श्री यमुना चालीसा पाठ 40 पंक्तियों की एक बेहद सुंदर और प्रभावशाली स्तुति है जिसमें सूर्यसुता माँ यमुना के अलौकिक स्वरूप, उनकी अद्भुत महिमा और भगवान कृष्ण के साथ उनके गहरे प्रेम का पूरा वर्णन किया गया है। इस चालीसा में विस्तार से बताया गया है कि कैसे माँ यमुना ने गोकुल और वृंदावन को पावन बनाया और कैसे उनके जल में खेलने वाले मोर, हंस और कोयल ब्रज की शोभा को बढ़ाते हैं।
इस चालीसा की हर एक लाइन भक्त के मन में भक्ति का रस घोल देती है जिससे अंतर्मन पूरी तरह शुद्ध हो जाता है। धर्म में नदियों को केवल पानी का जरिया नहीं बल्कि साक्षात देवी-देवता का रूप माना गया है। इनमें से सूर्यपुत्र यमराज की बहन और भगवान श्री कृष्ण की परम प्रिय पटरानी माँ यमुना का स्थान बेहद खास है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यमुना नदी साक्षात करुणा और मोक्ष की देवी हैं जिनके सिर्फ दर्शन करने और जल को छूने मात्र से इंसान के जनम-जनम के पाप पल भर में धुलकर नष्ट हो जाते हैं।
ब्रज मंडल की लाइफलाइन मानी जाने वाली माँ यमुना की विशेष कृपा पाने और अपनी किस्मत को चमकाने के लिए श्री यमुना चालीसा का पाठ सबसे आसान और शक्तिशाली तरीका माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में ऐसा माना गया है कि जो लोग नियम से माँ यमुना की स्तुति करते हैं उन्हें यमराज के भय यानी मृत्यु के डर से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही अगर किसी की कुंडली में सूर्य या शनि ग्रह से जुड़ा कोई भी दोष है तो इस पावन चालीसा का गान करने से वो सारी परेशानियां अपने आप खत्म हो जाती हैं। आइए इस पवित्र पाठ के महत्व, इसके बेहतरीन फायदों और पूजा के नियमों को बहुत ही आसान शब्दों में समझते हैं।
|| श्री यमुना चालीसा (Yamuna Chalisa PDF) ||
॥ दोहा ॥
प्रियसंग क्रीड़ा करत नित, सुखनिधि वेद को सार।
दरस परस ते पाप मिटे, श्रीकृष्ण प्राण आधार॥
यमुना पावन विमल सुजस, भक्तिसकल रस खानि।
शेष महेश वदंन करत, महिमा न जाय बखानि॥
पूजित सुरासुर मुकुन्द प्रिया, सेवहि सकल नर-नार।
प्रकटी मुक्ति हेतु जग, सेवहि उतरहि पार॥
बंदि चरण कर जोरी कहोँ, सुनियों मातु पुकार।
भक्ति चरण चित्त देई के, कीजै भव ते पार॥
॥ चौपाई ॥
जै जै जै यमुना महारानी। जय कालिन्दि कृष्ण पटरानी॥
रूप अनूप शोभा छवि न्यारी। माधव-प्रिया ब्रज शोभा भारी॥
भुवन बसी घोर तप कीन्हा। पूर्ण मनोरथ मुरारी कीन्हा॥
निज अर्धांगी तुम्ही अपनायों। सावँरो श्याम पति प्रिय पायो॥
रूप अलौकिक अद्भूत ज्योति। नीर रेणू दमकत ज्यूँ मोती॥
सूर्यसुता श्यामल सब अंगा। कोटिचन्द्र ध्युति कान्ति अभंगा॥
आश्रय ब्रजाधिश्वर लीन्हा। गोकुल बसी शुचि भक्तन कीन्हा॥
कृष्ण नन्द घर गोकुल आयों। चरण वन्दि करि दर्शन पायों॥
सोलह श्रृंगार भुज कंकण सोहे। कोटि काम लाजहि मन मोहें॥
कृष्णवेश नथ मोती राजत। नूपुर घुंघरू चरण में बाजत॥
मणि माणक मुक्ता छवि नीकी। मोहनी रूप सब उपमा फिकी॥
मन्द चलहि प्रिय-प्रीतम प्यारी। रीझहि श्याम प्रिय प्रिया निहारी॥
मोहन बस करि हृदय विराजत। बिनु प्रीतम क्षण चैन न पावत॥
मुरलीधर जब मुरली बजावैं। संग केलि कर आनन्द पावैं॥
मोर हंस कोकिल नित खेलत। जलखग कूजत मृदुबानी बोलत॥
जा पर कृपा दृष्टि बरसावें। प्रेम को भेद सोई जन पावें॥
नाम यमुना जब मुख पे आवें। सबहि अमगंल देखि टरि जावें॥
भजे नाम यमुना अमृत रस। रहे साँवरो सदा ताहि बस॥
करूणामयी सकल रसखानि। सुर नर मुनि बंदहि सब ज्ञानी॥
भूतल प्रकटी अवतार जब लीन्हो। उध्दार सभी भक्तन को किन्हो॥
शेष गिरा श्रुति पार न पावत। योगी जति मुनी ध्यान लगावत॥
दंड प्रणाम जे आचमन करहि। नासहि अघ भवसिंधु तरहि॥
भाव भक्ति से नीर न्हावें। देव सकल तेहि भाग्य सरावें॥
करि ब्रज वास निरंतर ध्यावहि। परमानंद परम पद पावहि॥
संत मुनिजन मज्जन करहि। नव भक्तिरस निज उर भरहि॥
पूजा नेम चरण अनुरागी। होई अनुग्रह दरश बड़भागी॥
दीपदान करि आरती करहि। अन्तर सुख मन निर्मल रहहि॥
कीरति विशद विनय करी गावत। सिध्दि अलौकिक भक्ति पावत॥
बड़े प्रेम श्रीयमुना पद गावें। मोहन सन्मुख सुनन को आवें॥
आतुर होय शरणागत आवें। कृपाकरी ताहि बेगि अपनावें॥
ममतामयी सब जानहि मन की। भव पीड़ा हरहि निज जन की॥
शरण प्रतिपाल प्रिय कुंजेश्वरी। ब्रज उपमा प्रीतम प्राणेश्वरी॥
श्रीजी यमुना कृपा जब होई। ब्रह्म सम्बन्ध जीव को होई॥
पुष्टिमार्गी नित महिमा गावैं। कृष्ण चरण नित भक्ति दृढावैं॥
नमो नमो श्री यमुने महारानी। नमो नमो श्रीपति पटरानी॥
नमो नमो यमुने सुख करनी। नमो नमो यमुने दु: ख हरनी॥
नमो कृष्णायैं सकल गुणखानी। श्रीहरिप्रिया निकुंज निवासिनी॥
करूणामयी अब कृपा कीजैं। फदंकाटी मोहि शरण मे लीजैं॥
जो यमुना चालिसा नित गावैं। कृपा प्रसाद ते सब सुख पावैं॥
ज्ञान भक्ति धन कीर्ति पावहि। अंत समय श्रीधाम ते जावहि॥
॥ दोहा ॥
भज चरन चित सुख करन, हरन त्रिविध भव त्रास।
भक्ति पाई आनंद रमन, कृपा दृष्टि ब्रज वास॥
यमुना चालिसा नित नेम ते, पाठ करे मन लाय।
कृष्ण चरण रति भक्ति दृढ, भव बाधा मिट जाय॥
॥ इति श्री यमुना चालीसा समाप्त ॥
श्री यमुना चालीसा पाठ के लाभ
सच्चे दिल और पूरी निष्ठा के साथ माँ यमुना की चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से भक्तों को अपने जीवन में कई तरह के चमत्कारी और सुखद लाभ महसूस होने लगते हैं। कालिंदी माँ अपने सेवकों की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहती हैं और उनके जीवन की हर बड़ी से बड़ी बाधा को हंसते-हंसते दूर कर देती हैं।
यदि कोई भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ इस पवित्र चालीसा को अपनी रोज की पूजा का हिस्सा बनाता है तो उसे मिलने वाले मुख्य लाभ और पुण्य फल कुछ इस प्रकार हैं:
- माँ यमुना को मृत्यु के देवता यमराज की सगी बहन माना गया है। इस चालीसा का पाठ करने से इंसान को कभी भी अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता और गंभीर एक्सीडेंट जैसी दुर्घटनाओं से हमेशा रक्षा होती है।
- सूर्य की बेटी और शनिदेव की बहन होने के कारण माँ यमुना की पूजा करने से कुंडली के ये दोनों बड़े ग्रह शांत रहते हैं। जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो उन्हें इस पाठ से बहुत बड़ी राहत मिलती है।
- चालीसा की पंक्तियों के अनुसार माँ यमुना के नाम का सिमरन करने से ही इंसान के सारे अमंगल दूर भाग जाते हैं। जो व्यक्ति नियम से यह पाठ करता है उसे जीवन के अंत में उत्तम गति और परमानेंट परमानंद की प्राप्ति होती है।
- इस पावन पाठ के नियमित गान से घर की कंगाली, दरिद्रता और पैसों की तंगी हमेशा के लिए खत्म हो जाती है। बिजनेस और नौकरी में आ रही सारी रुकावटें दूर हो जाती हैं जिससे घर में बरकत और खुशहाली आती है।
- जो लोग हमेशा डिप्रेशन या चिंताओं से घिरे रहते हैं उनके लिए यह पाठ मन को रिलैक्स करने का सबसे बेस्ट जरिया है। इसकी कृपा से परिवार के लोगों के बीच आपसी तालमेल और प्यार बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।
श्री यमुना चालीसा पाठ की सही विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी पूजा या पाठ का पूरा पुण्य फल तभी मिलता है जब उसे सही नियमों, सही दिशा और शुद्ध भाव के साथ किया जाए। माँ यमुना की पूजा में सादगी, मन की पवित्रता और दीपदान का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है। सही तरीके से किया गया यह पाठ हमेशा बहुत जल्दी और उत्तम फल देने वाला साबित होता है।
अगर आप भी अपने जीवन के कष्टों को दूर करने और माँ यमुना का आशीर्वाद पाने के लिए इस चालीसा का पाठ शुरू करना चाहते हैं तो इस बेहद आसान और सही विधि का पालन करें:
- पाठ करने के लिए सुबह का समय सबसे बढ़िया माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इस पूजा में साधक का पूरी तरह साफ-सुथरे कपड़े पहनना जरूरी है, यदि संभव हो तो हल्के नीले या साफ सफेद कपड़े पहनें।
- अपने घर के मंदिर या किसी पवित्र स्थान को अच्छे से साफ कर लें। एक छोटी चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं और उस पर माँ यमुना या भगवान श्री कृष्ण की तस्वीर स्थापित करें क्योंकि कृष्ण जी के बिना यमुना जी की पूजा अधूरी है।
- भगवान की प्रतिमा के सामने शुद्ध देसी घी का एक दीपक जलाएं और साथ में सुगंधित धूपबत्ती भी सुलगाएं। माँ यमुना को रोली, अक्षत, चंदन और साफ जल अर्पित करें। पूजा में ताजे फूल चढ़ाना बहुत अच्छा माना जाता है।
- पूजा के दौरान माँ यमुना को मिश्री, मखाने, माखन, पेड़े या फिर मौसमी फलों का सात्विक भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद माता से अपने परिवार की सुख-शांति और तरक्की के लिए सच्चे दिल से प्रार्थना करें।
- अब कुशा या ऊन के एक साफ आसन पर बैठ जाएं और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखें। पूरी एकाग्रता और साफ उच्चारण के साथ श्री यमुना चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद माता की आरती करें और थोड़ा सा आचमन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या महिलाएं भी माँ यमुना चालीसा का पाठ कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं भी अपने सुहाग की रक्षा, बच्चों की तरक्की और घर की सुख-शांति के लिए माँ यमुना चालीसा का पाठ पूरी श्रद्धा के साथ कर सकती हैं। माता अपने सभी बच्चों पर समान रूप से अपनी कृपा बरसाती हैं।
यमुना चालीसा का पाठ किस दिन से शुरू करना सबसे अच्छा माना जाता है?
इस पवित्र चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए शनिवार या रविवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है क्योंकि ये दिन शनिदेव और सूर्यदेव से जुड़े हैं। इसके अलावा आप यम द्वितीया या भाई दूज के पावन दिन से भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं।
क्या शाम के समय भी इस चालीसा का पाठ किया जा सकता है?
हाँ, अगर आपको सुबह के समय किसी वजह से फुर्सत नहीं मिल पाती है तो आप शाम को सूर्यास्त के समय हाथ-पैर धोकर, पूरी तरह साफ होकर माता के सामने घी का दीपक जलाकर इस चालीसा का पाठ बहुत ही शांत मन से कर सकते हैं।
क्या इस पाठ को करते समय खान-पान का कोई परहेज रखना पड़ता है?
हाँ, माता की साधना के दौरान सात्विकता का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है। जितने दिन भी आप माँ की चालीसा का नियमपूर्वक पाठ करते हैं उतने दिन मांस, मदिरा, तामसिक भोजन जैसे प्याज और लहसुन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखना चाहिए।

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