श्री शनिदेव चालीसा पाठ (Shanidev Chalisa Hindi PDF)

श्री शनिदेव चालीसा 40 पंक्तियों की एक बहुत ही सुंदर और सरल प्रार्थना है। इसमें शनिदेव के रूप, उनके स्वभाव, उनके अलग-अलग नामों और उनकी शक्तियों का पूरा वर्णन किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस चालीसा की रचना महान संत रामसुन्दर दास जी ने की थी। जब कोई इंसान इस चालीसा की चौपाइयों को पढ़ता है, तो उसका मन शांत होता है और उसके आसपास की नकारात्मक ऊर्जा पूरी तरह समाप्त हो जाती है। ज्योतिष शास्त्र में ऐसा माना जाता है कि कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान इसका नियमित पाठ करने से बहुत बड़ी राहत मिलती है।

भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में नौ ग्रहों का बहुत खास स्थान माना गया है। इन सभी नौ ग्रहों में से सूर्य पुत्र शनिदेव को न्याय का देवता यानी न्यायपति कहा जाता है। आम जनता के बीच अक्सर शनिदेव के नाम को लेकर थोड़ा डर रहता है, लेकिन असल में वह सिर्फ हमारे कर्मों का हिसाब रखते हैं। जब कोई व्यक्ति सच्चे दिल से उनकी पूजा करता है, तो शनि महाराज उसके जीवन के सारे कष्ट पल भर में दूर कर देते हैं।

शनिदेव को प्रसन्न करने और उनकी बुरी नजर से बचने का सबसे आसान और असरदार तरीका श्री शनिदेव चालीसा पाठ है। यदि आपके जीवन में परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं या फिर बनते हुए काम अचानक बिगड़ जाते हैं, तो यह पाठ आपके लिए एक वरदान साबित हो सकता है। आज के इस विशेष लेख में हम बात करेंगे कि इस पवित्र पाठ को करने का सही तरीका क्या है और इससे आपको क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं।



|| श्री शनिदेव चालीसा पाठ (Shanidev Chalisa Hindi PDF) ||

॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

॥ चौपाई ॥

जयति जयति शनिदेव दयाला ।
करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै ।
माथे रतन मुकुट छबि छाजै ॥

परम विशाल मनोहर भाला ।
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके ।
हिय माल मुक्तन मणि दमके ॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा ।
पल बिच करैं अरिहिं संहारा ॥

पिंगल, कृष्णों, छाया नन्दन ।
यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन ॥

सौरी, मन्द, शनी, दश नामा ।
भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥

जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं ।
रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं ॥

पर्वतहू तृण होई निहारत ।
तृणहू को पर्वत करि डारत ॥

राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो ।
कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो ॥

बनहूँ में मृग कपट दिखाई ।
मातु जानकी गई चुराई ॥

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा ।
मचिगा दल में हाहाकारा ॥

रावण की गतिमति बौराई ।
रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई ॥

दियो कीट करि कंचन लंका ।
बजि बजरंग बीर की डंका ॥

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा ।
चित्र मयूर निगलि गै हारा ॥

हार नौलखा लाग्यो चोरी ।
हाथ पैर डरवाय तोरी ॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो ।
तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो ॥

विनय राग दीपक महं कीन्हयों ।
तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों ॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी ।
आपहुं भरे डोम घर पानी ॥

तैसे नल पर दशा सिरानी ।
भूंजीमीन कूद गई पानी ॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई ।
पारवती को सती कराई ॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा ।
नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा ॥

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी ।
बची द्रौपदी होति उघारी ॥

कौरव के भी गति मति मारयो ।
युद्ध महाभारत करि डारयो ॥

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला ।
लेकर कूदि परयो पाताला ॥

शेष देवलखि विनती लाई ।
रवि को मुख ते दियो छुड़ाई ॥

वाहन प्रभु के सात सजाना ।
जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना ॥

जम्बुक सिंह आदि नख धारी ।
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी ॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं ।
हय ते सुख सम्पति उपजावैं ॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा ।
सिंह सिद्धकर राज समाजा ॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै ।
मृग दे कष्ट प्राण संहारै ॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी ।
चोरी आदि होय डर भारी ॥

तैसहि चारि चरण यह नामा ।
स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा ॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं ।
धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं ॥

समता ताम्र रजत शुभकारी ।
स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी ॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै ।
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला ।
करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई ।
विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत ।
दीप दान दै बहु सुख पावत ॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा ।
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ॥

॥ दोहा ॥

पाठ शनिश्चर देव को, की हों भक्त तैयार ।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार ॥

श्री शनिदेव चालीसा पाठ की सही विधि

किसी भी मंत्र या चालीसा का पूरा फल तभी मिलता है जब उसे सही नियम और सच्ची श्रद्धा के साथ किया जाए। शनिदेव की पूजा में शुद्धता और अनुशासन का बहुत बड़ा महत्व होता है। गलत तरीके से की गई पूजा से मनचाहा लाभ नहीं मिल पाता है, इसलिए पाठ शुरू करने से पहले इसकी पूरी प्रक्रिया को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।

अगर आप अपने घर पर या किसी मंदिर में शनि चालीसा का पाठ करना चाहते हैं, तो इसके लिए एक बेहद आसान और प्रामाणिक तरीका नीचे बताया गया है। इस विधि का पालन करके आप शनि महाराज की असीम कृपा बहुत जल्दी प्राप्त कर सकते हैं:

  • इस चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए शनिवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। समय की बात करें तो शनिवार को शाम के समय यानी सूर्यास्त के बाद का वक्त सबसे बढ़िया होता है क्योंकि इस समय शनिदेव की शक्तियां जागृत होती हैं।
  • पाठ करने से पहले स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहन लें। इस दिन नीले या काले रंग के कपड़े पहनना बहुत शुभ माना जाता है। पूजा के लिए हमेशा कुश या ऊन के आसन का इस्तेमाल करें और आपका मुख पश्चिम दिशा की तरफ होना चाहिए।
  • अपने सामने शनिदेव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उनके सामने सरसों के तेल का एक बड़ा दीपक जलाएं। ध्यान रखें कि दीपक में काले तिल जरूर डालें। इसके बाद शनिदेव को नीले फूल, उड़द की दाल या काले चने का भोग अर्पित करें।
  • चालीसा शुरू करने से पहले भगवान गणेश और अपने गुरु का ध्यान करें। इसके बाद शांत मन से श्री शनिदेव चालीसा का पाठ करें। यदि आप जीवन में किसी बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं, तो लगातार 40 दिनों तक रोज तीन बार इसका पाठ करने का संकल्प ले सकते हैं।

श्री शनिदेव चालीसा पाठ के लाभ

शनि चालीसा का नियमित पाठ करने से इंसान के जीवन में कई तरह के सकारात्मक बदलाव आते हैं। यह सिर्फ एक धार्मिक पाठ नहीं है, बल्कि यह हमारे मन को मजबूत बनाने और जीवन की बाधाओं को दूर करने का एक बेहतरीन जरिया है। जो लोग हर शनिवार को पूरी श्रद्धा के साथ इस चालीसा को दोहराते हैं, उन्हें मानसिक शांति के साथ-साथ भौतिक सुखों की भी प्राप्ति होती है।

इस चमत्कारी पाठ को करने से मुख्य रूप से निम्नलिखित बड़े फायदे देखने को मिलते हैं:

  • सबसे पहला लाभ यह है कि इससे कुंडली के दोष शांत होते हैं। ज्योतिष के अनुसार यदि किसी व्यक्ति पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रही हो, तो इस पाठ को करने से मिलने वाले कष्ट बहुत कम हो जाते हैं। 
  • दूसरा बड़ा फायदा मानसिक तनाव से मुक्ति का है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर डिप्रेशन और घबराहट का शिकार हो जाते हैं, लेकिन इस चालीसा की ध्वनियां मन को एक अजीब सा सुकून देती हैं और आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं। 
  • तीसरा लाभ यह है कि इससे आपके रुके हुए काम फिर से शुरू हो जाते हैं। व्यापार में घाटा हो रहा हो या नौकरी में तरक्की रुकी हो, शनिदेव की कृपा से सारे रास्ते खुल जाते हैं। 
  • इसके अलावा यह पाठ घर के कलह-क्लेश को दूर करके सुख-समृद्धि लाता है और दुर्घटनाओं से इंसान की रक्षा करता है।

श्री शनिदेव चालीसा पाठ से जुड़े कुछ जरूरी सवाल

क्या महिलाएं शनि चालीसा का पाठ कर सकती हैं

हाँ, महिलाएं बिल्कुल शनि चालीसा का पाठ कर सकती हैं। शास्त्रों में महिलाओं को शनिदेव की मूर्ति को छूने या उस पर सीधे तेल चढ़ाने की मनाही की गई है, लेकिन दूर बैठकर चालीसा का पाठ करने या मंत्रों का जाप करने पर कोई रोक नहीं है। महिलाएं पूरी पवित्रता के साथ घर पर रहकर यह पाठ आसानी से कर सकती हैं।

शनि चालीसा का पाठ किस दिशा में मुंह करके करना चाहिए

शनिदेव को पश्चिम दिशा का स्वामी माना गया है। इसलिए जब भी आप श्री शनिदेव चालीसा का पाठ करें, तो आपका मुख हमेशा पश्चिम दिशा की तरफ होना चाहिए। इस दिशा में बैठकर पाठ करने से पूजा का फल बहुत जल्दी और पूरा मिलता है।

पाठ के दौरान किन बातों का विशेष परहेज करना चाहिए

शनिदेव को अनुशासन और न्याय पसंद है। इसलिए जो लोग शनि चालीसा का पाठ करते हैं, उन्हें शनिवार के दिन भूलकर भी मांस, मदिरा या किसी भी नशीली चीज का सेहतमंद आदतों के विरुद्ध सेवन नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही इस दिन किसी गरीब, असहाय व्यक्ति या बेजुबान जानवर को सताना नहीं चाहिए, नहीं तो शनि महाराज नाराज हो सकते हैं।

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