मां दुर्गा के कई शक्तिशाली रूपों में से एक महाशक्तिशाली रूप है माता संकटा भवानी का, जिन्हें हर तरह की विपत्ति और परेशानी को जड़ से खत्म करने वाली देवी माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां संकटा की साधना करने वाले व्यक्ति के जीवन में कभी भी दुखों का साया नहीं मंडराता है। माता के इसी कृपालु और रक्षक स्वरूप को प्रसन्न करने का सबसे आसान और अचूक तरीका श्री संकटा चालीसा का पाठ माना गया है। काशी (वाराणसी) में माता संकटा का एक अत्यंत प्राचीन और सिद्ध मंदिर है जहां दर्शन मात्र से ही लोगों की किस्मत बदल जाती है।
लेकिन जो लोग वहां नहीं जा सकते, वे अगर अपने घर पर ही नियम से इस पावन चालीसा का गान करते हैं, तो उनके पूरे परिवार के चारों तरफ एक ऐसा सुरक्षा कवच बन जाता है जिसे कोई भी नकारात्मक शक्ति भेद नहीं पाती है। श्री संकटा चालीसा पाठ वास्तव में चालीस पंक्तियों की एक बेहद प्रभावशाली और अद्भुत स्तुति है, जिसमें माता संकटा भवानी के रौद्र और ममतामयी स्वरूप की सुंदर महिमा गाई गई है। इस चालीसा में वर्णन है कि कैसे मां के हाथों में खड्ग है, उनकी भृकुटी विकराल है और वे सिंह पर सवार होकर दुष्टों का संहार करती हैं।
शुम्भ-निशुम्भ और महिषासुर जैसे बड़े-बड़े राक्षसों का वध करने वाली मां संकटा अपने भक्तों के लिए बेहद दयालु हैं और उनके पुकारते ही बिना किसी देरी के सहायता के लिए दौड़ी चली आती हैं। इस पावन पाठ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके शब्द बहुत ही सरल और सीधे हैं, जिन्हें कोई भी साधारण व्यक्ति बहुत आसानी से समझ और पढ़ सकता है। जहां बहुत बड़े यज्ञ या कठिन मंत्रों के अनुष्ठान के लिए कड़े नियमों की जरूरत होती है, वहीं इस चालीसा का पाठ कोई भी भक्त अपने घर के एक शांत कोने में बैठकर कर सकता है। यह चालीसा मन के हर तरह के अनजाने डर और घबराहट को पूरी तरह खत्म कर देती है और इंसान के भीतर एक नया आत्मविश्वास भर देती है।
|| श्री संकटा चालीसा (Sankata Chalisa PDF) ||
|| दोहा ||
जगत जननि जगदम्बिके, अरज सुनहु अब मोर ।
बन्दौं पद-जुग ना सिर, विनय करौं कर जोर ।
|| चौपाई ||
जय जय जय संकटा भवानी । कृपा करहु मोपर महरानी ॥
हाथ खड्ग भृकुटी विकराला । अरुण नयन गल में रुण्डमाला ॥
कानन कुण्डल की छवि भारी । हिय हुलसे मन होत सुखारी ॥
केहरि वाहन है तव माता । कष्ट निवारो जग-जन त्राता ॥
आयुँ शरन तिहारो अम्बे । अभय करहु मोको जगदम्बे ॥
शरन आइ जो तुमहिं पुकारा । बिन बिलम्ब तुम ताहि उबारा ॥
भीर परी भक्तन पर जब-जब । किया सहाय मातु तुम तब-तब ॥
रक्तबीज दानव तुम मारे । शुम्भ-निशुम्भ के उदर बिदारे ॥
महिषासुर नृप अति बलबीरा । मारे मरै न अति रणधीरा ॥
करि सङ्ग्राम सकल सुर हारे । अस्तुति करि तब तुमहिं पुकारे ॥
प्रकटेउ कालि रूप में माता । सेन सहित तुम ताहि निपाता ॥
तेहि के बध सब देवन हरषे । नभदुन्दुभि सुमन बहु बरषे ॥
रक्षा करहु दीन जन जानी । जय जय जय जगदम्ब भवानी ॥
सब जीवन्ह की हो प्रतिपालक । जय जग-जननि दनुजकुल घालक ॥
सकल सुरन की जीवनदाता । सङ्कट हरो हमारी माता ॥
सङ्कट नाशक नाम तुम्हारा । सुयस तुम्हार सकल संसारा ॥
सुर नर नाग असुर मुनि जेते । गावत गुणगन निशिदिन तेते ॥
योगी निशिवासर तव ध्यावहिम् । तदपि तुम्हार अन्त न पावहिम् ॥
अतुल तेज मुख पर छवि सोहै । निरखि सकल सुर नर मुनि मोहै ॥
चरण-कमल में शीश झुकाऊँ । पाहि पाहि कहि नितहि मनाऊँ ॥
नेति नेति कह वेद बखाना । शक्ति-स्वरूप तुम्हार न जाना ॥
मैं मूरख किमि कहौं बखानी । नाम तुम्हार अनेक भवानी ॥
सुमिरत नाम कटै दुःख भारी । सत्य बात यह वेद उचारी ॥
नाम तुम्हार लेत जो कोई । ताको भय सङ्कट नहिं होई ॥
सङ्कट आय परै जो कबहीम् । नाम लेत बिनसत है तबहीम् ॥
प्रेम-सहित जो जपै हमेशा । ताके तन नहिं रहे कलेशा ॥
शरणागत होइ जो जन आवैम् । मनवाञ्छित फल तुरतहिं पावैम् ॥
रणचण्डी बन असुर संहारा । बन्धन काटि कियो छुटकारा ॥
नाम सकल कलि-कलुष नसावन । सुमिरत सिद्ध होय नरपावन ॥
षोडश पूजन करै जो कोई । इच्छित फल पावै नर सोई ॥
जो नारी सिन्दूर चढ़ावै । तासु सोहाग अचल होइ जावै ॥
पुत्र हेतु जो पूजा करहीम् । सन्तति-सुख निश्चय सो लहहीम् ॥
और कामना करै जो कोई । ताके घर सुख सम्पति होई ॥
निर्धन नर जो शरन में आवै । सो निश्चय धनवान कहावै ॥
रोगी रोगमुक्त होइ जावै । तव चरणन जो ध्यान लगावै ॥
सब सुख-खानि तुम्हारी पूजा । एहि सम आन उपाय न दूजा ॥
पाठ करै सङ्कटा चालीसा । तेहि पर कृपा करहिं गौरीसा ॥
पाठ करै अरु सुनै सुनावै । वाको सब सङ्कट मिटि जावै ॥
कहँ लगि महिमा कहौं तुम्हारी । हरहु वेगि मोहिं सङ्कट भारी ॥
मम कारज सब पूरन कीजै । दीन जानि मोहिं अभय करीजै ॥
|| इति सङ्कटा चालीसा समाप्ता ||
श्री संकटा चालीसा पाठ के लाभ
सच्चे दिल और पूरी निष्ठा के साथ माता संकटा भवानी की चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से भक्तों को अपने जीवन में कई तरह के चमत्कारी और सुखद लाभ महसूस होने लगते हैं। माता अपने सेवकों की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं और उनके घर को हर प्रकार की सुख-समृद्धि से भर देती हैं।
यदि कोई भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ इस पवित्र चालीसा को अपनी रोज की पूजा का हिस्सा बनाता है, तो उसे मिलने वाले मुख्य लाभ और पुण्य फल कुछ इस प्रकार हैं:
- जैसा कि नाम से ही साफ है, माता संकटा हर तरह के संकट को टालने वाली हैं। इस चालीसा का पाठ करने से जमीन-जायदाद के पुराने विवाद, कोर्ट-कचहरी के मुकदमे और शत्रुओं की साजिशें पूरी तरह नाकाम हो जाती हैं और परिस्थितियां आपके पक्ष में आने लगती हैं।
- चालीसा की पंक्तियों के अनुसार जो भी शादीशुदा महिला माता को सिंदूर चढ़ाकर यह पाठ करती है, उसका सुहाग हमेशा के लिए अमर और अचल हो जाता है। इसके साथ ही जो संतानहीन दंपति इस पाठ को नियम से करते हैं, उन्हें गुणवान संतान का सुख बहुत जल्दी प्राप्त होता है।
- जो लोग अक्सर अस्वस्थ रहते हैं या किसी गंभीर शारीरिक कष्ट से जूझ रहे हैं, उन्हें इस पाठ से अद्भुत लाभ मिलता है। जाहरवीर बाबा की तरह ही मां संकटा की कृपा से शरीर के सारे पुराने रोग और मानसिक तनाव धीरे-धीरे पूरी तरह दूर होने लगते हैं।
- इस पाठ के नियमित गान से घर में छिपी कंगाली और आर्थिक तंगी हमेशा के लिए खत्म हो जाती है। जो निर्धन व्यक्ति मां की शरण में आता है, वह बहुत जल्दी धनवान और सुखी बन जाता है क्योंकि बिजनेस और नौकरी में आ रही सारी रुकावटें दूर हो जाती हैं।
- जो भक्त प्रेम सहित हमेशा इस चालीसा का जाप करता है, उसके शरीर और मन के सारे क्लेश मिट जाते हैं। माता की कृपा से उसे इस संसार के सभी सुख तो मिलते ही हैं, साथ ही अंत में परमपद की प्राप्ति भी होती है।
श्री संकटा चालीसा पाठ की सही विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी पूजा या पाठ का पूरा पुण्य फल तभी प्राप्त होता है जब उसे सही नियमों, सही दिशा और शुद्ध भाव के साथ किया जाए। माता संकटा भवानी की पूजा में सादगी, पवित्रता और अटूट विश्वास का सबसे बड़ा महत्व बताया गया है। सही तरीके से किया गया यह पाठ हमेशा बहुत जल्दी और उत्तम फल देने वाला साबित होता है।
अगर आप भी अपने जीवन के कष्टों को दूर करने और माता संकटा का आशीर्वाद पाने के लिए इस चालीसा का पाठ शुरू करना चाहते हैं, तो इस बेहद आसान और सही विधि का पालन करें:
- पाठ करने के लिए सुबह का समय सबसे बढ़िया माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इस पूजा में साधक का पूरी तरह साफ-सुथरे कपड़े पहनना जरूरी है, यदि संभव हो तो लाल या पीले रंग के कपड़े पहनें जो माता को प्रिय हैं।
- अपने घर के मंदिर या किसी पवित्र स्थान को अच्छे से साफ कर लें। एक छोटी चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर माता संकटा या मां दुर्गा की तस्वीर स्थापित करें।
- माता की प्रतिमा के सामने शुद्ध देसी घी का एक दीपक जलाएं और साथ में सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। माता को रोली, अक्षत, कुंकुम और साफ जल अर्पित करें। सुहागिन महिलाएं माता को सिंदूर जरूर चढ़ाएं।
- पूजा के दौरान माता संकटा को मिश्री, मखाने, खीर या फिर मौसमी फलों का सात्विक भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद माता से अपने परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
- अब कुशा या ऊन के एक साफ आसन पर बैठ जाएं और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखें। पूरी एकाग्रता और साफ उच्चारण के साथ श्री संकटा चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद माता की आरती करें और उनसे आशीर्वाद मांगें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पुरुष भी माता संकटा चालीसा का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, पुरुष भी अपने जीवन के संकटों, नौकरी की परेशानियों और कर्ज से मुक्ति पाने के लिए माता संकटा चालीसा का पाठ पूरी श्रद्धा के साथ कर सकते हैं। माता अपने सभी बच्चों पर समान रूप से कृपा बरसाती हैं।
संकटा चालीसा का पाठ किस दिन से शुरू करना सबसे अच्छा माना जाता है?
इस पवित्र चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए शुक्रवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है क्योंकि यह दिन देवी मां की पूजा के लिए विशेष है। इसके अलावा आप नवरात्रि के पावन दिनों से भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं।
क्या इस पाठ को करते समय खान-पान का कोई परहेज रखना पड़ता है?
हाँ, माता की साधना के दौरान सात्विकता का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है। जितने दिन भी आप माता की चालीसा का नियमपूर्वक पाठ करते हैं, उतने दिन मांस, मदिरा, तामसिक भोजन जैसे प्याज और लहसुन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखना चाहिए।
क्या शाम के समय भी इस चालीसा का पाठ किया जा सकता है?
हाँ, अगर आपको सुबह के समय किसी वजह से फुर्सत नहीं मिल पाती है, तो आप शाम को सूर्यास्त के समय हाथ-पैर धोकर, साफ होकर माता के सामने घी का दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ बहुत ही शांत मन से कर सकते हैं।

0 Comments