताकि वे सफर के दौरान या ऑफिस में भी समय मिलने पर मां का ध्यान कर सकें। मां बृजेश्वरी देवी चालीसा पाठ PDF को इंटरनेट से डाउनलोड करके अपने पास रखना बहुत ही आसान और सुविधाजनक विकल्प बन गया है। यह पीडीएफ फाइल इंटरनेट पर बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध है जहाँ से इसे आसानी से अपने डिवाइस में सेव किया जा सकता है।
|| माँ बृजेश्वरी देवी चालीसा - काँगड़ा देवी (Maa Brajeswari Devi Chalisa PDF) ||
॥ दोहा ॥
शक्ति पीठ सूभ कांगड़ा बरिजेस्वरी सूभ धाम।
ब्रह्ममा विष्णु ओर शिव करते तुम्हे प्रडम॥
धीयाँ भारू मा आपका ज्योति अखंध स्वरूप।
टीन लोक के प्राडो को देते छाया धूप॥
॥ चौपाई ॥
जय जय गौरी कांगदे वाओ। बरिजेस्वरी आमम्बा महाकाली॥
सती रूप का अंश लिया है। नागरकोट मई वाज़ किया है॥
पिन्दडी रूप सूभ दर्शन भारी। चाँदी आसान छवि है नियरी॥
घंटा धुआनी डुआर बाजे। ढोल दपप डमरू संग गाजे॥
राजा जगत सिंग स्वपन दिखाया। कनखल का इतिहास बताया॥
ममतामयी सब भाव दिखाया। पर्वत वाला छेत्रा बताया॥
सभी देवता पूजन आए। लंगर भेरो आनंद पाए॥
डुआरे सिंग आ पहरा देता। सेर का पाँजा दुख हर लेता॥
मंगल आरती पंडित करते। जिससे विघन सारे है हटते॥
धीयानू भक्त ने सिष चड़ाया। दर्शन देकर सिष मिलाया॥
आस पास मंदिर है प्यारे। जिनके दर्शन भाग्या सवरे॥
डाई ओर है तारा मंडर। भूचाल मई रहा वही पर॥
एसी है मा छवि टिहरी। नागरकोट की विपद निवारी॥
चमत्कार कितने मा दिखाए। भारतवासी पूजन आए॥
राजा मानसिंघ भक्त बनाया। मलिन होकर रूप दिखाया॥
मुगल बादशाह तुमको माता माना। महिमा को टुंरी पहचाना॥
सेना लेकर जब भी आया। भक्ति देख मॅट घबराया॥
राजा त्रिलोक चाँद तुमको धीयया। चोपड़ खेली संग महामाया॥
एक बनिया वायपार को आया। नदी बीच नोका जब लाया॥
लगा डूबने मा चिल्लाया। उसका बेड़ा पार लगाया॥
बेहन आपकी जवाला मई। चिंतापुर्णी भी हरसाई॥
चामुंडा से प्रेम तुम्हारा। सक्चा मई तेरा डुआरा॥
कलयुग मई शक्ति कहलाई। सबने पूजा तू सुखदाई॥
वज्रा रूप धार दुस्त सहारे। पापी शक्ति देखके हारे॥
मर्यादा की रक्षा करती। खड़ाग ओर त्रिशूल हो धरती॥
ध्ृम की लाज बचाने वाली। कही संत हो कही विकराली॥
अंधकार के हटती बदल। तेरा है मा सुकछ का आँचल॥
आसवीं चेट नवरात्रा मनु। सांमुख तेरे दर्शन पौ॥
अंनपूर्णा तुम्ही बनी हो। मेरी मॅट ओर पिता तुम्ही हो॥
डुआरे PIPAL भोग लगौ। अन्न आपसे पाकर ख़ौ॥
मेकर सकरांति जब आए। मंदिर की शोभा बाद जाए॥
सारी रात मा का पूवूना होता। सारे जागे, कोई ना सोता॥
जहा छिनन्ह, धीयानू का पियारा। तुमने उसको नही विसरा॥
वेरषा मा जब रुककर होती। वेरषा बूँद धीयानू मच धोती॥
खेटे मई हर्याली छाती। सबके मान को जो हरसती॥
॥ इति श्री बृजेश्वरी देवी चालीसा सम्पूर्ण ॥
मां बृजेश्वरी देवी चालीसा (काँगड़ा देवी चालीसा) पाठ के लाभ
सच्चे दिल, साफ नियत और अटूट विश्वास के साथ नगरकोट वाली मां की चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से भक्तों को अपने जीवन में कई तरह के चमत्कारी और बहुत ही सुखद परिणाम देखने को मिलते हैं। आदि शक्ति अपने बच्चों की पुकार बहुत जल्दी सुनती हैं और उनके चारों तरफ सुरक्षा का एक ऐसा घेरा बना देती हैं जिसे कोई भी बुरी शक्ति भेद नहीं पाती।
यदि कोई भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ इस पावन चालीसा को अपनी रोज की पूजा का हिस्सा बनाता है तो उसे माता रानी के आशीर्वाद से निम्नलिखित मुख्य लाभ और उत्तम फल प्राप्त होते हैं:
- मां बृजेश्वरी देवी का एक रूप वज्रेश्वरी भी है जो दुश्मनों का नाश करने वाला माना गया है। इस चालीसा का नियमित पाठ करने से आपके गुप्त शत्रुओं की चालें नाकाम हो जाती हैं और यदि आपका कोई प्रॉपर्टी या कोर्ट-कचहरी का मामला अटका हुआ है तो उसमें आपको बहुत जल्दी सफलता मिलती है।
- मां कांगड़ा देवी साक्षात अन्नपूर्णा का रूप भी हैं जो अपने भक्तों को कभी भूखा नहीं सोने देतीं। इस पाठ के प्रभाव से घर की पुरानी दरिद्रता और पैसों की तंगी हमेशा के लिए दूर हो जाती है और बिजनेस व नौकरी में लगातार तरक्की के नए रास्ते खुलने लगते हैं।
- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां के पिंडी रूप पर जो घृत यानी मक्खन का लेप लगाया जाता है वह शरीर के रोगों को हरने वाला होता है। इसी तरह इस चालीसा का पाठ करने से भी शरीर के भीतर एक नई ऊर्जा का वास होता है जिससे पुरानी बीमारियां धीरे-धीरे ठीक होने लगती हैं।
- आज के समय में काम के अत्यधिक बोझ की वजह से लोग अक्सर तनाव और अशांति का शिकार हो जाते हैं। इस चालीसा की चमत्कारी चौपाइयों का पाठ करने से दिमाग को गजब का सुकून मिलता है और मन का हर तरह का अनजाना डर या डिप्रेशन पूरी तरह खत्म हो जाता है।
- जिस घर में अक्सर छोटी-छोटी बातों पर गृह क्लेश होता है या मनमुटाव रहता है वहाँ इस पाठ को करने से माहौल एकदम बदल जाता है। माता की असीम कृपा से घर की नेगेटिव एनर्जी नष्ट हो जाती है और परिवार के सदस्यों के बीच आपसी तालमेल बहुत मधुर हो जाता है।
मां बृजेश्वरी देवी चालीसा (काँगड़ा देवी चालीसा) पाठ की सही विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी देवी-देवता की पूजा या स्तुति का पूरा पुण्य फल तभी प्राप्त होता है जब उसे सही नियमों, सही दिशा और शुद्ध भाव के साथ संपन्न किया जाए। मां बृजेश्वरी देवी की पूजा में साफ-सफाई रखना, घी का दीपक जलाना और सात्विकता का पालन करना बहुत जरूरी माना गया है क्योंकि वे आदि शक्ति का रूप हैं। सही तरीके से किया गया यह पाठ हमेशा बहुत जल्दी और उत्तम फल देने वाला साबित होता है।
अगर आप भी अपने जीवन के कष्टों को दूर करने और नगरकोट वाली मैया का आशीर्वाद पाने के लिए इस चालीसा का पाठ शुरू करना चाहते हैं तो इस बेहद आसान और सही विधि का पालन करें:
- पाठ करने के लिए सुबह का समय सबसे बेस्ट माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और पूरी तरह साफ-सुथरे कपड़े पहनें। यदि संभव हो तो लाल या पीले रंग के कपड़े पहनें क्योंकि माता रानी की पूजा में ये रंग बेहद शुभ माने जाते हैं।
- अपने घर के मंदिर या किसी शांत पवित्र स्थान को अच्छे से साफ कर लें। एक छोटी लकड़ी की चौकी पर लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाएं और उस पर मां बृजेश्वरी देवी या मां दुर्गा की तस्वीर स्थापित करें और उनके सामने बैठ जाएं।
- माता की प्रतिमा के सामने गाय के शुद्ध देसी घी का एक दीपक जलाएं और साथ में एक सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। मां को कुंकुम, सिंदूर और अक्षत का तिलक लगाएं। उन्हें लाल रंग के ताजे फूल या गुड़हल की माला चढ़ाना बेहद उत्तम माना जाता है।
- पूजा के दौरान माता रानी को उनकी प्रिय चीजें जैसे सूजी का हलवा, पूरी, चना या फिर मखाने की खीर का सात्विक भोग लगाएं। इसके साथ ही आप चाहें तो नारियल और चुनरी भी मां के चरणों में अर्पित कर सकते हैं जो आपकी श्रद्धा को प्रकट करता है।
- अब ऊन या कुशा के एक साफ लाल आसन पर बैठ जाएं और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखें। पूरी एकाग्रता और साफ शब्दों में मां बृजेश्वरी देवी चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद कपूर से मां की आरती करें और पूरे परिवार में प्रसाद बांट दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कुंवारी कन्याएं भी मां बृजेश्वरी चालीसा का पाठ कर सकती हैं?
हाँ, कुंवारी कन्याएं भी अपने अच्छे भविष्य, मनचाहे वर की प्राप्ति और पढ़ाई-लिखाई में सफलता के लिए मां बृजेश्वरी चालीसा का पाठ पूरी श्रद्धा के साथ कर सकती हैं। मां अपने हर बच्चे की सच्ची और मासूम पुकार बहुत जल्दी सुनती हैं।
कांगड़ा देवी चालीसा का पाठ किस दिन से शुरू करना सबसे अच्छा माना जाता है?
इस पवित्र चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए मंगलवार या शुक्रवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है क्योंकि ये दोनों ही दिन देवी साधना के लिए विशेष रूप से समर्पित हैं। इसके अलावा आप किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार या नवरात्रि के पावन पर्व से इसकी शुरुआत कर सकते हैं।
क्या शाम के समय भी इस चालीसा का पाठ किया जा सकता है?
हाँ, अगर आपको सुबह के समय किसी वजह से टाइम नहीं मिल पाता है तो आप शाम को सूर्यास्त के समय यानी संध्या आरती के वक्त हाथ-पैर धोकर, पूरी तरह साफ होकर माता के सामने घी का दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ बहुत ही शांत मन से कर सकते हैं। शाम के समय पाठ करने से घर का माहौल शांत होता है।
पाठ के दिनों में खान-पान को लेकर क्या परहेज रखना जरूरी है?
चूंकि यह पूजा साक्षात आदि शक्ति की साधना से जुड़ी है इसलिए उनकी पूजा के दौरान सात्विकता का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है। जितने दिन भी आप इस चालीसा का नियमपूर्वक पाठ करते हैं उतने दिन घर में मांस, मदिरा, अंडा और हर तरह के तामसिक भोजन जैसे प्याज और लहसुन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखना चाहिए।

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