राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर बालाजी धाम पूरे भारत में चमत्कारों और संकट मोचन के लिए सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। कलयुग के जाग्रत देव माने जाने वाले हनुमान जी यहाँ अपने बाल रूप में विराजमान हैं जिन्हें लोग प्यार से संकटमोचन बाबा या बालाजी कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि कलयुग के इस दौर में जब इंसान चारों तरफ से परेशानियों, नेगेटिव एनर्जी और दिमागी तनाव से घिर जाता है तब बाबा का दरबार ही एकमात्र ऐसा सहारा है जहाँ हर दुखी व्यक्ति को न्याय और परमानेंट सुकून मिलता है। बालाजी महाराज की असीम कृपा पाने और अपनी किस्मत का बंद ताला खोलने के लिए श्री मेहंदीपुर बालाजी चालीसा का पाठ करना सबसे अचूक और सरल माध्यम माना जाता है।
आज के समय में जब लोग करियर को लेकर बहुत परेशान रहते हैं या फिर किसी न किसी अनजाने डर और डिप्रेशन में जीते हैं तब इस दिव्य चालीसा का पाठ मन को एक जबरदस्त हिम्मत देता है। धार्मिक विद्वानों का ऐसा अटूट विश्वास है कि जो लोग नियम से या हफ्ते के हर शनिवार और मंगलवार को इस चालीसा का जाप करते हैं उनके जीवन से हर तरह का दुर्भाग्य हमेशा के लिए दूर भाग जाता है। यदि आपके घर में बिना वजह झगड़े होते हैं या काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं तो इस पवित्र चालीसा की शरण लेना अपने संकटों से मुक्ति पाने का सबसे बेस्ट घरेलू उपाय है।
श्री मेहंदीपुर बालाजी चालीसा पाठ वास्तव में 40 पंक्तियों की एक बहुत ही पावरफुल और सुंदर स्तुति है जिसमें हनुमान जी के बाल स्वरूप, उनके अद्भुत तेज और मेहंदीपुर धाम की महिमा का पूरा बखान मिलता है। इस चालीसा में साफ़ बताया गया है कि मेहंदीपुर में केवल हनुमान जी नहीं बल्कि उनके साथ प्रेतराज सरकार और कोतवाल भैरव जी भी साक्षात निवास करते हैं जो तीनों मिलकर भक्तों की रक्षा करते हैं। इस चालीसा के सीधे-साधे और मधुर शब्द इतने शक्तिशाली हैं कि इनके उच्चारण मात्र से ही घर के भीतर छिपी हर तरह की निगेटिविटी तुरंत भाग खड़ी होती है। इस पवित्र पाठ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बाबा के उस पराक्रम की याद दिलाई गई है जब उन्होंने बचपन में सूर्य को फल समझकर निगल लिया था और लक्ष्मण जी की जान बचाने के लिए पूरा पहाड़ उठा लाए थे।
|| श्री मेहंदीपुर बालाजी चालीसा (Mehandipur Balaji Chalisa PDF) ||
॥ दोहा ॥
श्री गुरु चरण चितलाय के धरें ध्यान हनुमान।
बालाजी चालीसा लिखे दास स्नेही कल्याण॥
विश्व विदित वर दानी संकट हरण हनुमान।
मैंहदीपुर में प्रगट भये बालाजी भगवान॥
॥ चौपाई ॥
जय हनुमान बालाजी देवा। प्रगट भये यहां तीनों देवा॥
प्रेतराज भैरव बलवाना। कोतवाल कप्तानी हनुमाना॥
मैंहदीपुर अवतार लिया है। भक्तों का उद्धार किया है॥
बालरूप प्रगटे हैं यहां पर। संकट वाले आते जहाँ पर॥
डाकनि शाकनि अरु जिन्दनीं। मशान चुडैल भूत भूतनीं॥
जाके भय ते सब भग जाते। स्याने भोपे यहाँ घबराते॥
चौकी बन्धन सब कट जाते। दूत मिले आनन्द मनाते॥
सच्चा है दरबार तिहारा। शरण पड़े सुख पावे भारा॥
रूप तेज बल अतुलित धामा। सन्मुख जिनके सिय रामा॥
कनक मुकुट मणि तेज प्रकाशा। सबकी होवत पूर्ण आशा॥
महंत गणेशपुरी गुणीले। भये सुसेवक राम रंगीले॥
अद्भुत कला दिखाई कैसी। कलयुग ज्योति जलाई जैसी॥
ऊँची ध्वजा पताका नभ में। स्वर्ण कलश हैं उन्नत जग में॥
धर्म सत्य का डंका बाजे। सियाराम जय शंकर राजे॥
आन फिराया मुगदर घोटा। भूत जिन्द पर पड़ते सोटा॥
राम लक्ष्मन सिय हृदय कल्याणा। बाल रूप प्रगटे हनुमाना॥
जय हनुमन्त हठीले देवा। पुरी परिवार करत हैं सेवा॥
लड्डू चूरमा मिश्री मेवा। अर्जी दरखास्त लगाऊ देवा॥
दया करे सब विधि बालाजी। संकट हरण प्रगटे बालाजी॥
जय बाबा की जन जन ऊचारे। कोटिक जन तेरे आये द्वारे॥
बाल समय रवि भक्षहि लीन्हा। तिमिर मय जग कीन्हो तीन्हा॥
देवन विनती की अति भारी। छाँड़ दियो रवि कष्ट निहारी॥
लांधि उदधि सिया सुधि लाये। लक्ष्मन हित संजीवन लाये॥
रामानुज प्राण दिवाकर। शंकर सुवन माँ अंजनी चाकर॥
केशरी नन्दन दुख भव भंजन। रामानन्द सदा सुख सन्दन॥
सिया राम के प्राण पियारे। जब बाबा की भक्त ऊचारे॥
संकट दुख भंजन भगवाना। दया करहु हे कृपा निधाना॥
सुमर बाल रूप कल्याणा। करे मनोरथ पूर्ण कामा॥
अष्ट सिद्धि नव निधि दातारी। भक्त जन आवे बहु भारी॥
मेवा अरू मिष्ठान प्रवीना। भैंट चढ़ावें धनि अरु दीना॥
नृत्य करे नित न्यारे न्यारे। रिद्धि सिद्धियां जाके द्वारे॥
अर्जी का आदेश मिलते ही। भैरव भूत पकड़ते तबही॥
कोतवाल कप्तान कृपाणी। प्रेतराज संकट कल्याणी॥
चौकी बन्धन कटते भाई। जो जन करते हैं सेवकाई॥
रामदास बाल भगवन्ता। मैंहदीपुर प्रगटे हनुमन्ता॥
जो जन बालाजी में आते। जन्म जन्म के पाप नशाते॥
जल पावन लेकर घर जाते। निर्मल हो आनन्द मनाते॥
क्रूर कठिन संकट भग जावे। सत्य धर्म पथ राह दिखावे॥
जो सत पाठ करे चालीसा। तापर प्रसन्न होय बागीसा॥
कल्याण स्नेही। स्नेह से गावे। सुख समृद्धि रिद्धि सिद्धि पावे॥
॥ दोहा ॥
मन्द बुद्धि मम जानके, क्षमा करो गुणखान।
संकट मोचन क्षमहु मम, दास स्नेही कल्याण॥
॥ इति श्री बालाजी चालीसा समाप्त ॥
श्री मेहंदीपुर बालाजी चालीसा पाठ के लाभ
सच्चे दिल और पूरी निष्ठा के साथ श्री मेहंदीपुर बालाजी चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से भक्तों को अपने जीवन में कई तरह के चमत्कारी और शुभ लाभ देखने को मिलते हैं। हनुमान जी अपने भक्तों की सच्ची पुकार बहुत जल्दी सुनते हैं और उनके चारों तरफ एक ऐसा पॉजिटिव सुरक्षा कवच बना देते हैं जिससे कोई भी बुरी ताकत नुकसान नहीं पहुँचा पाती।
यदि कोई भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ इस पवित्र चालीसा को अपनी रोज की पूजा का हिस्सा बनाता है या हर मंगलवार को इसका नियम से पाठ करता है तो उसे मिलने वाले मुख्य लाभ और पुण्य फल कुछ इस प्रकार हैं:
- इस चालीसा का पाठ करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे भूत-प्रेत, डाकिनी-शाकिनी जैसी बुरी शक्तियों का साया तुरंत हट जाता है। चालीसा की पंक्तियों के अनुसार बाबा के नाम के भय से ही सारी बुरी बलाएं कोसों दूर भाग जाती हैं और व्यक्ति एकदम निडर हो जाता है।
- अगर आपके काम-धंधे में लगातार भारी नुकसान हो रहा है, नौकरी में बहुत ज्यादा टेंशन है या सिर पर कर्ज का बोझ बढ़ता ही जा रहा है तो इस चालीसा का पाठ करें। संकट मोचन बाबा की दया से आमदनी के नए रास्ते खुलते हैं और घर में धन-दौलत की बरकत हमेशा बनी रहती है।
- जिन लोगों के जीवन में बहुत सारे विरोधी खड़े हो गए हैं या जो लोग किसी झूठे अदालती मामले में फंसे हुए हैं उन्हें इस पाठ से अद्भुत मदद मिलती है। बाबा का मुगदर और सोटा शत्रुओं के हौसले पस्त कर देता है और भक्त की जीत का रास्ता साफ़ करता है।
- जो लोग अक्सर बीमार रहते हैं या जिन्हें कोई न कोई शारीरिक कष्ट सताता रहता है उनके लिए यह पाठ अमृत की तरह है। इसके नियमित जाप से शरीर में एक नई ऊर्जा का संचार होता है जिससे पुरानी बीमारियां धीरे-धीरे ठीक होने लगती हैं और मानसिक शांति मिलती है।
- चालीसा की पंक्तियों के अनुसार बाबा के दरबार में जो भी अर्जी लगाता है उसकी हर जायज इच्छा पूरी होती है। जो व्यक्ति सच्चे मन से यह पाठ करता है उसके जीवन के रुके हुए सारे काम बहुत ही आसानी से और समय पर पूरे हो जाते हैं।
श्री मेहंदीपुर बालाजी चालीसा पाठ की सही विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी देवी-देवता की पूजा या पाठ का पूरा पुण्य फल तभी प्राप्त होता है जब उसे सही नियमों, सही दिशा और शुद्ध भाव के साथ किया जाए। मेहंदीपुर बालाजी की पूजा में नियमों का पालन करना और साफ-सफाई रखना बहुत जरूरी माना गया है क्योंकि बाबा साक्षात मर्यादा पुरुषोत्तम राम के भक्त हैं। सही तरीके से किया गया यह पाठ हमेशा बहुत जल्दी और उत्तम फल देने वाला साबित होता है।
अगर आप भी अपने जीवन के कष्टों को दूर करने और बाबा बजरंगबली का आशीर्वाद पाने के लिए इस चालीसा का पाठ शुरू करना चाहते हैं तो इस बेहद आसान और सही विधि का पालन करें:
- पाठ करने के लिए सुबह का समय सबसे बेस्ट माना जाता है। मंगलवार या शनिवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इस पूजा में साधक का पूरी तरह साफ-सुथरे कपड़े पहनना जरूरी है और यदि संभव हो तो लाल रंग के कपड़े पहनें क्योंकि लाल रंग हनुमान जी को बहुत प्रिय है।
- अपने घर के मंदिर या किसी पवित्र स्थान को अच्छे से साफ कर लें। एक छोटी चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर मेहंदीपुर बालाजी, प्रेतराज सरकार और भैरव बाबा की तस्वीर स्थापित करें। साथ में भगवान राम और माता सीता की तस्वीर भी जरूर रखें।
- भगवान की प्रतिमा के सामने चमेली के तेल का या फिर गाय के शुद्ध घी का एक दीपक जलाएं और साथ में सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। बाबा को लाल चंदन, अक्षत और साफ जल अर्पित करें। उन्हें लाल रंग के फूल और सिंदूर चढ़ाना बहुत ही शुभ फल देता है।
- पूजा के दौरान बालाजी महाराज को उनकी सबसे प्रिय चीजें जैसे बूंदी के लड्डू, चूरमा, मिश्री या फिर सूखे मेवों का सात्विक भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद भगवान से अपनी भूल-चूक के लिए हाथ जोड़कर सच्चे दिल से क्षमा जरूर मांगें।
- अब ऊन या कुशा के एक साफ लाल आसन पर बैठ जाएं और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखें। पूरी एकाग्रता और साफ उच्चारण के साथ श्री बालाजी चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद हनुमान जी की आरती करें और उनसे अपने संकट हरने की विनती करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या महिलाएं भी मेहंदीपुर बालाजी चालीसा का पाठ बहुत आराम से कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं भी पूरी शुद्धता, पवित्रता और सच्ची श्रद्धा के साथ बालाजी महाराज की चालीसा का पाठ बहुत आराम से कर सकती हैं। बस इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि अशुद्ध दिनों या मासिक धर्म के दौरान इस पाठ को करने से पूरी तरह बचना चाहिए और पूजा के दौरान बाबा की मूर्ति को स्पर्श नहीं करना चाहिए।
बालाजी चालीसा का पाठ किस दिन से शुरू करना सबसे अच्छा माना जाता है?
इस पवित्र चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए मंगलवार या शनिवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है क्योंकि ये दोनों दिन हनुमान जी की पूजा के लिए विशेष रूप से समर्पित हैं। इसके अलावा आप किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार से इसकी शुरुआत कर सकते हैं जो बेहद शुभ फल देता है।
क्या शाम के समय भी इस चालीसा का पाठ किया जा सकता है?
हाँ, अगर आपको सुबह के समय किसी वजह से फुर्सत नहीं मिल पाती है तो आप शाम को सूर्यास्त के समय हाथ-पैर धोकर, पूरी तरह साफ होकर भगवान के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ बहुत ही शांत मन से कर सकते हैं। शाम को हनुमान चालीसा या बजरंग बाण के साथ इसका पाठ करना और भी बढ़िया होता है।
क्या इस पाठ को करते समय खान-पान का कोई विशेष परहेज रखना पड़ता है?
हाँ, हनुमान जी की साधना के दौरान सात्विकता का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है। जितने दिन भी आप बाबा की चालीसा का नियमपूर्वक पाठ करते हैं उतने दिन मांस, मदिरा, अंडा और हर तरह के तामसिक भोजन जैसे प्याज और लहसुन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखना चाहिए। इसके अलावा ब्रह्मचर्य का पालन करना भी जरूरी है।

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