आज की इस तनावभरी जिंदगी में हर कोई मानसिक सुख और संतुष्टि की तलाश में भटक रहा है। ऐसे में हफ्ते में सिर्फ एक दिन यानी शुक्रवार को थोड़ा सा समय निकालकर माता की चालीसा पढ़ना जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। इस पाठ की सबसे अच्छी बात यह है कि यह बेहद सरल है और इसके लिए बहुत महंगी पूजा सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस पवित्र चालीसा का पाठ करने से हमारे जीवन में क्या बदलाव आते हैं और इसकी सही पूजा विधि क्या है।
|| संतोषी माता चालीसा (Santoshi Mata Chalisa PDF) ||
॥ दोहा ॥
श्री गणपति पद नाय सिर, धरि हिय शारदा ध्यान |
संतोषी मां की करुँ, कीर्ति सकल बखान॥
॥ चौपाई ॥
जय संतोषी मां जग जननी, खल मति दुष्ट दैत्य दल हननी।
गणपति देव तुम्हारे ताता, रिद्धि सिद्धि कहलावहं माता॥
माता पिता की रहौ दुलारी, किर्ति केहि विधि कहुं तुम्हारी।
क्रिट मुकुट सिर अनुपम भारी, कानन कुण्डल को छवि न्यारी॥
सोहत अंग छटा छवि प्यारी सुंदर चीर सुनहरी धारी।
आप चतुर्भुज सुघड़ विशाल, धारण करहु गए वन माला॥
निकट है गौ अमित दुलारी, करहु मयुर आप असवारी।
जानत सबही आप प्रभुताई, सुर नर मुनि सब करहि बड़ाई॥
तुम्हरे दरश करत क्षण माई, दुख दरिद्र सब जाय नसाई।
वेद पुराण रहे यश गाई, करहु भक्ता की आप सहाई॥
ब्रह्मा संग सरस्वती कहाई, लक्ष्मी रूप विष्णु संग आई।
शिव संग गिरजा रूप विराजी, महिमा तीनों लोक में गाजी॥
शक्ति रूप प्रगती जन जानी, रुद्र रूप भई मात भवानी।
दुष्टदलन हित प्रगटी काली, जगमग ज्योति प्रचंड निराली॥
चण्ड मुण्ड महिषासुर मारे, शुम्भ निशुम्भ असुर हनि डारे।
महिमा वेद पुरनन बरनी, निज भक्तन के संकट हरनी ॥
रूप शारदा हंस मोहिनी, निरंकार साकार दाहिनी।
प्रगटाई चहुंदिश निज माय, कण कण में है तेज समाया॥
पृथ्वी सुर्य चंद्र अरु तारे, तव इंगित क्रम बद्ध हैं सारे।
पालन पोषण तुमहीं करता, क्षण भंगुर में प्राण हरता॥
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावैं, शेष महेश सदा मन लावे।
मनोकमना पूरण करनी, पाप काटनी भव भय तरनी॥
चित्त लगय तुम्हें जो ध्यात, सो नर सुख सम्पत्ति है पाता।
बंध्या नारि तुमहिं जो ध्यावैं, पुत्र पुष्प लता सम वह पावैं॥
पति वियोगी अति व्याकुलनारी, तुम वियोग अति व्याकुलयारी।
कन्या जो कोइ तुमको ध्यावै, अपना मन वांछित वर पावै॥
शीलवान गुणवान हो मैया, अपने जन की नाव खिवैया।
विधि पुर्वक व्रत जो कोइ करहीं, ताहि अमित सुख संपत्ति भरहीं॥
गुड़ और चना भोग तोहि भावै, सेवा करै सो आनंद पावै ।
श्रद्धा युक्त ध्यान जो धरहीं, सो नर निश्चय भव सों तरहीं॥
उद्यापन जो करहि तुम्हार, ताको सहज करहु निस्तारा।
nari सुहगन व्रत जो करती, सुख सम्पत्ति सों गोदी भरती॥
जो सुमिरत जैसी मन भावा, सो नर वैसों ही फल पावा।
सात शुक्र जो व्रत मन धारे, ताके पूर्ण मनोरथ सारे॥
सेवा करहि भक्ति युक्त जोई, ताको दूर दरिद्र दुख होई।
जो जन शरण माता तेरी आवै, ताके क्षण में काज बनावै॥
जय जय जय अम्बे कल्यानी. कृपा करौ मोरी महारानी।
जो कोइ पढै मात चालीस, तापै करहीं कृपा जगदीशा॥
नित प्रति पाठ करै इक बार, सो नर रहै तुम्हारा प्य्रारा ।
नाम लेत बाधा सब भागे, रोग द्वेष कबहूँ ना लागे॥
॥ दोहा ॥
संतोषी माँ के सदा बंदहूँ पग निश वास
पूर्ण मनोरथ हो सकल मात हरौ भव त्रास॥
श्री संतोषी माता चालीसा पाठ के लाभ
सच्चे मन से माता संतोषी की चालीसा का नियमित या हर शुक्रवार को पाठ करने से भक्तों को अदभुत और चमत्कारी फायदे मिलते हैं। माता अपने बच्चों की पुकार बहुत जल्दी सुनती हैं और उनकी श्रद्धा के अनुसार उन्हें मनचाहा फल प्रदान करती हैं।
यदि कोई भक्त पूरे विश्वास के साथ इस पावन चालीसा का पाठ करता है, तो उसे जीवन में निम्नलिखित मुख्य लाभ प्राप्त होते हैं:
- आज के समय में सुख-सुविधाएं होने के बावजूद लोग अंदर से अशांत रहते हैं। इस चालीसा का पाठ करने से मन की चंचलता खत्म होती है और इंसान को एक गहरा मानसिक संतोष मिलता है जिससे डिप्रेशन जैसी समस्याएं दूर रहती हैं।
- अगर आपके घर में पैसा नहीं टिकता या आप लगातार कर्ज की समस्या से जूझ रहे हैं, तो माता संतोषी की कृपा से धन के नए मार्ग खुलते हैं। घर में सुख-समृद्धि आती है और दरिद्रता हमेशा के लिए दूर भाग जाती है।
- जिन कन्याओं के विवाह में लगातार रुकावटें आ रही हैं या मनपसंद जीवनसाथी मिलने में दिक्कत हो रही है, उनके लिए यह पाठ बहुत लाभकारी है। इसके प्रभाव से जल्द ही योग्य और गुणवान वर की प्राप्ति होती है।
- निसंतान दंपत्तियों के लिए माता संतोषी की आराधना जीवन में खुशियां लेकर आती है। इसके साथ ही परिवार के सदस्यों के बीच चल रहे पुराने आपसी मनमुटाव और झगड़े पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं और घर में प्यार बढ़ता है।
- जीवन के सफर में आने वाली तमाम अनजानी अड़चनें और गंभीर बीमारियां इस चालीसा की शक्ति से दूर होने लगती हैं। माता अपने शरणागत भक्त की चारों तरफ से रक्षा करती हैं और उसके बिगड़े काम बना देती हैं।
श्री संतोषी माता चालीसा पाठ की सही विधि
किसी भी देवी-देवता की पूजा का पूरा फल तभी प्राप्त होता है जब उसे सही नियमों और शुद्ध भाव के साथ किया जाए। माता संतोषी की पूजा में शुद्धता और सात्विकता का बहुत बड़ा महत्व है। विशेष रूप से शुक्रवार के दिन की जाने वाली इस पूजा में खट्टी चीजों से पूरी तरह दूर रहना अनिवार्य माना गया है।
अगर आप भी शुक्रवार का व्रत रख रहे हैं या माता की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो इस बेहद सरल और प्रामाणिक विधि से चालीसा का पाठ करें:
- शुक्रवार के दिन सूर्योदय से पहले उठें और घर की साफ-सफाई करने के बाद स्नान करें। इस दिन साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें और मन में माता के प्रति श्रद्धा का भाव रखें।
- अपने पूजा घर में एक छोटी चौकी स्थापित करें और उस पर साफ लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। चौकी पर माता संतोषी की तस्वीर या मूर्ति रखें। साथ में एक कलश में शुद्ध जल भरकर रखें।
- माता संतोषी को गुड़ और भुने हुए चने का भोग सबसे ज्यादा प्रिय है। एक साफ पात्र में गुड़ और चना रखें। ध्यान रहे कि इस प्रसाद में या पूजा के आसपास भूलकर भी कोई खट्टी चीज या खट्टा फल नहीं होना चाहिए।
- माता के सामने शुद्ध घी का एक दीपक जलाएं और सुगंधित धूपबत्ती सुलगाएं। इसके बाद आसन पर बैठकर पूरी एकाग्रता के साथ श्री संतोषी माता चालीसा का पाठ करें। पाठ के दौरान अपना पूरा ध्यान माता के चरणों में रखें।
- चालीसा समाप्त होने के बाद माता की आरती गाएं और उन्हें भोग लगाएं। पूजा पूरी होने के बाद कलश के पवित्र जल को पूरे घर में छिड़क दें और बचा हुआ जल तुलसी के पौधे में डाल दें। खुद भी गुड़-चने का प्रसाद खाएं और परिवार में बांटें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या संतोषी माता की पूजा में खट्टा खाना पूरी तरह मना होता है?
हाँ, माता संतोषी के व्रत और पूजा के नियमों में खट्टी चीजें खाना और छूना पूरी तरह मना है। जिस दिन आप पाठ या व्रत करें, उस दिन आपके घर में भी सिरका, नींबू, इमली या दही जैसी खट्टी चीजें नहीं आनी चाहिए और न ही परिवार का कोई सदस्य इन्हें खाए।
संतोषी माता की चालीसा का पाठ कितने शुक्रवार करना चाहिए?
यदि आप किसी विशेष मनोकामना के लिए व्रत रख रहे हैं, तो कम से कम 16 शुक्रवार तक नियमित रूप से व्रत रखकर चालीसा का पाठ करना चाहिए। इसके बाद विधि-विधान से अध्यापन या उद्यापन करना जरूरी होता है।
क्या पुरुष भी श्री संतोषी माता चालीसा का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, पुरुष भी अपनी सुख-समृद्धि, नौकरी में तरक्की और मानसिक शांति के लिए माता संतोषी का व्रत रख सकते हैं और चालीसा का पाठ कर सकते हैं। माता की भक्ति में स्त्री या पुरुष का कोई भेद नहीं होता।
यदि भूल से व्रत के दिन कुछ खट्टा खा लिया जाए तो क्या करें?
अगर अनजाने में या भूलवश व्रत के दिन कुछ खट्टा खा लिया जाए, तो माता से हाथ जोड़कर अपनी भूल के लिए क्षमा मांगें और अगले शुक्रवार को फिर से पूरी सावधानी के साथ व्रत और पाठ की शुरुआत करें।

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