श्री विष्णु चालीसा पाठ चालीस पंक्तियों का एक बेहद सुंदर, सरल और जाग्रत संग्रह है जिसके जरिए भक्त अपने पालनहार भगवान श्री हरि के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा और प्यार को प्रकट करते हैं। इस चालीसा में प्रभु के पीतांबर धारी रूप, उनके हाथों में सजी गदा, शंख, चक्र और उनकी सुंदर मोहिनी मूरत का बहुत ही प्यारा बखान किया गया है। इसमें यह भी बताया गया है कि कैसे भगवान ने समय-समय पर वराह, मत्स्य, कूर्म, राम और नृसिंह जैसे महान रूप धारण करके भक्तों का उद्धार किया और अधर्म का विनाश किया था। 

जहाँ बहुत बड़ी पौराणिक पूजाओं या वेदोक्त मंत्रों के जाप में उच्चारण की थोड़ी सी भी गलती होने पर मन में एक डर रहता है, वहीं इस चालीसा को आप बिना किसी डर के बेहद सरल भाव से अपने घर के मंदिर में बैठकर गुनगुना सकते हैं। यह पवित्र पाठ इंसान के मन से अज्ञान के अंधेरे और काम-क्रोध जैसे दोषों को मिटाकर जीवन में एक गजब की पॉजिटिव एनर्जी का संचार करता है। भगवान विष्णु को इस पूरी सृष्टि का पालनहार माना गया है। वे ही संसार की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाते हैं और जब-जब धरती पर कोई बड़ा संकट आता है, तब-तब वे अलग-अलग अवतार लेकर धर्म की रक्षा करते हैं। 

शास्त्रों के अनुसार भगवान नारायण की भक्ति करने से इंसान को जीवन के सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है और मन में अद्‍भुत शांति का वास होता है। कलयुग के इस मुश्किल दौर में जब हर कोई किसी न किसी उलझन में फंसा हुआ है, तब श्री विष्णु चालीसा का पाठ करना प्रभु को प्रसन्न करने और उनकी असीम कृपा पाने का सबसे सरल और अचूक माध्यम माना जाता है। ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो लोग नियम से या विशेष रूप से हर गुरुवार और एकादशी को इस पवित्र चालीसा का गान करते हैं, उनके घर में माता लक्ष्मी का स्थाई वास होता है। यदि आपके परिवार में भी बिना वजह के झगड़े होते हैं, सुख-समृद्धि रुक गई है या आपकी सेहत बार-बार खराब हो रही है, तो इस पावन चालीसा का पाठ करना आपकी जिंदगी को पूरी तरह बदल सकता है।


|| श्री विष्णु चालीसा (Vishnu Chalisa PDF) ||

॥ दोहा ॥

विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय।
कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय।

॥ चौपाई ॥

नमो विष्णु भगवान खरारी। कष्ट नशावन अखिल बिहारी॥
प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी। त्रिभुवन फैल रही उजियारी॥
सुन्दर रूप मनोहर सूरत। सरल स्वभाव मोहनी मूरत॥
तन पर पीतांबर अति सोहत। बैजन्ती माला मन मोहत॥
शंख चक्र कर गदा बिराजे। देखत दैत्य असुर दल भाजे॥

सत्य धर्म मद लोभ न गाजे। काम क्रोध मद लोभ न छाजे॥
संतभक्त सज्जन मनरंजन। दनुज असुर दुष्टन दल गंजन॥
सुख उपजाय कष्ट सब भंजन। दोष मिटाय करत जन सज्जन॥
पाप काट भव सिंधु उतारण। कष्ट नाशकर भक्त उबारण॥
करत अनेक रूप प्रभु धारण। केवल आप भक्ति के कारण॥

धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा। तब तुम रूप राम का धारा॥
भार उतार असुर दल मारा। रावण आदिक को संहारा॥
आप वराह रूप बनाया। हरण्याक्ष को मार गिराया॥
धर मत्स्य तन सिंधु बनाया। चौदह रतनन को निकलाया॥
अमिलख असुरन द्वंद मचाया। रूप मोहनी आप दिखाया॥

देवन को अमृत पान कराया। असुरन को छवि से बहलाया॥
कूर्म रूप धर सिंधु मझाया। मंद्राचल गिरि तुरत उठाया॥
शंकर का तुम फन्द छुड़ाया। भस्मासुर को रूप दिखाया॥
वेदन को जब असुर डुबाया। कर प्रबंध उन्हें ढूंढवाया॥
मोहित बनकर खलहि नचाया। उसही कर से भस्म कराया॥

असुर जलंधर अति बलदाई। शंकर से उन कीन्ह लडाई॥
हार पार शिव सकल बनाई। कीन सती से छल खल जाई॥
सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी। बतलाई सब विपत कहानी॥
तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी। वृन्दा की सब सुरति भुलानी॥
देखत तीन दनुज शैतानी। वृन्दा आय तुम्हें लपटानी॥

हो स्पर्श धर्म क्षति मानी। हना असुर उर शिव शैतानी॥
तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे। हिरणाकुश आदिक खल मारे॥
गणिका और अजामिल तारे। बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे॥
हरहु सकल संताप हमारे। कृपा करहु हरि सिरजन हारे॥
देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे। दीन बन्धु भक्तन हितकारे॥

चहत आपका सेवक दर्शन। करहु दया अपनी मधुसूदन॥
जानूं नहीं योग्य जप पूजन। होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन॥
शीलदया सन्तोष सुलक्षण। विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण॥
करहुं आपका किस विधि पूजन। कुमति विलोक होत दुख भीषण॥
करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण। कौन भांति मैं करहु समर्पण॥

सुर मुनि करत सदा सेवकाई। हर्षित रहत परम गति पाई॥
दीन दुखिन पर सदा सहाई। निज जन जान लेव अपनाई॥
पाप दोष संताप नशाओ। भव-बंधन से मुक्त कराओ॥
सुख संपत्ति दे सुख उपजाओ। निज चरनन का दास बनाओ॥
निगम सदा ये विनय सुनावै। पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै॥

॥ इति श्री विष्णु चालीसा समाप्त ॥

श्री विष्णु चालीसा पाठ के लाभ

पूरी लगन, साफ नियत और अटूट विश्वास के साथ नारायण जी की चालीसा का नियमित रूप से गान करने से भक्तों को अपने जीवन में कई तरह के चमत्कारी और बहुत ही सुखद परिणाम देखने को मिलते हैं। सृष्टि के कर्ता अपने भक्तों की पुकार को बहुत ही जल्दी सुनते हैं और उनके जीवन के हर बड़े संकट को पल भर में दूर कर देते हैं।

यदि कोई भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ इस पावन चालीसा को अपनी डेली पूजा का हिस्सा बनाता है, तो उसे भगवान की दया से निम्नलिखित मुख्य लाभ और उत्तम फल प्राप्त होते हैं:

  • भगवान विष्णु को लक्ष्मीपति कहा जाता है, इसलिए जहाँ श्री हरि की पूजा होती है वहाँ माता लक्ष्मी अपने आप दौड़ी चली आती हैं। इस चालीसा के नियमित पाठ से घर की पुरानी कंगाली, दरिद्रता और पैसों की तंगी हमेशा के लिए दूर हो जाती है और बिजनेस में दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की मिलती है।
  • आज के समय में काम के अत्यधिक बोझ और पर्सनल लाइफ की वजह से लोग अक्सर डिप्रेशन और अशांति का शिकार हो जाते हैं। विष्णु चालीसा की मधुर पंक्तियों का पाठ करने से इंसान का दिमाग एकदम शांत हो जाता है, मन का सारा डर खत्म होता है और रात में बहुत ही सुकून भरी नींद आती है।
  • चालीसा की पंक्तियों के अनुसार प्रभु का यह पाठ जनम-जनम के पापों को काटने वाला और भवसागर से पार उतारने वाला माना गया है। इसके प्रभाव से पुराने समय से चली आ रही बड़ी-बड़ी परेशानियां, बीमारियां और ग्रहों के दोष अपने आप शांत होने लगते हैं।
  • जिस घर में अक्सर छोटी-छोटी बातों पर क्लेश होता है या भाई-भाई में मतभेद रहता है, वहाँ इस पाठ को करने से चमत्कारी बदलाव आता है। माता की कृपा और नारायण के आशीर्वाद से घर का माहौल एकदम शांत, मधुर और पॉजिटिव बन जाता है।
  • इस पवित्र चालीसा का पाठ करने वाला व्यक्ति इस संसार के सभी सुखों और भौतिक सुविधाओं का आनंद उठाते हुए अंत समय में सीधे भगवान के परम धाम यानी वैकुंठ लोक को जाता है, जहाँ उसे जनम-मरण के चक्र से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है।

श्री विष्णु चालीसा पाठ की सही विधि

शास्त्रों के अनुसार किसी भी धार्मिक पाठ या स्तुति का पूरा सकारात्मक फल तभी मिलता है जब उसे सही नियमों, सही दिशा और साफ मन के साथ संपन्न किया जाए। भगवान विष्णु की पूजा में तन-मन की शुद्धता, पीले रंग की चीजों और तुलसी के पत्तों का बहुत ही बड़ा महत्व माना गया है क्योंकि श्री हरि को सात्विकता और पीला रंग सबसे ज्यादा प्रिय है। सही तरीके से किया गया यह पाठ हमेशा बहुत जल्दी और उत्तम परिणाम देने वाला साबित होता है।

अगर आप भी अपने परिवार की खुशहाली के लिए या भगवान नारायण का दिव्य आशीर्वाद पाने के लिए इस चालीसा का पाठ शुरू करना चाहते हैं, तो इस सरल और सही विधि का पालन करें:

  • पाठ करने के लिए सुबह का समय सबसे बेस्ट माना जाता है। खासकर गुरुवार या एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके पवित्र हो जाएं। इस पूजा में साधक का पूरी तरह साफ-सुथरे कपड़े पहनना जरूरी है और यदि संभव हो तो पीले रंग के कपड़े पहनें।
  • अपने घर के मंदिर को अच्छे से साफ कर लें। एक छोटी लकड़ी की चौकी पर साफ पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान विष्णु या माता लक्ष्मी के साथ उनकी संयुक्त तस्वीर स्थापित करें। यदि घर में लड्डू गोपाल या शालिग्राम जी हैं, तो उन्हें भी पूजा स्थान पर विराजमान कर सकते हैं।
  • भगवान की प्रतिमा के सामने गाय के शुद्ध देसी घी का एक दीपक जलाएं और साथ में एक सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। प्रभु को पीले चंदन या केसर का तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें। उन्हें पीले रंग के ताजे फूल या गेंदे की माला चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है।
  • पूजा के दौरान भगवान विष्णु को उनकी सबसे प्रिय चीजें जैसे चने की दाल और गुड़, मावे की बर्फी, पंचामृत या फिर पके हुए पीले केलों का सात्विक भोग लगाएं। ध्यान रहे कि कान्हा और विष्णु जी के भोग में तुलसी का पत्ता जरूर होना चाहिए, क्योंकि इसके बिना वे भोग स्वीकार नहीं करते।
  • अब ऊन या कुशा के एक साफ आसन पर बैठ जाएं और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखें। पूरी एकाग्रता और साफ शब्दों में श्री विष्णु चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद भगवान की कपूर से आरती करें और आरती का जल पूरे घर में छिड़क दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या महिलाएं भी विष्णु चालीसा का पाठ बहुत आराम से कर सकती हैं?

हाँ, महिलाएं भी पूरी श्रद्धा, पवित्रता और साफ मन के साथ विष्णु चालीसा का पाठ बहुत आराम से कर सकती हैं। बस इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि अशुद्ध दिनों या मासिक धर्म के समय इस पाठ को करने से पूरी तरह बचना चाहिए और पूजा के नियमों का पालन करना चाहिए।

इस चालीसा का पाठ किस दिन से शुरू करना सबसे ज्यादा शुभ होता है?

श्री विष्णु चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए गुरुवार का दिन या फिर एकादशी की तिथि सबसे उत्तम मानी जाती है क्योंकि ये दोनों ही समय भगवान विष्णु की साधना के लिए विशेष रूप से समर्पित हैं। इसके अलावा आप किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार से इसकी शुरुआत कर सकते हैं।

क्या शाम के समय भी इस चालीसा का पाठ किया जा सकता है?

हाँ, अगर आपको सुबह के समय किसी वजह से फुर्सत नहीं मिल पाती है, तो आप शाम को सूर्यास्त के समय हाथ-पैर धोकर, पूरी तरह साफ होकर माता लक्ष्मी और नारायण के सामने घी का दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ बहुत ही शांत मन से कर सकते हैं। शाम के समय पाठ करने से भी घर में धन का आगमन बढ़ता है।

पाठ के दिनों में खान-पान को लेकर क्या परहेज रखना जरूरी है?

भगवान विष्णु की साधना पूरी तरह सात्विक और पवित्र होती है। इसलिए जितने दिन भी आप विष्णु चालीसा का नियमपूर्वक पाठ करते हैं या यदि आप हर गुरुवार को पाठ करते हैं, तो उस दिन घर में मांस, मदिरा, अंडा या किसी भी तरह के तामसिक भोजन जैसे प्याज और लहसुन का प्रयोग बिल्कुल न करें ताकि पूजा का पूरा फल मिल सके।