दिवाली 2026 का पर्व रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन कार्तिक मास की अमावस्या तिथि रहेगी और शाम के समय लक्ष्मी-गणेश पूजन किया जाएगा। लखनऊ के स्थानीय पंचांग के अनुसार, लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:42 बजे से 7:39 बजे तक रहेगा। वहीं अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगी।

दीपावली केवल दीप जलाने और आतिशबाजी का पर्व नहीं है, बल्कि यह परिवार, प्रकाश, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ा प्रमुख हिंदू त्योहार है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का आगमन होता है।


दिवाली 2026 कब है?

वर्ष 2026 में दीपावली का मुख्य पर्व 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। इसे कार्तिक अमावस्या की रात्रि में मनाया जाता है। भारत के अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और लग्न के समय में अंतर होने के कारण लक्ष्मी पूजा के मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। इसलिए पूजा का समय अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना उचित रहता है।

विवरण जानकारी
दिवाली 2026 8 नवंबर 2026, रविवार
पर्व दीपावली / दिवाली
तिथि कार्तिक कृष्ण अमावस्या
अमावस्या प्रारंभ 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे
अमावस्या समाप्त 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त,  शाम 5:42 बजे से 7:39 बजे तक

दीपावली 2026 लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त

दीपावली 2026 पर लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। लखनऊ के अनुसार प्रदोष काल शाम 5:19 बजे से 7:56 बजे तक है, जबकि लक्ष्मी पूजा के लिए विशेष मुहूर्त शाम 5:42 बजे से 7:39 बजे तक बताया गया है। यह समय स्थिर लग्न और प्रदोष काल के संयोग पर आधारित है।

धार्मिक परंपरा में स्थिर लग्न को लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ माना जाता है। हालांकि, पूजा का वास्तविक समय स्थान, पंचांग और स्थानीय सूर्यास्त के अनुसार अलग हो सकता है।

लक्ष्मी पूजा के लिए महत्वपूर्ण समय

  • दिवाली: रविवार, 8 नवंबर 2026
  • प्रदोष काल: शाम 5:19 बजे से 7:56 बजे तक
  • लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 5:42 बजे से 7:39 बजे तक
  • अमावस्या तिथि: 8 नवंबर सुबह 11:27 बजे से 9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे तक

दिवाली पर लक्ष्मी पूजा क्यों की जाती है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी लक्ष्मी धन, ऐश्वर्य, सुख और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं। दीपावली की रात लक्ष्मी-गणेश की पूजा करके भक्त अपने घर-परिवार के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और विघ्नों को दूर करने वाला देवता माना जाता है। इसलिए कई परिवारों में लक्ष्मी पूजा के साथ गणेश जी की पूजा भी की जाती है। व्यापारी वर्ग में इस दिन नए बही-खाते और व्यापारिक पुस्तकों की पूजा करने की भी परंपरा है।

दिवाली 2026 की पूजा सामग्री

लक्ष्मी-गणेश पूजा के लिए घर पर उपलब्ध सामग्री से भी सरल पूजा की जा सकती है। सामान्य रूप से निम्न सामग्री रखी जाती है:

  • देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र
  • पूजा की चौकी और साफ लाल या पीला कपड़ा
  • कलश, जल और नारियल
  • आम या अशोक के पत्ते
  • रोली, कुमकुम और चंदन
  • अक्षत यानी साबुत चावल
  • फूल और माला
  • धूप और अगरबत्ती
  • घी या तेल के दीपक
  • फल और मिठाई
  • पान, सुपारी और लौंग-इलायची
  • दक्षिणा
  • नए बही-खाते, यदि व्यापारिक पूजा करनी हो

दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा विधि

यदि आप घर पर सरल तरीके से दीपावली 2026 की लक्ष्मी पूजा करना चाहते हैं, तो नीचे दी गई प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में पूजा की विधि में अंतर होना स्वाभाविक है।

  • दीपावली से पहले घर की अच्छी तरह सफाई करें। पूजा स्थान को विशेष रूप से साफ करके वहां चौकी रखें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्वच्छ और व्यवस्थित घर को देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए उपयुक्त माना जाता है।
  • चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं और उसके ऊपर भगवान गणेश तथा देवी लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। पास में कलश स्थापित किया जा सकता है।
  • कलश में स्वच्छ जल भरें। उसमें अक्षत, सुपारी और सिक्का आदि रखने की परंपरा है। कलश के ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखा जा सकता है।
  • सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करके पूजा करें। उन्हें रोली, अक्षत, पुष्प, दूर्वा और मोदक या मिठाई अर्पित करें। इसके बाद गणेश जी का मंत्र जप सकते हैं - ॐ गं गणपतये नमः।
  • अब देवी लक्ष्मी का ध्यान करके उन्हें जल, पंचामृत, वस्त्र, कुमकुम, अक्षत, फूल और माला अर्पित करें। इसके बाद फल और मिठाई का भोग लगाएं।
  • पूजा स्थान के साथ-साथ घर के मुख्य द्वार, खिड़कियों और अन्य शुभ स्थानों पर दीपक जलाएं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीपक अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है।
  • लक्ष्मी माता की आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों के सुख, स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। इसके बाद गणेश जी की आरती भी की जा सकती है।
  • पूजा समाप्त होने के बाद देवी-देवताओं को अर्पित किया गया प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें। बड़ों का आशीर्वाद लें और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने का संकल्प लें।

दिवाली पर दीपक जलाने का महत्व

दीपावली को प्रकाश का पर्व कहा जाता है। धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में दीपक को आशा, ज्ञान, सकारात्मकता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए इस दिन घर के विभिन्न हिस्सों में दीप जलाने की परंपरा है।

मुख्य द्वार पर दीपक जलाना भी दिवाली की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। कई परिवार घर के मंदिर, तुलसी के पास और आंगन में भी दीपक रखते हैं।

दिवाली 2026 का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं में दीपावली से जुड़ी कई कथाएं और परंपराएं मिलती हैं। उत्तर भारत में इसे भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की स्मृति से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि 14 वर्ष के वनवास और रावण पर विजय के बाद श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के अयोध्या लौटने पर नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था।

एक अन्य धार्मिक परंपरा में दीपावली को देवी लक्ष्मी के समुद्र मंथन से प्रकट होने से भी जोड़ा जाता है। इसी कारण इस दिन लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में दीपावली से जुड़ी मान्यताएं अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी एक कथा को ही पूरे भारत की एकमात्र परंपरा मानना उचित नहीं है।

दिवाली पर क्या करें?

  • घर और पूजा स्थान की साफ-सफाई करें।
  • शाम को शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश की पूजा करें।
  • घर में दीपक जलाएं और पूजा के बाद प्रसाद बांटें।
  • परिवार के साथ मिलकर त्योहार मनाएं।
  • जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुएं दान करें।
  • स्थानीय परंपरा के अनुसार गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे आगामी पर्वों की तैयारी करें।

दिवाली पर किन बातों का ध्यान रखें?

  • पूजा के लिए साफ और शांत स्थान चुनें।
  • दीपक और मोमबत्ती को ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।
  • पटाखे चलाते समय बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा का ध्यान रखें।
  • तेज आवाज वाले पटाखों की जगह पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार विकल्प चुनें।
  • पूजा में दिखावे की बजाय श्रद्धा और स्वच्छता को प्राथमिकता दें।
  • मुहूर्त के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें, क्योंकि समय में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है।

दिवाली 2026 से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दिवाली 2026 कब मनाई जाएगी?

दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।

दीपावली 2026 में लक्ष्मी पूजा कब करें?

लखनऊ में 8 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजा का विशेष मुहूर्त शाम 5:42 बजे से 7:39 बजे तक है। अन्य शहरों में स्थानीय समय अलग हो सकता है।

दिवाली 2026 में अमावस्या कब से कब तक है?

उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगी। 

क्या दिवाली पर केवल लक्ष्मी पूजा की जाती है?

नहीं। कई परिवारों में देवी लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है। कुछ परंपराओं में कुबेर, सरस्वती या अन्य देवी-देवताओं का पूजन भी किया जाता है। पूजा की परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है।

क्या दिवाली पर व्रत रखना जरूरी है?

व्रत रखना अनिवार्य नहीं माना जाना चाहिए। कुछ भक्त अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार दिनभर व्रत रखते हैं और शाम को पूजा के बाद भोजन करते हैं। सामान्य भक्त अपनी श्रद्धा और स्वास्थ्य के अनुसार पूजा कर सकते हैं।