श्री नर्मदा चालीसा पाठ (Narmada Chalisa Hindi PDF)

भारत की पवित्र नदियों में मां नर्मदा का स्थान बेहद खास और आदरणीय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जहां गंगा नदी में स्नान करने से पुण्यों की प्राप्ति होती है, वहीं मां नर्मदा के सिर्फ दर्शन मात्र से ही इंसान के सारे पाप धुल जाते हैं। अमरकंटक से निकलकर सागर में मिलने वाली इस जीवनदायिनी नदी की कृपा पाने के लिए श्री नर्मदा चालीसा का पाठ करना सबसे उत्तम और सरल माध्यम माना गया है। इस पाठ को करने के लिए किसी बहुत कठिन नियम या बड़ी पूजा सामग्री की जरूरत नहीं होती है। आइए जानते हैं कि मां नर्मदा की चालीसा का पाठ करने से क्या-क्या फायदे मिलते हैं और इसकी सही पूजा विधि क्या है।

श्री नर्मदा चालीसा पाठ वास्तव में चालीस पंक्तियों की एक बहुत ही सुंदर और सरल स्तुति है, जिसमें मां नर्मदा के पावन स्वरूप, उनकी उत्पत्ति और भक्तों पर उनकी असीम कृपा का वर्णन किया गया है। भगवान शिव की पुत्री मानी जाने वाली मां नर्मदा को मैया रेवा के नाम से भी जाना जाता है। इस चालीसा में उनके शांत और ममतामयी रूप की प्रशंसा की गई है, जो अपने भक्तों के बड़े से बड़े संकट को भी पल भर में दूर कर देती हैं।

यह पाठ इतना सरल और सुगम है कि कोई भी साधारण इंसान इसे बहुत आसानी से पढ़ सकता है। जो लोग किसी वजह से नर्मदा नदी के तट पर जाकर स्नान या दर्शन नहीं कर पाते, वे अपने घर के मंदिर में ही इस चालीसा का पाठ करके मां नर्मदा की असीम कृपा पा सकते हैं। यह पाठ इंसान के भीतर छिपे डर को खत्म करता है और मन में श्रद्धा व शांति की भावना जगाता है।


|| श्री नर्मदा चालीसा पाठ (Narmada Chalisa Hindi PDF) ||

॥ दोहा ॥

देवि पूजित, नर्मदा, महिमा बड़ी अपार ।
चालीसा वर्णन करत, कवि अरु भक्त उदार॥
इनकी सेवा से सदा, मिटते पाप महान ।
तट पर कर जप दान नर, पाते हैं नित ज्ञान ॥

॥ चौपाई ॥

जय-जय-जय नर्मदा भवानी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी ।
अमरकण्ठ से निकली माता, सर्व सिद्धि नव निधि की दाता ।
कन्या रूप सकल गुण खानी, जब प्रकटीं नर्मदा भवानी ।
सप्तमी सुर्य मकर रविवारा, अश्वनि माघ मास अवतारा ॥
वाहन मकर आपको साजैं, कमल पुष्प पर आप विराजैं ।

ब्रह्मा हरि हर तुमको ध्यावैं, तब ही मनवांछित फल पावैं ।
दर्शन करत पाप कटि जाते, कोटि भक्त गण नित्य नहाते ।
जो नर तुमको नित ही ध्यावै, वह नर रुद्र लोक को जावैं ॥
मगरमच्छा तुम में सुख पावैं, अंतिम समय परमपद पावैं ।
मस्तक मुकुट सदा ही साजैं, पांव पैंजनी नित ही राजैं ।

कल-कल ध्वनि करती हो माता, पाप ताप हरती हो माता ।
पूरब से पश्चिम की ओरा, बहतीं माता नाचत मोरा ॥
शौनक ऋषि तुम्हरौ गुण गावैं, सूत आदि तुम्हरौं यश गावैं ।
शिव गणेश भी तेरे गुण गवैं, सकल देव गण तुमको ध्यावैं ।
कोटि तीर्थ नर्मदा किनारे, ये सब कहलाते दु:ख हारे ।

मनोकमना पूरण करती, सर्व दु:ख माँ नित ही हरतीं ॥
कनखल में गंगा की महिमा, कुरुक्षेत्र में सरस्वती महिमा ।
पर नर्मदा ग्राम जंगल में, नित रहती माता मंगल में ।
एक बार कर के स्नाना, तरत पिढ़ी है नर नारा ।
मेकल कन्या तुम ही रेवा, तुम्हरी भजन करें नित देवा ॥

जटा शंकरी नाम तुम्हारा,ने को है तारा ।
समोद्भवा नर्मदा तुम हो, पाप मोचनी रेवा तुम हो ।
तुम्हरी महिमा कहि नहीं जाई, करत न बनती मातु बड़ाई ।
जल प्रताप तुममें अति माता, जो रमणीय तथा सुख दाता ॥
चाल सर्पिणी सम है तुम्हारी, महिमा अति अपार है तुम्हारी ।

तुम में पड़ी अस्थि भी भारी, छुवत पाषाण होत वर वारि ।
यमुना मे जो मनुज नहाता, सात दिनों में वह फल पाता ।
सरस्वती तीन दीनों में देती, गंगा तुरत बाद हीं देती ॥
पर रेवा का दर्शन करके मानव फल पाता मन भर के ।
तुम्हरी महिमा है अति भारी, जिसको गाते हैं नर-नारी ।

जो नर तुम में नित्य नहाता, रुद्र लोक मे पूजा जाता ।
जड़ी बूटियां तट पर राजें, मोहक दृश्य सदा हीं साजें ॥
वायु सुगंधित चलती तीरा, जो हरती नर तन की पीरा ।
घाट-घाट की महिमा भारी, कवि भी गा नहिं सकते सारी ।
नहिं जानूँ मैं तुम्हरी पूजा, और सहारा नहीं मम दूजा ।

हो प्रसन्न ऊपर मम माता, तुम ही मातु मोक्ष की दाता ॥
जो मानव यह नित है पढ़ता, उसका मान सदा ही बढ़ता ।
जो शत बार इसे है गाता, वह विद्या धन दौलत पाता ।
अगणित बार पढ़ै जो कोई, पूरण मनोकामना होई ।
सबके उर में बसत नर्मदा, यहां वहां सर्वत्र नर्मदा ॥

॥ दोहा ॥

भक्ति भाव उर आनि के, जो करता है जाप ।
माता जी की कृपा से, दूर होत संताप॥

श्री नर्मदा चालीसा पाठ के लाभ

सच्चे दिल से मां नर्मदा की चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से भक्तों को अपने जीवन में कई तरह के चमत्कारी और शुभ लाभ देखने को मिलते हैं। मैया रेवा अपने बच्चों की पुकार बहुत जल्दी सुनती हैं और उनकी हर मनोकामना को पूरा करती हैं।

यदि कोई भी व्यक्ति पूरी निष्ठा और अटूट विश्वास के साथ इस चालीसा को अपनी रोज की दिनचर्या में शामिल करता है, तो उसे मिलने वाले मुख्य फायदे कुछ इस प्रकार हैं:

  • आज के समय में हर व्यक्ति किसी न किसी बात को लेकर मानसिक तनाव में रहता है। रोज इस चालीसा का पाठ करने से दिमाग एकदम शांत हो जाता है और जीवन की सारी चिंताएं और नकारात्मक विचार दूर हो जाते हैं।
  • धार्मिक ग्रंथों में माना गया है कि मां नर्मदा के नाम स्मरण मात्र से ही इंसान के पुराने पाप कट जाते हैं। इस चालीसा का नियमित पाठ करने से मन शुद्ध होता है और अच्छे कर्म करने की प्रेरणा मिलती है।
  • जिस घर में नियमित रूप से नर्मदा चालीसा का पाठ पढ़ा या सुना जाता है, वहां की सारी नेगेटिव एनर्जी हमेशा के लिए दूर भाग जाती है। परिवार के लोगों के बीच आपसी तालमेल और प्यार बहुत बढ़ जाता है।
  • अगर आपकी नौकरी या बिजनेस में लंबे समय से कोई रुकावट आ रही है या पैसों की तंगी बनी हुई है, तो मां नर्मदा की कृपा से धन के नए मार्ग खुलते हैं और आपके सारे बिगड़े काम दोबारा बनने लगते हैं।
  • भगवान शिव की पुत्री होने के कारण मां नर्मदा की चालीसा में संकटों को टालने की अद्‍भुत शक्ति है। यह पाठ इंसान को हर तरह के अनजाने डर, एक्सीडेंट और गंभीर शारीरिक कष्टों से हमेशा बचाकर रखता है।

श्री नर्मदा चालीसा पाठ की सही विधि

किसी भी देवी-देवता की पूजा या पाठ का पूरा पुण्य तभी मिलता है जब उसे सही नियमों और शुद्ध भाव के साथ किया जाए। मां नर्मदा की पूजा में तन और मन की शुद्धता का बहुत बड़ा महत्व माना गया है। सही तरीके से किया गया यह पाठ हमेशा बहुत जल्दी और उत्तम फल देने वाला साबित होता है।

अगर आप भी अपने घर में सुख-समृद्धि लाने के लिए मां नर्मदा की चालीसा का पाठ शुरू करना चाहते हैं, तो इस बेहद आसान और सही विधि का पालन करें:

  • पाठ करने के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और साफ-सुथरे कपड़े पहनें। यदि संभव हो तो पूजा के लिए सफेद या पीले रंग के वस्त्रों का चुनाव करें।
  • अपने घर के मंदिर की अच्छे से सफाई करें। एक छोटी चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं और उस पर मां नर्मदा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। यदि आपके पास नर्मदा नदी से प्राप्त हुआ नर्मदेश्वर शिवलिंग है, तो उसे भी पास में रखें।
  • माता की प्रतिमा के सामने गाय के शुद्ध घी का एक दीपक जलाएं और साथ में सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। मां नर्मदा को साफ जल, अक्षत, चंदन और सफेद या पीले रंग के फूल श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
  • अब एक साफ आसन पर बैठ जाएं और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखें। पूरी एकाग्रता और साफ उच्चारण के साथ श्री नर्मदा चालीसा का पाठ करें। पाठ के दौरान अपना पूरा ध्यान माता के चरणों में ही रखें।
  • चालीसा का पाठ पूरा होने के बाद माता को मिश्री, माखन या किसी सात्विक मिठाई का भोग लगाएं। अंत में मां नर्मदा की कपूर से आरती करें और अपने दुखों को दूर करने के लिए हाथ जोड़कर प्रार्थना करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या महिलाएं भी श्री नर्मदा चालीसा का पाठ कर सकती हैं?

हाँ, महिलाएं भी पूरी शुद्धता और श्रद्धा के साथ मां नर्मदा की चालीसा का पाठ कर सकती हैं। भगवान की भक्ति में सभी का समान अधिकार है, बस अशुद्ध दिनों में पाठ करने से बचना चाहिए।

नर्मदा चालीसा का पाठ किस दिन से शुरू करना सबसे अच्छा होता है?

इस चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए सोमवार या शुक्रवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा आप नर्मदा जयंती के पावन अवसर पर या किसी भी शुभ तिथि से इसकी शुरुआत कर सकते हैं।

क्या शाम के समय भी यह पाठ किया जा सकता है?

हाँ, अगर आपको सुबह के समय किसी वजह से फुर्सत नहीं मिलती है, तो आप शाम को सूर्यास्त के समय हाथ-पैर धोकर और साफ होकर मां के सामने घी का दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ बहुत आराम से कर सकते हैं।

क्या पाठ के दौरान कलश में नर्मदा जल रखना जरूरी है?

अगर आपके पास मां नर्मदा का पवित्र जल उपलब्ध है, तो उसे पूजा के समय कलश में भरकर रखना बहुत शुभ होता है। पाठ पूरा होने के बाद इस जल को पूरे घर में छिड़कने से घर की सारी नकारात्मकता दूर हो जाती है। यदि नर्मदा जल न हो, तो आप साधारण साफ जल भी रख सकते हैं।

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