श्री शिव चालीसा पाठ (Shiv Chalisa Hindi PDF)

श्री शिव चालीसा चालीस अत्यंत सरल और प्रभावशाली चौपाइयों का एक दिव्य संग्रह है जिसमें भगवान शिव के स्वरूप, उनकी महिमा, त्रिशूल, डमरू और उनके द्वारा सृष्टि के कल्याण के लिए किए गए कार्यों का बहुत ही सुंदर वर्णन मिलता है। कठिन संस्कृत श्लोकों और मंत्रों की तुलना में इसे पढ़ना बहुत ही आसान है जिससे साधारण से साधारण व्यक्ति भी महादेव की भक्ति का आनंद उठा सकता है। जब हम एकाग्र मन से इसका पाठ करते हैं तो हमारे चारों तरफ एक सुरक्षा कवच का निर्माण होता है जो हमें बुरी नजर और हर प्रकार के मानसिक विकारों से बचाता है।

आज की भागदौड़ और मानसिक तनाव से भरी जिंदगी में हर कोई आंतरिक शांति और स्थिरता की तलाश में भटक रहा है। ऐसे में सनातन परंपरा में भगवान शिव की आराधना को सबसे सरल और अचूक उपाय माना गया है क्योंकि भोलेनाथ अपने भक्तों की छोटी सी भक्ति से भी बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। शिव जी की कृपा पाने के वैसे तो कई मार्ग हैं लेकिन आम लोगों के लिए श्री शिव चालीसा पाठ सबसे सरल और बेहद शक्तिशाली माध्यम माना गया है जिसे कोई भी व्यक्ति बहुत आसानी से अपने घर पर कर सकता है।

भारत में महादेव के करोड़ों भक्त हर सोमवार और विशेषकर सावन के महीने में शिव मंदिर जाकर उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक शोध और मान्यताओं के अनुसार नियमित रूप से शिव चालीसा का जाप करने से हमारे मस्तिष्क की तरंगें शांत होती हैं और घर से हर तरह की नकारात्मक ऊर्जा पूरी तरह समाप्त हो जाती है। इस लेख के माध्यम से हम बहुत ही आसान भाषा में समझेंगे कि शिव चालीसा क्या है, इसके नियमित जाप से जीवन में क्या बदलाव आते हैं और इसे करने का बिल्कुल सही तरीका क्या है ताकि आपको इसका पूरा फल मिल सके।


|| श्री शिव चालीसा पाठ (Shiv Chalisa Hindi PDF) ||

॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान ।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥

॥ चौपाई ॥

जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥

अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे ॥

मैना मातु की हवे दुलारी ।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
या छवि को कहि जात न काऊ ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा ।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

किया उपद्रव तारक भारी ।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

तुरत षडानन आप पठायउ ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

आप जलंधर असुर संहारा ।
सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

किया तपहिं भागीरथ भारी ।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

वेद नाम महिमा तव गाई ।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
जरत सुरासुर भए विहाला ॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

सहस कमल में हो रहे धारी ।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
करत कृपा सब के घटवासी ॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
संकट से मोहि आन उबारो ॥

मात-पिता भ्राता सब होई ।
संकट में पूछत नहिं कोई ॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
आय हरहु मम संकट भारी ॥

धन निर्धन को देत सदा हीं ।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

शंकर हो संकट के नाशन ।
मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
शारद नारद शीश नवावैं ॥

नमो नमो जय नमः शिवाय ।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

जो यह पाठ करे मन लाई ।
ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
पाठ करे सो पावन हारी ॥

पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

जन्म जन्म के पाप नसावे ।
अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

॥ दोहा ॥

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ॥

मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥

श्री शिव चालीसा पाठ के लाभ

भोलेनाथ की इस पावन चालीसा का रोजाना पाठ करने से इंसान के व्यक्तिगत और व्यावहारिक जीवन में कई बड़े और सकारात्मक बदलाव महसूस होने लगते हैं। जो भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ शिव चालीसा को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाते हैं उन्हें नीचे दिए गए मुख्य फायदे प्राप्त होते हैं।

  • आज के समय में करियर, परिवार और स्वास्थ्य को लेकर हर इंसान के मन में एक अनजाना डर और तनाव बना रहता है। शिव चालीसा की चौपाइयों का लयबद्ध उच्चारण करने से मन का सारा डर और डिप्रेशन खत्म हो जाता है क्योंकि यह हमारे भीतर असीम साहस और गजब का आत्मविश्वास जगाती है।
  • यदि आपके बनते हुए काम लगातार बिगड़ रहे हैं या घर में हमेशा अशांति का माहौल रहता है तो इसका मतलब है कि आसपास नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव है। नियमित पाठ करने से घर का वातावरण पूरी तरह शुद्ध हो जाता है और परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम और तालमेल बहुत तेजी से बढ़ने लगता है।
  • भगवान शिव को मृत्युंजय भी कहा जाता है जो अकाल मृत्यु और बीमारियों से रक्षा करते हैं। जो लोग अक्सर बीमार रहते हैं या किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित हैं उनके लिए शिव चालीसा का पाठ एक रामबाण औषधि की तरह काम करता है और उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।
  • महादेव बहुत ही भोले हैं और वे अपने भक्तों की सच्ची पुकार कभी अनसुनी नहीं करते हैं। इस चालीसा के नियमित जाप से इंसान के जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसकी नौकरी, बिजनेस या विवाह से जुड़ी सभी जायज मनोकामनाएं बहुत जल्दी पूरी होती हैं।

श्री शिव चालीसा पाठ की सही विधि

शास्त्रों के अनुसार किसी भी मंत्र या चालीसा का पूर्ण फल तभी मिलता है जब उसे सही नियमों और शुद्ध मन के साथ किया जाए। हालांकि शिव जी सिर्फ सच्चे भाव के भूखे हैं फिर भी एक व्यवस्थित तरीके से की गई पूजा हमेशा ज्यादा प्रभावशाली और फलदायी साबित होती है।

सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें और पूजा के लिए सफेद या हल्के रंग के वस्त्र चुनना सबसे बेहतर होता है क्योंकि सफेद रंग भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इसके बाद अपने घर के मंदिर में पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुख करके एक साफ आसन पर बैठ जाएं और अपने सामने शिव जी की मूर्ति, तस्वीर या शिवलिंग को स्थापित करें। पाठ शुरू करने से पहले गाय के घी का एक दीपक जलाएं और यदि संभव हो तो भोलेनाथ को सफेद चंदन का तिलक लगाएं, सफेद फूल, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें।

इसके बाद हाथ में थोड़ा सा जल लेकर महादेव के सामने अपनी मनोकामना कहें या शांत मन से पाठ शुरू करने का संकल्प लें। पाठ करते समय अपना पूरा ध्यान चालीसा के शब्दों पर रखें और बिना जल्दबाजी किए हर चौपाई का साफ-साफ उच्चारण करें। जब पाठ पूरा हो जाए तो शिव जी की कपूर से आरती करें, उन्हें मिश्री या फल का भोग लगाएं और अंत में अपनी भूलचुक के लिए क्षमा जरूर मांगें। इस सरल विधि से यदि आप हर सोमवार या रोजाना पाठ करते हैं तो भोलेनाथ की असीम कृपा आपके पूरे परिवार पर हमेशा बनी रहेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या महिलाएं भी शिव चालीसा का पाठ कर सकती हैं?

हां, महिलाएं और माताएं-बहनें बिल्कुल पूरी श्रद्धा के साथ शिव चालीसा का पाठ कर सकती हैं। भगवान शिव माता पार्वती के पति हैं और वे महिलाओं की भक्ति से बहुत जल्दी प्रसन्न होकर उन्हें अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं, इसलिए मन में कोई भी शंका रखे बिना इसका पाठ किया जा सकता है।

शिव चालीसा का पाठ एक दिन में कितनी बार करना चाहिए?

सामान्य तौर पर रोजाना एक बार शांत मन से शिव चालीसा का पाठ करना पर्याप्त और बहुत अच्छा माना जाता है। यदि आपके जीवन में कोई बहुत बड़ी परेशानी या संकट है तो आप अपनी श्रद्धा के अनुसार इसे दिन में तीन बार यानी सुबह, दोपहर और शाम को भी पढ़ सकते हैं जिससे संकट जल्दी टल जाता है।

क्या शाम के समय शिव चालीसा का पाठ किया जा सकता है?

हां, शाम के समय यानी प्रदोष काल में शिव चालीसा का पाठ करना बेहद फलदायी माना जाता है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार प्रदोष काल का समय पूरी तरह भगवान शिव को समर्पित होता है। बस ध्यान रखें कि पाठ करने से पहले अपने हाथ-पैर अच्छे से धो लें और मंदिर में दीपक जरूर जलाएं।

यदि शिवलिंग घर पर न हो तो पाठ कैसे करें?

यदि आपके घर के मंदिर में शिवलिंग नहीं है तो आपको बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप भगवान शिव के सपरिवार वाले चित्र यानी जिसमें माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय जी हों, उनके सामने बैठकर भी पूरी श्रद्धा से यह पाठ संपन्न कर सकते हैं क्योंकि महादेव भाव प्रधान देवता हैं।

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