जम्मू के कटरा में त्रिकुटा पर्वत पर स्थित माता वैष्णो देवी का दरबार पूरे भारत में आस्था और शक्ति का एक ऐसा पावन केंद्र है जहाँ हर साल करोड़ों भक्त खिंचे चले आते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता वैष्णो देवी साक्षात महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का संयुक्त रूप हैं जिन्होंने धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए मानव रूप में अवतार लिया था। कलयुग के इस कठिन समय में माता की असीम कृपा पाने और अपनी हर मनोकामना को पूरा करने का सबसे सीधा और आसान रास्ता माता वैष्णो देवी चालीसा का पाठ करना माना गया है।
विद्वानों के अनुसार जो लोग विशेष रूप से साल के दोनों नवरात्रों में, हर महीने की अष्टमी तिथि को या किसी भी शुभ मंगलवार के दिन माता वैष्णो देवी की ज्योति का ध्यान करते हैं, उनके घर में कभी दरिद्रता कदम नहीं रखती। मां की दया दृष्टि से बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं और पूरे परिवार में पॉजिटिव एनर्जी बनी रहती है। माता वैष्णो देवी चालीसा में माता रानी के जन्म से लेकर त्रिकुटा पर्वत पर पिंडी रूप में विराजमान होने तक की पूरी कथा बताई गई है। इस चालीसा में विस्तार से वर्णन मिलता है कि कैसे माता ने रत्नाकर के घर जन्म लिया, भगवान श्री राम के आदेश पर वे गुफा में तपस्या करने गईं और दुष्ट भैरों नाथ का उद्धार किया। यह पाठ इंसान की सोई हुई किस्मत को जगाता है, श्रीधर पंडित और ध्यानूं भगत की तरह ही भक्तों को मां की अनन्य भक्ति प्रदान करता है।
आज के इस आधुनिक और डिजिटल जमाने में बहुत से लोग पूजा-पाठ की भारी किताबें साथ रखने के बजाय अपने मोबाइल फोन या टैबलेट में पढ़ना ज्यादा पसंद करते हैं। माता वैष्णो देवी चालीसा पाठ PDF को इंटरनेट से डाउनलोड करके अपने पास सुरक्षित रखना बेहद सुविधाजनक होता है जिससे आप ऑफिस जाते समय, यात्रा के दौरान या घर से दूर होने पर भी अपनी रोज की पूजा को बहुत ही आराम से पूरा कर सकते हैं। यह पीडीएफ फाइल इंटरनेट पर बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध है।
|| माता वैष्णो देवी चालीसा (Mata Vashno Devi Chalisa PDF) ||
॥ दोहा ॥
गरुड़ वाहिनी वैष्णवी, त्रिकुटा पर्वत धाम ।
काली, लक्ष्मी, सरस्वती, शक्ति तुम्हें प्रणाम ॥
॥ चौपाई ॥
नमो: नमो: वैष्णो वरदानी, कलि काल मे शुभ कल्याणी।
मणि पर्वत पर ज्योति तुम्हारी, पिंडी रूप में हो अवतारी॥
देवी देवता अंश दियो है, रत्नाकर घर जन्म लियो है।
करी तपस्या राम को पाऊं, त्रेता की शक्ति कहलाऊं॥
कहा राम मणि पर्वत जाओ, कलियुग की देवी कहलाओ।
विष्णु रूप से कल्कि बनकर, लूंगा शक्ति रूप बदलकर॥
तब तक त्रिकुटा घाटी जाओ, गुफा अंधेरी जाकर पाओ।
काली-लक्ष्मी-सरस्वती मां, करेंगी पोषण पार्वती मां॥
ब्रह्मा, विष्णु, शंकर द्वारे, हनुमत, भैरों प्रहरी प्यारे।
रिद्धि, सिद्धि चंवर डुलावें, कलियुग-वासी पूजत आवें॥
पान सुपारी ध्वजा नारीयल, चरणामृत चरणों का निर्मल।
दिया फलित वर मॉ मुस्काई, करन तपस्या पर्वत आई॥
कलि कालकी भड़की ज्वाला, इक दिन अपना रूप निकाला।
कन्या बन नगरोटा आई, योगी भैरों दिया दिखाई॥
रूप देख सुंदर ललचाया, पीछे-पीछे भागा आया।
कन्याओं के साथ मिली माँ, कौल-कंदौली तभी चली माँ॥
देवा माई दर्शन दीना, पवन रूप हो गई प्रवीणा।
नवरात्रों में लीला रचाई, भक्त श्रीधर के घर आई॥
योगिन को भण्डारा दीनी, सबने रूचिकर भोजन कीना।
मांस, मदिरा भैरों मांगी, रूप पवन कर इच्छा त्यागी॥
बाण मारकर गंगा निकली, पर्वत भागी हो मतवाली।
चरण रखे आ एक शीला जब, चरण-पादुका नाम पड़ा तब॥
पीछे भैरों था बलकारी, चोटी गुफा में जाय पधारी।
नौ मह तक किया निवासा, चली फोड़कर किया प्रकाशा॥
आद्या शक्ति-ब्रह्म कुमारी, कहलाई माँ आद कुंवारी।
गुफा द्वार पहुँची मुस्काई, लांगुर वीर ने आज्ञा पाई॥
भागा-भागा भैंरो आया, रक्षा हित निज शस्त्र चलाया।
पड़ा शीश जा पर्वत ऊपर, किया क्षमा जा दिया उसे वर॥
अपने संग में पुजवाऊंगी, भैंरो घाटी बनवाऊंगी।
पहले मेरा दर्शन होगा, पीछे तेरा सुमिरन होगा॥
बैठ गई मां पिंडी होकर, चरणों में बहता जल झर झर।
चौंसठ योगिनी-भैंरो बर्वत, सप्तऋषि आ करते सुमरन॥
घंटा ध्वनि पर्वत पर बाजे, गुफा निराली सुंदर लागे।
भक्त श्रीधर पूजन कीन, भक्ति सेवा का वर लीन॥
सेवक ध्यानूं तुमको ध्याना, ध्वजा व चोला आन चढ़ाया।
सिंह सदा दर पहरा देता, पंजा शेर का दु:ख हर लेता॥
जम्बू द्वीप महाराज मनाया, सर सोने का छत्र चढ़ाया।
हीरे की मूरत संग प्यारी, जगे अखण्ड इक जोत तुम्हारी॥
सेवक 'कमल' शरण तिहारी, हरो वैष्णो विपत हमारी॥
॥ दोहा ॥
कलियुग में महिमा तेरी, है मां अपरंपार ।
धर्म की हानि हो रही, प्रगट हो अवतार ॥
॥ इति श्री वैष्णो देवी चालीसा सम्पूर्ण ॥
माता वैष्णो देवी चालीसा पाठ के लाभ
सच्चे मन, साफ नियत और अटूट विश्वास के साथ वैष्णो मैया की चालीसा का नियमित रूप से गान करने से भक्तों को अपने जीवन में कई तरह के चमत्कारी और शुभ बदलाव महसूस होने लगते हैं। त्रिकुटा पर्वत पर रहने वाली मां अपने बच्चों की पुकार बहुत जल्दी सुनती हैं और उनके जीवन के हर बड़े संकट को पल भर में दूर कर देती हैं।
यदि कोई भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ इस पावन चालीसा को अपनी रोज की पूजा का हिस्सा बनाता है या विशेष अवसरों पर इसका पाठ करता है तो माता रानी की कृपा से उसे नीचे दिए गए मुख्य लाभ बहुत ही जल्दी प्राप्त होते हैं:
- आज के समय में काम के अत्यधिक बोझ की वजह से लोग अक्सर मानसिक अशांति का शिकार हो जाते हैं। इस चालीसा की मधुर चौपाइयों का पाठ करने से दिमाग को गजब की शांति मिलती है, मन का हर तरह का अनजाना डर पूरी तरह दूर होता है और पॉजिटिव विचार आते हैं।
- यदि आपके गुप्त दुश्मन आपको लगातार परेशान कर रहे हैं या ऑफिस में कोई आपकी तरक्की रोक रहा है तो यह पाठ आपके लिए रामबाण है। इसके प्रभाव से आपके विरोधियों की हर चाल नाकाम हो जाती है और किसी भी तरह के काले जादू या नजर दोष का असर खत्म हो जाता है।
- जिस घर में नियमित रूप से वैष्णो देवी चालीसा की आवाज गूंजती है वहाँ कभी भी कंगाली या दरिद्रता कदम नहीं रख सकती। माता के आशीर्वाद से आमदनी के नए और अच्छे स्रोत खुलते हैं जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति हमेशा बहुत मजबूत बनी रहती है।
- जिन परिवारों में संतान प्राप्ति में बाधा आ रही हो या बच्चों का मन पढ़ाई-लिखाई में न लग रहा हो, उनके लिए यह पाठ बहुत शुभ माना जाता है। मां की कृपा से बच्चों को बुद्धि मिलती है और वे सही रास्ते पर चलते हुए बड़ी सफलता पाते हैं।
- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां के पावन स्वरूप का ध्यान करने और इस चालीसा के जाप से शरीर के भीतर एक नई ऊर्जा का वास होता है जिससे पुरानी और असाध्य बीमारियां धीरे-धीरे ठीक होने लगती हैं और व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
माता वैष्णो देवी चालीसा पाठ की सही विधि
शास्त्रों के अनुसार किसी भी देवी-देवता की पूजा या स्तुति का पूरा पुण्य फल तभी प्राप्त होता है जब उसे सही नियमों, सही दिशा और शुद्ध भाव के साथ संपन्न किया जाए। माता वैष्णो देवी की पूजा में साफ-सफाई रखना और पवित्रता का पालन करना बहुत जरूरी माना गया है क्योंकि वे स्वयं तेज और पावनता की साक्षात देवी हैं। सही तरीके से और सही नियम से किया गया यह पाठ हमेशा बहुत जल्दी और उत्तम फल देने वाला साबित होता है।
अगर आप भी अपने जीवन के कष्टों को दूर करने और मां वैष्णो जी का दिव्य आशीर्वाद पाने के लिए इस चालीसा का पाठ शुरू करना चाहते हैं तो इस बेहद आसान और सही विधि का पालन करें:
- इस पावन पाठ को करने के लिए सुबह या ब्रह्म मुहूर्त का समय सबसे बढ़िया माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर नहा धो लें और पूरी तरह साफ कपड़े पहनें। मां की पूजा में लाल या पीले रंग के कपड़ों का प्रयोग करना सबसे ज्यादा फलदायी और शुभ माना गया है।
- अपने घर के पूजा स्थल को अच्छे से साफ कर लें। एक लकड़ी की छोटी चौकी पर लाल रंग का नया कपड़ा बिछाएं और उस पर माता वैष्णो देवी की तस्वीर स्थापित करें जिसमें मां के साथ लांगुर वीर और भैरों बाबा भी मौजूद हों।
- माता की प्रतिमा के सामने गाय के शुद्ध देसी घी का एक दीपक जलाएं और साथ में एक सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। मां को कुंकुम, रोली और अक्षत का तिलक लगाएं। उन्हें लाल रंग की चुनरी, नारियल और लाल फूल चढ़ाना बेहद उत्तम माना जाता है।
- पूजा के समय माता रानी को उनकी प्रिय चीजें जैसे खोये के पेड़े, मिश्री, मखाने की खीर या फिर सूजी का हलवा और चने का सात्विक भोग लगाएं। तामसिक चीजों का भोग भूलकर भी न लगाएं और भोग लगाने के बाद मां से भूलचूक के लिए क्षमा मांगें।
- अब ऊन या कुशा के बने साफ आसन पर बैठ जाएं और अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें। पूरी एकाग्रता और साफ शब्दों में माता वैष्णो देवी चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद कपूर से मां की आरती करें और शांत मन से कुछ देर ध्यान लगाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या घर के मंदिर में माता वैष्णो देवी की पिंडी स्वरूप वाली फोटो रखना शुभ होता है?
हाँ, आप अपने घर के मंदिर में माता वैष्णो देवी की वैसी तस्वीर रख सकते हैं जिसमें उनके तीनों पिंडी रूप यानी महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के दर्शन होते हों। ऐसी फोटो के सामने चालीसा का पाठ करने से साक्षात त्रिकुटा पर्वत के दरबार जैसा ही पुण्य फल घर बैठे प्राप्त हो जाता है।
माता वैष्णो देवी चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए कौन सा दिन सबसे अच्छा माना जाता है?
इस पवित्र चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए मंगलवार या शुक्रवार का दिन सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है क्योंकि यह दिन देवी साधना के लिए विशेष रूप से समर्पित है। इसके अलावा आप किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार, पूर्णिमा तिथि या नवरात्रि के पावन पर्व से भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं।
क्या इस पावन चालीसा का पाठ शाम के समय भी किया जा सकता है?
हाँ, अगर आपको सुबह के समय किसी वजह से टाइम नहीं मिल पाता है तो आप शाम को सूर्यास्त के समय यानी गोधूलि बेला में हाथ-पैर धोकर, पूरी तरह साफ होकर माता रानी के सामने घी का दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ बहुत ही शांत और एकाग्र मन से कर सकते हैं। शाम के समय पाठ करने से भी घर की अशांति दूर होती है।
वैष्णो देवी चालीसा पाठ के दौरान खान-पान में किन बातों का परहेज करना जरूरी है?
इस पाठ की साधना के दौरान सात्विकता का कड़ाई से पालन करना चाहिए। जितने दिन भी आप इस चालीसा का पाठ मन्नत के लिए करते हैं उतने दिन आपको पूरी तरह से सात्विक रहना होगा और घर में मांस, मदिरा, अंडा, लहसुन और प्याज जैसे हर तरह के तामसिक भोजन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगानी होगी।

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