श्री शारदा चालीसा पाठ चालीस पंक्तियों का एक अत्यंत सरल और प्रभावशाली माध्यम है जिसके जरिए भक्त माँ मैहर वाली के प्रति अपना प्रेम और श्रद्धा प्रकट करते हैं। इस चालीसा में देवी के चतुर्भुज रूप, उनके हाथों में सजी वीणा, माला और पुस्तक तथा उनके वाहन राजहंस की सुंदरता का बहुत ही प्यारा वर्णन किया गया है। इसमें यह भी बताया गया है कि कैसे इतिहास के महान विद्वान कालिदास और ऋषि वाल्मीकि ने माता की दया से ही परम ज्ञान और ख्याति प्राप्त की थी। 

माँ सरस्वती को विद्या, बुद्धि, कला और संगीत की देवी माना गया है। उन्हीं का एक परम जाग्रत और चमत्कारी रूप मध्य प्रदेश के मैहर में त्रिकूट पर्वत पर स्थित माँ शारदा का है। मान्यता है कि मैहर की माँ शारदा साक्षात ज्ञान की देवी हैं जिनकी कृपा के बिना अज्ञानी व्यक्ति कभी भी विद्वान नहीं बन सकता और न ही उसे संसार में मान-सम्मान मिल सकता है। माता के इस भव्य रूप की महिमा अपरंपार है और उनकी दिव्य कृपा को बहुत ही आसानी से पाने के लिए श्री शारदा चालीसा का पाठ करना सबसे उत्तम और अचूक उपाय माना जाता है। 

आजकल की इस कॉम्पिटिटिव लाइफ में जब बच्चों की पढ़ाई, करियर के चुनाव और मानसिक एकाग्रता को लेकर हर परिवार में एक चिंता का माहौल रहता है तब माँ शारदा की शरण लेना जीवन में सही रास्ता दिखाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जो छात्र या करियर की तलाश में जुटे युवा नियमित रूप से माता की स्तुति करते हैं उनकी बुद्धि बहुत तेज हो जाती है और उनके दिमाग का तनाव पूरी तरह खत्म हो जाता है। यदि आपके बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लगता या आपको अपनी नौकरी और व्यापार में सही फैसले लेने में दिक्कत आ रही है तो इस पावन चालीसा का गान जीवन को एक नई दिशा दे सकता है।



|| श्री शारदा चालीसा (Sharda Chalisa PDF) ||

॥ दोहा ॥

मूर्ति स्वयंभू शारदा, मैहर आन विराज।
माला, पुस्तक, धारिणी, वीणा कर में साज॥

॥ चौपाई ॥

जय जय जय शारदा महारानी, आदि शक्ति तुम जग कल्याणी।
रूप चतुर्भुज तुम्हरो माता, तीन लोक महं तुम विख्याता।
दो सहस्त्र बर्षहि अनुमाना, प्रगट भई शारद जग जाना।
मैहर नगर विश्व विख्याता, जहां बैठी शारद जग माता।
त्रिकूट पर्वत शारदा वासा, मैहर नगरी परम प्रकाशा।

शरद इन्दु सम बदन तुम्हारो, रूप चतुर्भुज अतिशय प्यारो।
कोटि सूर्य सम तन द्युति पावन, राज हंस तुम्हारो शचि वाहन।
कानन कुण्डल लोल सुहावहि, उरमणि भाल अनूप दिखावहिं।
वीणा पुस्तक अभय धारिणी, जगत्मातु तुम जग विहारिणी।
ब्रह्म सुता अखंड अनूपा, शारद गुण गावत सुरभूपा।

हरिहर करहिं शारदा बन्दन, वरुण कुबेर करहिं अभिनन्दन।
शारद रूप चण्डी अवतारा, चण्ड मुण्ड असुरन सहारा।
पहिषासुर बध कीन्हि भवानी, दुर्गा बन शारद कल्याणी।
धरा रूप शारद भई चण्डी, रक्तबीज काटा रण मुण्डी।
तुलसी सूर्य आदि विद्वाना, शारद सुयश सदैव बखाना।

कालिदास भए अति विख्याता, तुम्हारी दया शारदा माता।
वाल्मीक नारद मुनि देवा, पुनि-पुनि करहिं शारदा सेवा।
चरण-शरण देवहु जग माया, सब जग व्यापहिं शारद माया।
अणु-परमाणु शारदा वासा, परम शक्तिमय परम प्रकाशा।
हे शारद तुम ब्रह्म स्वरूपा, शिव विरंचि पूजहिं नर भूपा।

ब्रह्म शक्ति नहिं एकउ भेदा, शारद के गुण गावहिं वेदा।
जय जग बन्दनि विश्व स्वरूपा, निर्गुण-सगुण शारदहिं रूपा।
सुमिरहु शारद नाम अखंडा, व्यापइ नहिं कलिकाल प्रचण्डा।
सूर्य चन्द्र नभ मण्डल तारे, शारद कृपा चमकते सारे।
उद्धव स्थिति प्रलय कारिणी, बन्दउ शारद जगत तारिणी।

दुःख दरिद्र सब जाहिं नसाई, तुम्हारी कृपा शारदा माई।
परम पुनीति जगत अधारा, मातु शारदा ज्ञान तुम्हारा।
विद्या बुद्धि मिलहिं सुखदानी, जय जय जय शारदा भवानी।
शारदे पूजन जो जन करहीं, निश्चय ते भव सागर तरहीं।
शारद कृपा मिलहिं शुचि ज्ञाना, होई सकल विधि अति कल्याणा।

जग के विषय महा दुःख दाई, भजहुँ शारदा अति सुख पाई।
परम प्रकाश शारदा तोरा, दिव्य किरण देवहुँ मम ओरा।
परमानन्द मगन मन होई, मातु शारदा सुमिरई जोई।
चित्त शान्त होवहिं जप ध्याना, भजहुँ शारदा होवहिं ज्ञाना।
रचना रचित शारदा केरी, पाठ करहिं भव छटई फेरी।

सत् सत् नमन पढ़ीहे धरिध्याना, शारद मातु करहिं कल्याणा।
शारद महिमा को जग जाना, नेति-नेति कह वेद बखाना।
सत्-सत् नमन शारदा तोरा, कृपा दृष्टि कीजै मम ओरा।
जो जन सेवा करहिं तुम्हारी, तिन कहँ कतहुँ नाहि दुःखभारी।
जो यह पाठ करै चालीसा, मातु शारदा देहुँ आशीषा।

॥ दोहा ॥

बन्दउँ शारद चरण रज, भक्ति ज्ञान मोहि देहुँ।
सकल अविद्या दूर कर, सदा बसहु उरगेहुँ॥

जय-जय माई शारदा, मैहर तेरौ धाम।
शरण मातु मोहिं लीजिए, तोहि भजहुँ निष्काम॥

॥ इति श्री शारदा चालीसा समाप्त ॥

श्री शारदा चालीसा पाठ के लाभ

पूरी लगन और अटूट विश्वास के साथ मैहर वाली मैया की चालीसा का गान करने से भक्तों को अपने जीवन में बहुत सारे अद्‍भुत और सीधे लाभ देखने को मिलते हैं। बुद्धि की देवी अपने भक्तों की पुकार बहुत जल्दी सुनती हैं और उनके मस्तिष्क की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देती हैं जिससे जीवन की उलझनें सुलझ जाती हैं।

यदि कोई भी विद्यार्थी या नौकरीपेशा व्यक्ति इस पवित्र चालीसा को अपनी रोज की पूजा का हिस्सा बनाता है तो उसे निम्नलिखित मुख्य लाभ और पुण्य फल प्राप्त होते हैं:

  • जो बच्चे पढ़ाई-लिखाई में कमजोर हैं या परीक्षा के नाम से बहुत ज्यादा डर जाते हैं उनके लिए यह पाठ किसी वरदान से कम नहीं है। इसके नियमित जाप से याददाश्त बहुत मजबूत होती है और कठिन से कठिन विषय भी बहुत आसानी से समझ में आने लगते हैं।
  • आज के समय में काम के प्रेशर की वजह से लोग अक्सर मानसिक रूप से परेशान रहते हैं और सही निर्णय नहीं ले पाते। माँ शारदा की चालीसा का पाठ करने से दिमाग एकदम स्थिर हो जाता है और मन की सारी उलझनें दूर हो जाती हैं।
  • जो लोग गायन, वादन, लेखन या किसी भी तरह की रचनात्मक कला से जुड़े हैं उनके लिए यह पाठ बेहद जरूरी है। माता की कृपा से व्यक्ति की वाणी में एक ऐसा प्रभाव आ जाता है कि लोग उसकी बातों को बहुत ध्यान से सुनते हैं।
  • चालीसा की पंक्तियों के अनुसार माँ शारदा का नाम अखंड रूप से सुमरन करने से घर के सारे दुख और कंगाली हमेशा के लिए खत्म हो जाते हैं। परिवार में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की बरकत लगातार बढ़ती जाती है।
  • जो युवा लंबे समय से एक अच्छी नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं या अपने बिजनेस को आगे बढ़ाना चाहते हैं उन्हें इस चालीसा से अद्‍भुत मार्ग मिलता है। माता की दया से इंटरव्यू और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के चांस बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं।

श्री शारदा चालीसा पाठ की सही विधि

शास्त्रों के अनुसार किसी भी धार्मिक पाठ या मंत्र का पूरा सकारात्मक फल तभी मिलता है जब उसे सही नियमों, सही दिशा और साफ मन के साथ संपन्न किया जाए। माँ शारदा की पूजा में तन और मन की शुद्धता तथा सफेद रंग की चीजों का बहुत बड़ा महत्व माना गया है क्योंकि माता साक्षात सात्विकता और शांति का प्रतीक हैं। सही तरीके से किया गया यह पाठ हमेशा बहुत जल्दी और उत्तम परिणाम देने वाला साबित होता है।

अगर आप भी अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए या अपनी दिमागी शक्ति को बढ़ाने के लिए माँ शारदा की चालीसा का पाठ शुरू करना चाहते हैं तो इस सरल और सही विधि का पालन करें:

  • पाठ करने के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त का समय या सुबह का समय सबसे बेस्ट माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर घर की सफाई करें और स्नान करके पवित्र हो जाएं। पूजा के लिए साफ सफेद या पीले रंग के कपड़े पहनना बहुत शुभ माना जाता है।
  • अपने घर के मंदिर को अच्छे से साफ कर लें। एक छोटी लकड़ी की चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाएं और उस पर माँ शारदा या माँ सरस्वती की तस्वीर रखें। यदि बच्चे पाठ कर रहे हैं तो अपनी पुस्तकें भी पूजा स्थान के पास रख सकते हैं।
  • माता की प्रतिमा के सामने गाय के शुद्ध देसी घी का एक दीपक जलाएं और एक सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। माँ शारदा को सफेद चंदन, कुंकुम और अक्षत का तिलक लगाएं। उन्हें सफेद रंग के ताजे फूल या गेंदे के फूल अर्पित करना बहुत अच्छा होता है।
  • पूजा के दौरान माँ सरस्वती को उनकी प्रिय चीजें जैसे मिश्री, मखाने, मावे की बर्फी, खीर या फिर पके हुए पीले केलों का सात्विक भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद माता से बुद्धि और ज्ञान की याचना करें।
  • अब ऊन या कुशा के एक साफ आसन पर बैठ जाएं और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखें। पूरी एकाग्रता और साफ शब्दों में श्री शारदा चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद माता की आरती करें और आरती का जल पूरे घर में छिड़क दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या छोटे बच्चे भी माँ शारदा चालीसा का पाठ खुद से कर सकते हैं?

हाँ, छोटे बच्चे जिनकी उम्र 7 या 8 साल से ऊपर है और जो अच्छे से हिंदी पढ़ सकते हैं उन्हें इस चालीसा का पाठ रोज सुबह जरूर करना चाहिए। इससे उनकी पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है और उनका दिमाग बहुत शार्प होता है।

इस चालीसा का पाठ किस दिन से शुरू करना सबसे ज्यादा शुभ होता है?

श्री शारदा चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए गुरुवार यानी बृहस्पतिवार या फिर वसंत पंचमी का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा आप किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार से भी इसकी शुरुआत बहुत ही आराम से कर सकते हैं।

क्या परीक्षा के दिनों में इस चालीसा का पाठ करना फायदेमंद है?

हाँ, परीक्षा के दिनों में इस चालीसा का पाठ करने से छात्रों का कॉन्फिडेंस बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और परीक्षा का डर या घबराहट पूरी तरह गायब हो जाती है। पढ़ाई शुरू करने से पहले एक बार इसका पाठ करना बहुत ही लाभदायक साबित होता है।

पाठ के दौरान किस प्रकार की सावधानियां रखनी जरूरी हैं?

पाठ के दौरान सबसे बड़ी सावधानी यह रखनी है कि आपका मन इधर-उधर की बातों में न भटके और आपका ध्यान पूरी तरह माता के चरणों में रहे। इसके साथ ही घर में पूरी तरह सात्विक माहौल रखें और लहसुन, प्याज या किसी भी तरह के तामसिक भोजन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें।