भगवान श्री कृष्ण को विष्णु जी का पूर्ण अवतार माना गया है जिनकी लीलाएं और सीख आज के समय में भी हर इंसान का मार्गदर्शन करती हैं। द्वापर युग में जन्मे कन्हाई ने कंस जैसे पापी का अंत किया और महाभारत के युद्ध में पूरी दुनिया को गीता का अनमोल ज्ञान दिया। आज की इस बेहद तनावभरी और तेज भागती जिंदगी में मन की शांति पाने और लड्डू गोपाल का आशीर्वाद हासिल करने का सबसे सरल माध्यम श्री कृष्ण चालीसा का पाठ करना माना गया है। इस पावन चालीसा की चालीस पंक्तियों में प्रभु के मनमोहक रूप, उनकी बाल लीलाओं और भक्तों पर की गई असीम दया का बहुत ही सुंदर वर्णन मिलता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो लोग विशेष रूप से हर बुधवार, शनिवार, जन्माष्टमी के पावन पर्व या हर महीने आने वाली एकादशी तिथि को कान्हा जी की भक्ति करते हैं उनके घर में कभी क्लेश नहीं टिकता। इस चमत्कारी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के भीतर की नेगेटिविटी पूरी तरह दूर हो जाती है और उसे जीवन में सही फैसले लेने की अद्‍भुत प्रेरणा मिलती है। श्री कृष्ण चालीसा पाठ में कन्हाई के सुंदर श्यामल तन, उनके मोर मुकुट, कानों के कुंडल, वैजयंती माला और उनकी जादुई बांसुरी का बड़ा ही मनमोहक विवरण दिया गया है। इस पावन चालीसा में प्रभु की उन महान बाल लीलाओं का भी जिक्र है जिसमें उन्होंने पूतना, अघासुर और बकासुर जैसे भयानक राक्षसों का संहार किया था। 

साथ ही इसमें गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाने और द्रौपदी की लाज बचाने जैसी सच्ची घटनाओं को बहुत ही सुंदर ढंग से पिरोया गया है। आज के इस आधुनिक और डिजिटल युग में बहुत से लोग अपने पास कागजी किताबें रखने के बजाय अपने स्मार्टफोन, लैपटॉप या टैबलेट में पाठ पढ़ना ज्यादा पसंद करते हैं। श्री कृष्ण चालीसा पाठ PDF को ऑनलाइन डाउनलोड करके अपने मोबाइल में सुरक्षित रखना एक बहुत ही अच्छा और आसान तरीका बन चुका है। इसकी मदद से आप सुबह ऑफिस जाते समय, लंबी यात्रा के दौरान या घर से कहीं बाहर होने पर भी अपनी रोज की पूजा को बिना किसी नागे के बहुत ही आराम से पूरा कर सकते हैं। यह पीडीएफ फाइल इंटरनेट पर पूरी तरह से मुफ्त मिल जाती है।


|| श्री कृष्ण चालीसा (Shri Krishna Chalisa PDF) ||

।। दोहा ।।

बंशी शोभित कर मधुर, नील जल्द तनु श्यामल ।
अरुण अधर जनु बिम्बा फल, नयन कमल अभिराम ।।

पुरनिंदु अरविन्द मुख, पिताम्बर शुभा साज्ल ।
जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचंद्र महाराज ।।

।। चौपाई ।।

जय यदुनंदन जय जगवंदन । जय वासुदेव देवकी नंदन ।।
जय यशोदा सुत नन्द दुलारे । जय प्रभु भक्तन के रखवारे ।।
जय नटनागर नाग नथैया । कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया ।।
पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो । आओ दीनन कष्ट निवारो ।।
बंसी मधुर अधर धरी तेरी । होवे पूरण मनोरथ मेरी ।।

आओ हरी पुनि माखन चाखो । आज लाज भक्तन की राखो ।।
गोल कपोल चिबुक अरुनारे । मृदुल मुस्कान मोहिनी डारे ।।
रंजित राजिव नयन विशाला । मोर मुकुट वैजयंती माला ।।
कुंडल श्रवण पीतपट आछे । कटी किंकिनी काछन काछे ।।
नील जलज सुंदर तनु सोहे । छवि लखी सुर नर मुनि मन मोहे ।।

मस्तक तिलक अलक घुंघराले । आओ श्याम बांसुरी वाले ।।
करि पी पान, पुतनाहीं तारयो । अका बका कागा सुर मारयो ।।
मधुवन जलत अग्नि जब ज्वाला । भये शीतल, लखिताहीं नंदलाला ।।
सुरपति जब ब्रिज चढ़यो रिसाई । मूसर धार बारि बरसाई ।।
लगत-लगत ब्रिज चाहं बहायो । गोवर्धन नखधारी बचायो ।।

Lखी यशोदा मन भ्रम अधिकाई । मुख महँ चौदह भुवन दिखाई ।।
दुष्ट कंस अति ऊधम मचायो । कोटि कमल कहाँ फूल मंगायो ।।
नाथी कालियहिं तब तुम लीन्हें । चरनचिंह दै निर्भय किन्हें ।।
करी गोपिन संग रास विलासा । सब की पूरण करी अभिलाषा ।।
केतिक महा असुर संहारयो । कंसहि केश पकडी दी मारायो ।।

मातु पिता की बंदी छुडाई । उग्रसेन कहाँ राज दिलाई ।।
माहि से मृतक छहों सुत लायो । मातु देवकी शोक मिटायो ।।
भोमासुर मुर दैत्य संहारी । लाये शत्दश सहस कुमारी ।।
दी भिन्हीं त्रिन्चीर संहारा । जरासिंधु राक्षस कहां मारा ।।
असुर वृकासुर आदिक मारयो । भक्तन के तब कष्ट निवारियो ।।

दीन सुदामा के दुःख तारयो । तंदुल तीन मुठी मुख डारयो ।।
प्रेम के साग विदुर घर मांगे । दुर्योधन के मेवा त्यागे ।।
लाखी प्रेमकी महिमा भारी । नौमी श्याम दीनन हितकारी ।।
मारथ के पार्थ रथ हांके । लिए चक्र कर नहीं बल थाके ।।
निज गीता के ज्ञान सुनाये । भक्तन ह्रदय सुधा बरसाए ।।

मीरा थी ऐसी मतवाली । विष पी गई बजाकर ताली ।।
राणा भेजा सांप पिटारी । शालिग्राम बने बनवारी ।।
निज माया तुम विधिहीन दिखायो । उरते संशय सकल मिटायो ।।
तव शत निंदा करी ततकाला । जीवन मुक्त भयो शिशुपाला ।।
जबहीं द्रौपदी तेर लगाई । दीनानाथ लाज अब जाई ।।

अस अनाथ के नाथ कन्हैया । डूबत भंवर बचावत नैया ।।
सुन्दरदास आस उर धारी । दयादृष्टि कीजे बनवारी ।।
नाथ सकल मम कुमति निवारो । छमोबेग अपराध हमारो ।।
खोलो पट अब दर्शन दीजे । बोलो कृष्ण कन्हैया की जय ।।

।। दोहा ।।

यह चालीसा कृष्ण का, पथ करै उर धारी ।
अष्ट सिद्धि नव निद्धि फल, लहे पदार्थ चारी ।।

।। इति श्री कृष्ण चालीसा सम्पूर्ण ।।

श्री कृष्ण चालीसा पाठ के लाभ

सच्चे दिल, साफ नियत और पूरे विश्वास के साथ यशोदा नंदन की चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से भक्तों को अपनी लाइफ में कई तरह के चमत्कारी और सुखद बदलाव देखने को मिलते हैं। प्रेम और भक्ति के सागर श्री कृष्ण अपने बच्चों की पुकार बहुत जल्दी सुनती हैं और उनके चारों तरफ एक ऐसा पॉजिटिव सुरक्षा कवच बना देते हैं जिससे कोई भी बड़ी मुसीबत उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाती।

यदि कोई भी श्रद्धालु इस पावन चालीसा को अपनी रोज की पूजा का हिस्सा बनाता है या हर बुधवार और एकादशी को इसका विशेष पाठ करता है तो कन्हाई की कृपा से उसे नीचे दिए गए मुख्य लाभ बहुत ही जल्दी प्राप्त होते हैं:

  • आज की भागदौड़ भरी लाइफ में लोग अक्सर मानसिक अशांति का शिकार हो जाते हैं। बंसी वाले की चालीसा का पाठ करने से दिमाग को गजब का सुकून और शांति मिलती है, मन का हर तरह का अनजाना डर पूरी तरह दूर होता है और जीवन में फ्रेश एनर्जी का संचार होता है।
  • यदि आपके ऊपर बहुत सारा कर्ज हो गया है और लाख कोशिशों के बाद भी पैसा घर में नहीं टिक रहा है तो यह पाठ आपके लिए बहुत फायदेमंद है। प्रभु की दया से आय के नए और अच्छे स्रोत बनते हैं जिससे घर में धन-धान्य का भंडार हमेशा भरा रहता है।
  • श्री कृष्ण साक्षात प्रेम के प्रतीक हैं, इसलिए इस चालीसा का पाठ करने से परिवार के सदस्यों के बीच चल रहे आपसी मतभेद या लड़ाई-झगड़े हमेशा के लिए शांत हो जाते हैं। पति-पत्नी और प्रेमियों के बीच आपसी प्यार, भरोसा और तालमेल बहुत मजबूत होता है।
  • यदि आपके बनते हुए काम ऐन वक्त पर बिगड़ जाते हैं या कार्यस्थल पर आपको मेहनत का पूरा फल नहीं मिल रहा है तो यह पाठ आपके सारे रास्ते खोल देता है। कान्हा जी की कृपा से बिजनेस में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और नौकरी में प्रमोशन के अच्छे योग बनते हैं।
  • यदि आपके बच्चों का मन पढ़ाई-लिखाई में नहीं लग रहा है या वे गलत दोस्तों की संगति में पड़ गए हैं तो उनके कमरे में इस चालीसा का पाठ करना शुरू करें। इसके प्रभाव से बच्चों की याददाश्त बहुत तेज होती है और वे सही रास्ते पर चलते हुए बड़ी सफलता पाते हैं।

श्री कृष्ण चालीसा पाठ की सही विधि

शास्त्रों के अनुसार किसी भी देवी-देवता की पूजा या स्तुति का पूरा पुण्य फल तभी प्राप्त होता है जब उसे सही नियमों, सही दिशा और शुद्ध भाव के साथ संपन्न किया जाए। वैसे तो लड्डू गोपाल बहुत ही दयालु हैं और केवल एक तुलसी दल चढ़ाने से भी प्रसन्न हो जाते हैं, लेकिन पूजा के दौरान साफ-सफाई रखना और पवित्रता का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है। सही तरीके से और सही नियम से किया गया यह पाठ हमेशा बहुत जल्दी और मनचाहा फल देने वाला साबित होता है।

अगर आप भी अपने जीवन के कष्टों को दूर करने और भगवान कृष्ण का दिव्य आशीर्वाद पाने के लिए इस चालीसा का पाठ शुरू करना चाहते हैं तो इस आसान और सही विधि का पालन करें:

  • इस पावन पाठ को करने के लिए सुबह या ब्रह्म मुहूर्त का समय सबसे बढ़िया माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर नहा धो लें और पूरी तरह साफ कपड़े पहनें। कान्हा जी की पूजा में पीले या सफेद रंग के कपड़ों का प्रयोग करना सबसे ज्यादा फलदायी और शुभ माना गया है।
  • अपने घर के पूजा स्थल को अच्छे से साफ कर लें। एक लकड़ी की छोटी चौकी पर पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान श्री कृष्ण या लड्डू गोपाल की मूर्ति स्थापित करें। पूजा करते समय आपका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
  • प्रभु की प्रतिमा के सामने गाय के शुद्ध देसी घी का एक दीपक जलाएं और साथ में एक सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। ठाकुर जी को चंदन या गोपी चंदन का तिलक लगाएं। उन्हें वैजयंती के फूल या पीले रंग के गेंदे के फूल अर्पित करना बेहद उत्तम माना जाता है।
  • पूजा के समय कान्हा जी को उनकी सबसे प्रिय चीजें जैसे माखन और मिश्री का भोग लगाएं। साथ ही उनके भोग में तुलसी का पत्ता यानी तुलसी दल जरूर रखें क्योंकि बिना तुलसी के वे भोग स्वीकार नहीं करते। तामसिक चीजों का इस्तेमाल भूलकर भी न करें।
  • अब ऊन या कुशा के बने साफ आसन पर बैठ जाएं और पूरी एकाग्रता और साफ शब्दों में श्री कृष्ण चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद खड़े होकर प्रभु की आरती करें, उन्हें अपनी मनोकामना बताएं और शांत मन से कुछ देर उनका ध्यान लगाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या श्री कृष्ण चालीसा के पाठ में तुलसी का पत्ता रखना बहुत जरूरी है?

हाँ, भगवान विष्णु और उनके सभी अवतारों की पूजा में तुलसी पत्र का होना बेहद जरूरी माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार जब आप भोग लगाते समय या पाठ करते समय कान्हा जी के चरणों में तुलसी का पत्ता अर्पित करते हैं, तो वे बेहद प्रसन्न होते हैं और आपकी पूजा को तुरंत स्वीकार कर लेते हैं।

श्री कृष्ण चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए कौन सा दिन सबसे बेस्ट माना जाता है?

इस पवित्र चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए बुधवार या शनिवार का दिन सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है। इसके अलावा आप किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार, एकादशी तिथि, पूर्णिमा या साल में आने वाले जन्माष्टमी के पावन पर्व से भी इसकी शुरुआत बहुत ही आराम से कर सकते हैं।

क्या इस पावन चालीसा का पाठ रात के समय भी किया जा सकता है?

हाँ, चूंकि भगवान श्री कृष्ण का जन्म रात के बारह बजे हुआ था, इसलिए उनकी साधना और पूजा रात के समय करने का भी बहुत बड़ा महत्व है। आप शाम को सूर्यास्त के समय या रात को सोने से पहले हाथ-पैर धोकर, साफ होकर दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ पूरी एकाग्रता के साथ कर सकते हैं।

पाठ के दिनों में खान-पान को लेकर क्या परहेज रखना जरूरी है?

इस पाठ की साधना के दौरान सात्विकता का कड़ाई से पालन करना चाहिए। जितने दिन भी आप किसी विशेष मन्नत के लिए इस चालीसा का पाठ करते हैं उतने दिन आपको पूरी तरह से सात्विक रहना होगा और घर में मांस, मदिरा, अंडा, लहसुन और प्याज जैसे हर तरह के तामसिक भोजन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगानी होगी।