अजा एकादशी 2026 का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा। यह व्रत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। पंचांग गणना के अनुसार एकादशी तिथि 6 सितंबर 2026 की शाम लगभग 7:29 बजे शुरू होकर 7 सितंबर की शाम लगभग 5:03 बजे समाप्त होगी। दिल्ली सहित उत्तर भारत में 7 सितंबर को अजा एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

व्रत का पारण 8 सितंबर 2026, मंगलवार को किया जाएगा। नई दिल्ली के अनुसार पारण का समय लगभग सुबह 6:02 बजे से 10:13 बजे तक है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के अंतर के कारण समय में थोड़ा बदलाव हो सकता है।


अजा एकादशी 2026 की मुख्य जानकारी

विवरण जानकारी
व्रत का नाम अजा एकादशी
वर्ष 2026
तिथि 7 सितंबर 2026, सोमवार
मास भाद्रपद
पक्ष कृष्ण पक्ष
एकादशी तिथि प्रारंभ 6 सितंबर 2026, शाम 7:29 बजे के आसपास
एकादशी तिथि समाप्त 7 सितंबर 2026, शाम 5:03 बजे के आसपास
पारण की तिथि 8 सितंबर 2026, मंगलवार
पारण समय सुबह 6:02 बजे से 10:13 बजे तक, नई दिल्ली के अनुसार

अजा एकादशी 2026 कब है?

वर्ष 2026 में अजा एकादशी का व्रत सोमवार, 7 सितंबर को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार यह भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी है। नई दिल्ली की गणना में एकादशी तिथि 6 सितंबर की शाम 7:29 बजे से 7 सितंबर की शाम 5:03 बजे तक रहेगी।

एकादशी व्रत में केवल तिथि देखना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि स्थानीय सूर्योदय और तिथि की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है। इसी कारण अलग-अलग स्थानों पर पंचांग में समय में कुछ अंतर दिखाई दे सकता है।

अजा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा प्रातः स्नान के बाद करना शुभ माना जाता है। नई दिल्ली के पंचांग में 7 सितंबर 2026 को सूर्योदय लगभग सुबह 6 बजे के आसपास है। उस दिन ब्रह्म मुहूर्त लगभग सुबह 4:30 बजे से 5:16 बजे के बीच बताया गया है और अभिजीत मुहूर्त लगभग 11:53 बजे से 12:44 बजे तक है। 

पूजा के लिए किसी एक विशेष मुहूर्त की बाध्यता के बजाय भक्त अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार प्रातःकाल भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं।

पूजा के लिए प्रमुख समय

  • ब्रह्म मुहूर्त - लगभग सुबह 4:30 बजे से 5:16 बजे तक
  • सूर्योदय - लगभग सुबह 6:02 बजे
  • अभिजीत मुहूर्त - लगभग सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक

मुहूर्त स्थान के अनुसार बदल सकता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग को प्राथमिकता दें।

अजा एकादशी व्रत की पूजा विधि

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अजा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित व्रत है। इस दिन भक्त उपवास, पूजा, जप और भगवान विष्णु का स्मरण करते हैं। पूजा की सामान्य विधि इस प्रकार रखी जा सकती है:

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान को साफ करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, फल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें।
  • घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें।
  • विष्णु मंत्र, विष्णु सहस्रनाम या भगवान विष्णु के नामों का जाप करें।
  • अजा एकादशी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
  • दिनभर अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार उपवास रखें।
  • रात्रि में भगवान विष्णु का स्मरण और भजन-कीर्तन किया जा सकता है।
  • अगले दिन द्वादशी तिथि में उचित समय पर पारण करें।

अजा एकादशी व्रत में क्या खाएं?

एकादशी के व्रत में भोजन के नियम अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं। सामान्यतः अनाज और सामान्य दालों से परहेज किया जाता है। जो लोग फलाहार करते हैं, वे अपनी परंपरा के अनुसार फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना या व्रत में स्वीकार्य अन्य खाद्य पदार्थ ले सकते हैं।

निर्जल व्रत हर व्यक्ति के लिए आवश्यक नहीं है। धार्मिक व्रत की विधि अपनी शारीरिक क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखना उचित है। बीमारी, गर्भावस्था, वृद्धावस्था या नियमित दवा लेने की स्थिति में कठोर उपवास करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

एकादशी में किन चीजों से बचें?

  • अनाज और सामान्य दालों का सेवन न करने की परंपरा है।
  • मांसाहार और मदिरा से दूर रहना चाहिए।
  • अधिक तला-भुना और भारी भोजन करने से बचें।
  • क्रोध, विवाद और नकारात्मक व्यवहार से बचकर भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है।

अजा एकादशी व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अजा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की भक्ति और आत्मसंयम से जुड़ा हुआ है। इस दिन उपवास, पूजा, दान और भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ अजा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

इस व्रत का एक महत्वपूर्ण संदेश आत्मसंयम और सदाचार भी है। एकादशी के अवसर पर भक्त केवल भोजन से संयम नहीं रखते, बल्कि मन, वाणी और व्यवहार में भी संयम रखने का प्रयास करते हैं।

अजा एकादशी व्रत कथा

अजा एकादशी की कथा का संबंध राजा हरिश्चंद्र से बताया जाता है। धार्मिक परंपरा में राजा हरिश्चंद्र को सत्य और धर्म के पालन के लिए प्रसिद्ध माना गया है। कथा के अनुसार परिस्थितियों के कारण राजा को अपने राज्य, धन और परिवार से भी अलग होना पड़ा। अत्यंत कठिन समय में भी उन्होंने सत्य का साथ नहीं छोड़ा।

कहा जाता है कि कठिन परिस्थितियों के दौरान राजा हरिश्चंद्र को अपने जीवन में अनेक दुखों और परीक्षाओं का सामना करना पड़ा। एक समय वे अत्यंत निराश और परेशान हो गए। तभी उन्हें एक महान ऋषि का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। ऋषि ने उन्हें भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत करने और भगवान विष्णु की पूजा करने की सलाह दी।

राजा हरिश्चंद्र ने श्रद्धा और नियमपूर्वक अजा एकादशी का व्रत किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत के प्रभाव से उनके जीवन की कठिन परिस्थितियां समाप्त होने लगीं और उन्हें अपने खोए हुए सुख, सम्मान और परिवार की प्राप्ति हुई। अंततः राजा का जीवन फिर से सुख और धर्म के मार्ग पर लौट आया।

अजा एकादशी के दिन क्या करें?

  • भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
  • तुलसी दल भगवान विष्णु को अर्पित करें।
  • विष्णु मंत्र या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें।
  • अजा एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें।
  • जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार दान करें।
  • दिनभर संयमित और सात्त्विक व्यवहार रखें।
  • रात्रि में भगवान विष्णु का स्मरण और भजन किया जा सकता है।

अजा एकादशी के दिन क्या नहीं करना चाहिए?

  • बिना आवश्यकता के क्रोध और विवाद से बचें।
  • असत्य बोलने और किसी को कष्ट पहुंचाने से बचें।
  • एकादशी व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी व्रत परंपरा के विरुद्ध भोजन नहीं करना चाहिए।
  • दूसरों की निंदा और अपशब्दों से बचना चाहिए।
  • स्वास्थ्य खराब होने पर जबरदस्ती कठिन या निर्जल उपवास नहीं करना चाहिए।

अजा एकादशी 2026 पारण कब करें?

अजा एकादशी व्रत का पारण 8 सितंबर 2026, मंगलवार को किया जाएगा। नई दिल्ली के अनुसार पारण का समय लगभग सुबह 6:02 बजे से 10:13 बजे तक रहेगा। कुछ पंचांगों में पारण की शुरुआत लगभग 6:02 बजे बताई गई है।

पारण हमेशा द्वादशी तिथि और स्थानीय सूर्योदय को ध्यान में रखकर करना चाहिए। यदि आप किसी विशेष संप्रदाय या मंदिर की परंपरा का पालन करते हैं, तो उसी के अनुसार पारण का समय निर्धारित करें।

पारण की सरल विधि

  1. सुबह स्नान करके भगवान विष्णु का स्मरण करें।
  2. भगवान विष्णु की पूजा करें।
  3. अपनी परंपरा के अनुसार पूजा, दान या ब्राह्मण/जरूरतमंद को भोजन कराने का कार्य करें।
  4. उचित द्वादशी समय में व्रत खोलें।
  5. पारण के लिए हल्का और सात्त्विक भोजन लेना बेहतर माना जाता है।

अजा एकादशी से जुड़े सामान्य प्रश्न

अजा एकादशी 2026 कब मनाई जाएगी?

अजा एकादशी 2026 का व्रत 7 सितंबर, सोमवार को रखा जाएगा।

अजा एकादशी का पारण कब होगा?

अजा एकादशी का पारण 8 सितंबर 2026, मंगलवार को किया जाएगा। नई दिल्ली के अनुसार पारण का समय सुबह 6:02 बजे से 10:13 बजे तक है।

अजा एकादशी किस मास में आती है?

अजा एकादशी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आती है।

अजा एकादशी पर किस भगवान की पूजा की जाती है?

धार्मिक परंपरा के अनुसार अजा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और आराधना की जाती है।

क्या अजा एकादशी पर निर्जल व्रत रखना जरूरी है?

नहीं। व्रत की विधि परंपरा और व्यक्ति की क्षमता के अनुसार अलग हो सकती है। स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए फलाहार या अन्य मान्य व्रत विधि अपनाई जा सकती है।

अजा एकादशी को क्या दान करना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, फल या अपनी क्षमता के अनुसार उपयोगी वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है।