हिंदू धर्म में माता सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि, संगीत और कला की देवी माना जाता है। बसंत पंचमी हो या कोई भी सामान्य दिन, मां सरस्वती की पूजा करने से इंसान के जीवन का अंधकार दूर होता है। उनकी कृपा पाने का सबसे सरल और असरदार माध्यम श्री सरस्वती चालीसा का पाठ है। इस पवित्र पाठ को करने से छात्र-छात्राओं को पढ़ाई में मन लगाने और जीवन में सही फैसले लेने की अद्भुत शक्ति मिलती है। आजकल के इस कंपटीशन वाले दौर में हर कोई अपने बच्चों के बेहतर भविष्य और करियर के लिए परेशान रहता है। ऐसे में हर रोज या हर गुरुवार और शनिवार को मां सरस्वती की चालीसा पढ़ना एक बेहतरीन उपाय साबित हो सकता है।
यह स्तुति इतनी आसान है कि इसे घर के छोटे बच्चे भी बहुत प्यार से सीख सकते हैं। आइए जानते हैं कि इस चालीसा का पाठ करने से जीवन में क्या-क्या बदलाव आते हैं और इसकी सबसे आसान पूजा विधि क्या है। श्री सरस्वती चालीसा पाठ वास्तव में चालीस पंक्तियों की एक बहुत ही सुंदर और सरल प्रार्थना है जिसमें माता के हंसवाहिनी स्वरूप, उनकी वीणा और ज्ञान की महिमा का गान किया गया है। इस चालीसा में बताया गया है कि कैसे माता की छोटी सी कृपा दृष्टि पड़ने से बड़े-बड़े विद्वान, कवि और ज्ञानी लोग इतिहास में अमर हो गए।
इसके सीधे-साधे शब्द इंसान के दिमाग को शांत करते हैं और उसमें सकारात्मक विचार पैदा करते हैं। चाहे कोई छोटा बच्चा अपनी पढ़ाई की शुरुआत कर रहा हो या कोई बड़ा व्यक्ति कला और संगीत के क्षेत्र में नाम कमाना चाहता हो, यह पाठ सबके लिए फायदेमंद है। इसमें किसी कठिन मंत्र साधना की तरह बहुत ज्यादा जटिल नियम नहीं होते हैं, इसलिए इसे कोई भी आम इंसान अपने घर के मंदिर में बैठकर आसानी से पढ़ सकता है। यह पाठ हमारी सोई हुई बुद्धि को जगाने का एक बहुत ही पवित्र माध्यम है।
|| श्री सरस्वती चालीसा पाठ (Saraswati Chalisa PDF) ||
॥ दोहा ॥
जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि ।
बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि ॥
पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु।
दुष्जनों के पाप को, मातु तु ही अब हन्तु ॥
॥ चालीसा ॥
जय श्री सकल बुद्धि बलरासी । जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी ॥
जय जय जय वीणाकर धारी । करती सदा सुहंस सवारी ॥
रूप चतुर्भुज धारी माता । सकल विश्व अन्दर विख्याता ॥
जग में पाप बुद्धि जब होती । तब ही धर्म की फीकी ज्योति ॥
तब ही मातु का निज अवतारी । पाप हीन करती महतारी ॥
वाल्मीकिजी थे हत्यारा । तव प्रसाद जानै संसारा ॥
रामचरित जो रचे बनाई । आदि कवि की पदवी पाई ॥
कालिदास जो भये विख्याता । तेरी कृपा दृष्टि से माता ॥
तुलसी सूर आदि विद्वाना । भये और जो ज्ञानी नाना ॥
तिन्ह न और रहेउ अवलम्बा । केव कृपा आपकी अम्बा ॥
करहु कृपा सोइ मातु भवानी । दुखित दीन निज दासहि जानी ॥
पुत्र करहिं अपराध बहूता । तेहि न धरई चित माता ॥
राखु लाज जननि अब मेरी । विनय करउं भांति बहु तेरी ॥
मैं अनाथ तेरी अवलंबा । कृपा करउ जय जय जगदंबा ॥
मधुकैटभ जो अति बलवाना । बाहुयुद्ध विष्णु से ठाना ॥
समर हजार पाँच में घोरा । फिर भी मुख उनसे नहीं मोरा ॥
मातु सहाय कीन्ह तेहि काला । बुद्धि विपरीत भई खलहाला ॥
तेहि ते मृत्यु भई खल केरी । पुरवहु मातु मनोरथ मेरी ॥
चंड मुण्ड जो थे विख्याता । क्षण महु संहारे उन माता ॥
रक्त बीज से समरथ पापी । सुरमुनि हदय धरा सब काँपी ॥
काटेउ सिर जिमि कदली खम्बा । बारबार बिन वउं जगदंबा ॥
जगप्रसिद्ध जो शुंभनिशंभा । क्षण में बाँधे ताहि तू अम्बा ॥
भरतमातु बुद्धि फेरेऊ जाई । रामचन्द्र बनवास कराई ॥
एहिविधि रावण वध तू कीन्हा । सुर नरमुनि सबको सुख दीन्हा ॥
को समरथ तव यश गुन गाना । निगम अनादि अनंत बखाना ॥
विष्णु रुद्र जस कहिन मारी । जिनकी हो तुम रक्षाकारी ॥
रक्त दन्तिका और शताक्षी । नाम अपार है दानव भक्षी ॥
दुर्गम काज धरा पर कीन्हा । दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा ॥
कूप आदि हरनी तू माता । कृपा करहु जब जब सुखदाता ॥
नृप कोपित को मारन चाहे । कानन में घेरे मृग नाहे ॥
सागर मध्य पोत के भंजे । अति तूफान नहिं कोऊ संगे ॥
भूत प्रेत बाधा या दुःख में । हो दरिद्र अथवा संकट में ॥
नाम जपे मंगल सब होई । संशय इसमें करई न कोई ॥
पुत्रहीन जो आतुर भाई । सबै छांड़ि पूजें एहि भाई ॥
करै पाठ नित यह चालीसा । होय पुत्र सुन्दर गुण ईशा ॥
धूपादिक नैवेद्य चढ़ावै । संकट रहित अवश्य हो जावै ॥
भक्ति मातु की करैं हमेशा । निकट न आवै ताहि कलेशा ॥
बंदी पाठ करें सत बारा । बंदी पाश दूर हो सारा ॥
रामसागर बाँधि हेतु भवानी । कीजै कृपा दास निज जानी ॥
॥ दोहा ॥
मातु सूर्य कान्ति तव, अन्धकार मम रूप ।
डूबन से रक्षा करहु, परूँ न मैं भव कूप ॥
बलबुद्धि विद्या देहु मोहि, सुनहु सरस्वती मातु ।
राम सागर अधम को, आश्रय तू ही देदातु ॥
श्री सरस्वती चालीसा पाठ के लाभ
नियमित रूप से या हर सुबह शांत मन से मां सरस्वती की इस चालीसा का जाप करने से साधक को अपने मानसिक और बौद्धिक जीवन में बहुत बड़े बदलाव महसूस होते हैं। जो लोग पूरे दिल से मां के चरणों में ध्यान लगाते हैं, उनके सोचने-समझने की शक्ति बहुत मजबूत हो जाती है।
यदि कोई विद्यार्थी या आम इंसान इस चालीसा को अपनी रोज की दिनचर्या का हिस्सा बनाता है, तो उसे मिलने वाले मुख्य फायदे कुछ इस प्रकार हैं:
- जिन बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता या जो पढ़ा हुआ बहुत जल्दी भूल जाते हैं, उनके लिए यह पाठ किसी वरदान से कम नहीं है। इसके नियमित जाप से फोकस करने की क्षमता बढ़ती है और कठिन से कठिन विषय भी आसानी से समझ आने लगते हैं।
- माता सरस्वती को वाणी की देवी भी कहा जाता है। इस चालीसा का पाठ करने से इंसान की जुबान में एक खास तरह का जादू आ जाता है, जिससे उसकी बातें लोगों को प्रभावित करने लगती हैं और इंटरव्यू या भाषण में सफलता मिलती है।
- परीक्षा के दिनों में या करियर को लेकर युवाओं के दिमाग में जो डर और कंफ्यूजन रहता है, वह इस पाठ के असर से पूरी तरह खत्म हो जाता है। मन एकदम शांत रहता है और सही समय पर सही फैसला लेने की समझ आती है।
- अगर आप राइटिंग, सिंगिंग, पेंटिंग या किसी भी क्रिएटिव फील्ड से जुड़े हैं, तो यह चालीसा आपकी कल्पना शक्ति को बहुत ऊंचा ले जाती है। मां की कृपा से नए-नए आइडियाज दिमाग में आने लगते हैं।
- इस दिव्य पाठ के प्रभाव से इंसान का दिमाग भटकता नहीं है और वह गलत आदतों व नकारात्मक विचारों से दूर रहता है। उसके भीतर अच्छे संस्कार और धार्मिक भावनाएं अपने आप बढ़ने लगती हैं।
श्री सरस्वती चालीसा पाठ की सही विधि
किसी भी देवी-देवता की पूजा का पूरा पुण्य तभी मिलता है जब उसे सही तरीके और साफ-सुथरे माहौल में किया जाए। माता सरस्वती की पूजा में पीले और सफेद रंग का बहुत बड़ा महत्व माना गया है क्योंकि ये दोनों रंग पवित्रता और सादगी के प्रतीक हैं। सही नियम से किया गया पाठ हमेशा बहुत जल्दी शुभ फल देता है।
अगर आप भी अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए या अपनी खुद की मानसिक प्रगति के लिए मां सरस्वती की चालीसा का पाठ करना चाहते हैं, तो इस सरल विधि का पालन करें:
- पाठ करने के लिए सुबह का समय सबसे बढ़िया माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे पीले या सफेद रंग के कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा के स्थान को अच्छे से साफ कर लें।
- अपने घर के मंदिर में माता सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। चूंकि वे ज्ञान की देवी हैं, इसलिए उनकी तस्वीर के पास अपनी किताबें, पेन या संगीत के वाद्य यंत्र जैसे गिटार या हारमोनियम जरूर रखें।
- माता को पीले या सफेद रंग के फूल बहुत पसंद होते हैं। उन्हें अक्षत, सफेद चंदन और फूल चढ़ाएं। इसके बाद उनके सामने गाय के शुद्ध घी का एक दीपक जलाएं और सुगंधित अगरबत्ती भी सुलगाएं।
- पूजा के दौरान मां सरस्वती को बूंदी के लड्डू, मिश्री या पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं। यदि संभव हो तो भोग में तुलसी का पत्ता भी रख सकते हैं।
- अब एक साफ आसन पर बैठ जाएं और अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखें। पूरी एकाग्रता के साथ श्री सरस्वती चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद मां की आरती करें और अपनी बुद्धि को तेज करने की प्रार्थना करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या छोटे बच्चे भी मां सरस्वती की चालीसा का पाठ खुद कर सकते हैं?
हाँ, जो बच्चे खुद पढ़ सकते हैं उन्हें रोज सुबह इस चालीसा का पाठ खुद करना चाहिए। इससे उनका आत्मविश्वास बहुत बढ़ता है। जो बच्चे बहुत छोटे हैं, उनके माता-पिता उनके पास बैठकर इस पाठ को जोर से पढ़ सकते हैं ताकि बच्चा उसे सुन सके।
सरस्वती चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए कौन सा दिन सबसे अच्छा है?
इस चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए गुरुवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है क्योंकि यह दिन गुरु और विद्या से जुड़ा है। इसके अलावा बसंत पंचमी के पावन अवसर से भी इसकी शुरुआत करना बेहद फलदायी होता है।
क्या शाम के समय भी यह पाठ किया जा सकता है?
हाँ, अगर आपको सुबह किसी वजह से समय नहीं मिल पाता है, तो आप शाम को हाथ-पैर धोकर और साफ होकर मां के सामने घी का दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ बहुत आराम से कर सकते हैं।
पाठ के दौरान किस तरह की सावधानियां रखनी चाहिए?
पाठ करते समय आपका ध्यान इधर-उधर नहीं भटकना चाहिए। इसके अलावा सबसे जरूरी बात यह है कि अपनी पढ़ाई-लिखाई की चीजों और किताबों का हमेशा सम्मान करें, उन्हें कभी भी जमीन पर न छोड़ें और न ही उन पर पैर लगने दें।

0 Comments