ब्रज भूमि की अधिष्ठात्री देवी और भगवान श्री कृष्ण की परम प्रिय श्री राधा रानी की भक्ति के बिना कृष्ण भक्ति अधूरी मानी जाती है। शास्त्रों में साफ कहा गया है कि जहाँ कृष्ण नाम लेने से जीवन सुधरता है वहीं राधा नाम लेने मात्र से स्वयं सांवरिया सरकार खींचे चले आते हैं। राधा रानी साक्षात प्रेम और करुणा की प्रतिमूर्ति हैं जो अपने भक्तों के बड़े से बड़े कष्ट को पल भर में दूर कर देती हैं। बरसाने वाली लाडली जी की विशेष कृपा और असीम स्नेह पाने के लिए श्री राधा चालीसा का पाठ करना सबसे उत्तम और आसान उपाय माना गया है।
आज के इस तनावभरे समय में जब लोग मानसिक अशांति, रिश्तों में कड़वाहट और अनजाने डरों से घिरे रहते हैं तब राधा रानी का सुमरन जीवन में एक नई उमंग जगाता है। मान्यता है कि ब्रज के रसिक संत हमेशा राधा नाम की महिमा गाते हैं क्योंकि इस नाम में पूरे ब्रह्मांड का सुख समाया हुआ है। अगर कोई भी भक्त अपने घर के मंदिर में बैठकर सच्चे भाव से इस चालीसा का गान करता है तो उसके घर की सारी नकारात्मकता और कलह हमेशा के लिए दूर हो जाती है।
श्री राधा चालीसा पाठ में 40 पंक्तियों की एक बेहद मधुर और चमत्कारी स्तुति है जिसमें वृषभानु दुलारी और कीरति नंदिनी श्री राधा जी के दिव्य स्वरूप, उनकी अद्भुत लीलाओं और उनके गोलोक विहार का सुंदर वर्णन किया गया है। इस चालीसा में बताया गया है कि स्वयं भगवान कृष्ण भी राधा नाम के वशीभूत होकर उनके पीछे-पीछे फिरते हैं और मुरली में भी हमेशा राधा नाम ही पुकारते हैं। इस चालीसा का पाठ करने से भक्तों को उसी गोपी भाव और निश्छल प्रेम का अहसास होता है जो ब्रज की आत्मा है।
|| श्री राधा चालीसा (Radha Chalisa PDF) ||
॥ दोहा ॥
श्री राधे वुषभानुजा, भक्तनि प्राणाधार ।
वृन्दाविपिन विहारिणी, प्रानावौ बारम्बार ॥
जैसो तैसो रावरौ, कृष्ण प्रिय सुखधाम ।
चरण शरण निज दीजिये, सुन्दर सुखद ललाम ॥
॥ चौपाई ॥
जय वृषभान कुंवारी श्री श्यामा । कीरति नंदिनी शोभा धामा ॥
नित्य विहारिणी श्याम अधर । अमित बोध मंगल दातार ॥
रास विहारिणी रस विस्तारिन । सहचरी सुभाग यूथ मन भावनी ॥
नित्य किशोरी राधा गोरी । श्याम प्रन्नाधन अति जिया भोरी ॥
करुना सागरी हिय उमंगिनी । ललितादिक सखियाँ की संगनी ॥
दिनकर कन्या कूल विहारिणी । कृष्ण प्रण प्रिय हिय हुल्सवानी ॥
नित्य श्याम तुम्हारो गुण गावें । श्री राधा राधा कही हर्शवाहीं ॥
मुरली में नित नाम उचारें । तुम कारण लीला वपु धरें ॥
प्रेमा स्वरूपिणी अति सुकुमारी । श्याम प्रिय वृषभानु दुलारी ॥
नावाला किशोरी अति चाबी धामा । द्युति लघु लाग कोटि रति कामा ॥
गौरांगी शशि निंदक वदना । सुभाग चपल अनियारे नैना ॥
जावक यूथ पद पंकज चरण । नूपुर ध्वनी प्रीतम मन हारना ॥
सन्तता सहचरी सेवा करहीं । महा मोड़ मंगल मन भरहीं ॥
रसिकन जीवन प्रण अधर । राधा नाम सकल सुख सारा ॥
अगम अगोचर नित्य स्वरूप । ध्यान धरत निशिदिन ब्रजभूपा ॥
उप्जेऊ जासु अंश गुण खानी । कोटिन उमा राम ब्रह्मणि ॥
नित्य धाम गोलोक बिहारिनी । जन रक्षक दुःख दोष नासवानी ॥
शिव अज मुनि सनकादिक नारद । पार न पायं सेष अरु शरद ॥
राधा शुभ गुण रूपा उजारी । निरखि प्रसन्ना हॉट बनवारी ॥
ब्रज जीवन धन राधा रानी । महिमा अमित न जय बखानी ॥
प्रीतम संग दिए गल बाहीं । बिहारता नित वृन्दावन माहीं ॥
राधा कृष्ण कृष्ण है राधा । एक रूप दौऊ -प्रीती अगाधा ॥
श्री राधा मोहन मन हरनी । जन सुख प्रदा प्रफुल्लित बदानी ॥
कोटिक रूप धरे नन्द नंदा । दरश कारन हित गोकुल चंदा ॥
रास केलि कर तुम्हें रिझावें । मान करो जब अति दुःख पावें ॥
प्रफ्फुल्लित होठ दरश जब पावें । विविध भांति नित विनय सुनावें ॥
वृन्दरंन्य विहारिन्नी श्याम । नाम लेथ पूरण सब कम ॥
कोटिन यज्ञ तपस्या करुहू । विविध नेम व्रत हिय में धरहु ॥
तू न श्याम भक्ताही अपनावें । जब लगी नाम न राधा गावें ॥
वृंदा विपिन स्वामिनी राधा । लीला वपु तुवा अमित अगाध ॥
स्वयं कृष्ण नहीं पावहीं पारा । और तुम्हें को जननी हारा ॥
श्रीराधा रस प्रीती अभेद । सादर गान करत नित वेदा ॥
radha त्यागी कृष्ण को भाजिहैं । ते सपनेहूं जग जलधि न तरिहैं ॥
कीरति कुमारी लाडली राधा । सुमिरत सकल मिटहिं भाव बड़ा ॥
नाम अमंगल मूल नासवानी । विविध ताप हर हरी मन भवानी ॥
Radha नाम ले जो कोई । सहजही दामोदर वश होई ॥
Radha नाम परम सुखदायी । सहजहिं कृपा करें यदुराई ॥
यदुपति नंदन पीछे फिरिहैन । जो कौउ राधा नाम सुमिरिहैन ॥
रास विहारिणी श्यामा प्यारी । करुहू कृपा बरसाने वारि ॥
वृन्दावन है शरण तुम्हारी । जय जय जय व्र्शभाणु दुलारी ॥
॥ दोहा ॥
श्री राधा सर्वेश्वरी, रसिकेश्वर धनश्याम ।
करहूँ निरंतर बास मै, श्री वृन्दावन धाम ॥
॥ इति श्री राधा चालीसा ॥
श्री राधा चालीसा पाठ के लाभ
पूरी निष्ठा और अटूट विश्वास के साथ बरसाने वाली लाडली जी की चालीसा का गान करने से भक्तों को अपने जीवन में बहुत ही सुखद और चमत्कारी बदलाव देखने को मिलते हैं। राधा रानी अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से बहुत जल्दी खुश हो जाती हैं और उनकी झोली खुशियों से भर देती हैं।
यदि कोई भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ इस पवित्र चालीसा को अपनी दैनिक पूजा का हिस्सा बनाता है तो उसे निम्नलिखित मुख्य लाभ और पुण्य फल प्राप्त होते हैं:
- चालीसा में साफ बताया गया है कि जो व्यक्ति राधा नाम का सुमिरन करता है उसके पीछे स्वयं यदुपति नंदन घूमते हैं। इस पाठ को करने से भगवान कृष्ण की भक्ति और उनका आशीर्वाद बहुत ही आसानी से मिल जाता है।
- जिन लोगों के वैवाहिक जीवन में लगातार तनाव रहता है या आपसी तालमेल की कमी है उनके लिए यह पाठ एक अचूक दवा है। राधा रानी की दया से कपल्स के बीच का मनमुटाव दूर होता है और प्रेम बढ़ता है।
- जो लोग अक्सर मानसिक रूप से परेशान रहते हैं या जिन्हें बात-बात पर घबराहट होती है उन्हें इस चालीसा के पाठ से अद्भुत शांति मिलती है। यह पाठ मन के सारे विकारों को धोकर उसे एकदम निर्मल बना देता है।
- इस पावन चालीसा का नियमित पाठ करने से घर में छिपी कंगाली और दरिद्रता हमेशा के लिए खत्म हो जाती है। बिजनेस और नौकरी में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और घर में धन-धान्य की बरकत बनी रहती है।
- चालीसा की पंक्तियों के अनुसार राधा नाम लेने से संसार के सारे अमंगल दूर हो जाते हैं। जो व्यक्ति सच्चे मन से यह पाठ करता है उसके जीवन के बड़े से बड़े संकट और रुके हुए काम बहुत ही आसानी से पूरे हो जाते हैं।
श्री राधा चालीसा पाठ की सही विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी पाठ का पूरा पुण्य फल तभी मिलता है जब उसे सही नियमों और शुद्ध मन के साथ किया जाए। राधा रानी की पूजा में सादगी और सच्ची श्रद्धा का सबसे बड़ा महत्व माना गया है क्योंकि मां केवल भाव की भूखी हैं। सही तरीके से किया गया पाठ हमेशा उत्तम और शीघ्र फल देने वाला साबित होता है।
अगर आप भी अपने जीवन के दुखों को दूर करने और राधा रानी का आशीर्वाद पाने के लिए इस चालीसा का पाठ करना चाहते हैं तो इस सरल विधि का पालन करें:
- पाठ करने के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और पूरी तरह पवित्र होकर साफ कपड़े पहनें। इस पूजा में मन और तन की शुद्धता सबसे जरूरी है।
- अपने घर के मंदिर को अच्छे से साफ कर लें। एक छोटी चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर राधा-कृष्ण की एक साथ वाली तस्वीर स्थापित करें क्योंकि राधा जी की पूजा कृष्ण जी के बिना अधूरी है।
- भगवान की तस्वीर के सामने शुद्ध देसी घी का एक दीपक जलाएं और साथ में सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। राधा रानी और श्री कृष्ण को कुंकुम, अक्षत, चंदन और ताजे फूल श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
- राधा जी को मिश्री, मखाने, माखन या फिर दूध से बनी सात्विक मिठाई का भोग लगाएं। यदि संभव हो तो भोग में तुलसी दल जरूर रखें क्योंकि भगवान कृष्ण को तुलसी बेहद प्रिय है।
- अब ऊन या कुशा के आसन पर बैठ जाएं और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखें। पूरी एकाग्रता के साथ श्री राधा चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद राधा-कृष्ण की आरती करें और बरसाने वास की प्रार्थना करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पुरुष भी श्री राधा चालीसा का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, पुरुष भी अपनी आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और जीवन के कष्टों को दूर करने के लिए श्री राधा चालीसा का पाठ पूरी श्रद्धा के साथ कर सकते हैं। राधा रानी अपने सभी बच्चों पर समान रूप से कृपा बरसाती हैं।
इस चालीसा का पाठ किस दिन से शुरू करना सबसे अच्छा होता है?
इस पवित्र चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए शुक्रवार या एकादशी का दिन सबसे उत्तम माना जाता है क्योंकि ये दिन देवी पूजा और विष्णु भक्ति के लिए विशेष हैं। इसके अलावा आप अष्टमी तिथि से भी इसे शुरू कर सकते हैं।
क्या शाम के समय भी इस चालीसा का पाठ किया जा सकता है?
हाँ, अगर आपको सुबह के समय किसी कारणवश समय नहीं मिल पाता है तो आप शाम को सूर्यास्त के समय हाथ-पैर धोकर और साफ होकर मां के सामने घी का दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ बहुत ही शांत मन से कर सकते हैं।
पाठ के दौरान किस तरह के खान-पान का परहेज रखना चाहिए?
राधा रानी की साधना के दौरान सात्विकता का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है। जितने दिन भी आप माता की चालीसा का नियमपूर्वक पाठ करते हैं उतने दिन मांस, मदिरा और हर तरह के तामसिक भोजन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखना चाहिए।

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