प्रदोष व्रत 2026 में भगवान शिव की आराधना के लिए वर्षभर में कुल 24 प्रदोष व्रत पड़ेंगे। यह व्रत प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद के विशेष समय में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना इस व्रत का प्रमुख हिस्सा माना जाता है।

वर्ष 2026 में प्रदोष व्रत की शुरुआत 1 जनवरी 2026 से होगी और वर्ष का अंतिम प्रदोष व्रत 21 दिसंबर 2026 को रखा जाएगा। नीचे प्रदोष व्रत की सभी तिथियां, प्रदोष काल, पूजा विधि, महत्व, नियम और व्रत कथा की जानकारी दी गई है।


प्रदोष व्रत 2026 की सभी तिथियां

प्रदोष व्रत प्रत्येक महीने दो बार आता है। एक प्रदोष कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को और दूसरा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को होता है। सप्ताह के जिस दिन प्रदोष पड़ता है, उसी आधार पर इसका नाम भी रखा जाता है। जैसे सोमवार को पड़ने वाला प्रदोष सोम प्रदोष, मंगलवार को पड़ने वाला भौम प्रदोष और शनिवार को पड़ने वाला शनि प्रदोष कहलाता है।

माह तिथि वार प्रदोष का नाम पूजा समय
जनवरी 1 जनवरी 2026 गुरुवार गुरु प्रदोष शाम 5:25 से 8:07 बजे
जनवरी 16 जनवरी 2026 शुक्रवार शुक्र प्रदोष शाम 5:36 से 8:16 बजे
जनवरी 30 जनवरी 2026 शुक्रवार शुक्र प्रदोष शाम 5:47 से 8:24 बजे
फरवरी 14 फरवरी 2026 शनिवार शनि प्रदोष शाम 5:58 से 8:31 बजे
मार्च 1 मार्च 2026 रविवार रवि प्रदोष शाम 6:07 से 7:09 बजे
मार्च 16 मार्च 2026 सोमवार सोम प्रदोष शाम 6:15 से 8:39 बजे
मार्च 30 मार्च 2026 सोमवार सोम प्रदोष शाम 6:22 से 8:42 बजे
अप्रैल 15 अप्रैल 2026 बुधवार बुध प्रदोष शाम 6:30 से 8:45 बजे
अप्रैल 28 अप्रैल 2026 मंगलवार भौम प्रदोष शाम 6:51 से 8:48 बजे
मई 14 मई 2026 गुरुवार गुरु प्रदोष शाम 6:46 से 8:53 बजे
मई 28 मई 2026 गुरुवार गुरु प्रदोष शाम 6:54 से 8:58 बजे
जून 12 जून 2026 शुक्रवार शुक्र प्रदोष शाम 7:36 से 9:03 बजे
जून 27 जून 2026 शनिवार शनि प्रदोष शाम 7:04 से 9:06 बजे
जुलाई 12 जुलाई 2026 रविवार रवि प्रदोष शाम 7:03 से 9:07 बजे
जुलाई 26 जुलाई 2026 रविवार रवि प्रदोष शाम 6:58 से 9:04 बजे
अगस्त 10 अगस्त 2026 सोमवार सोम प्रदोष शाम 6:48 से 8:57 बजे
अगस्त 25 अगस्त 2026 मंगलवार भौम प्रदोष शाम 6:34 से 8:48 बजे
सितंबर 8 सितंबर 2026 मंगलवार भौम प्रदोष शाम 6:19 से 8:37 बजे
सितंबर 24 सितंबर 2026 गुरुवार गुरु प्रदोष शाम 6:01 से 8:24 बजे
अक्टूबर 8 अक्टूबर 2026 गुरुवार गुरु प्रदोष शाम 5:45 से 8:13 बजे
अक्टूबर 23 अक्टूबर 2026 शुक्रवार शुक्र प्रदोष शाम 5:31 से 8:03 बजे
नवंबर 6 नवंबर 2026 शुक्रवार शुक्र प्रदोष शाम 5:20 से 7:56 बजे
नवंबर 22 नवंबर 2026 रविवार रवि प्रदोष शाम 5:14 से 7:53 बजे
दिसंबर 6 दिसंबर 2026 रविवार रवि प्रदोष शाम 5:13 से 7:55 बजे
दिसंबर 21 दिसंबर 2026 सोमवार सोम प्रदोष शाम 5:36 से 8:01 बजे

प्रदोष व्रत क्या है?

हिंदू धर्म में त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। सूर्यास्त के बाद का वह समय जब त्रयोदशी तिथि विद्यमान रहती है, प्रदोष काल कहलाता है। इसी काल में भगवान शिव की पूजा करने की परंपरा के कारण इसे प्रदोष व्रत कहा जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और शाम के समय शिवलिंग का अभिषेक, पूजन, मंत्र जाप तथा आरती करते हैं।

2026 में प्रदोष व्रत कितनी बार पड़ेगा?

सामान्य हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक चंद्र मास में दो त्रयोदशी तिथियां होती हैं। इसलिए वर्ष 2026 में कुल 24 प्रदोष व्रत पड़ेंगे। हालांकि किसी विशेष स्थान पर तिथि और प्रदोष काल की गणना के कारण स्थानीय पंचांग में अंतर दिखाई दे सकता है।

प्रदोष व्रत के प्रकार

सप्ताह के जिस दिन प्रदोष व्रत आता है, उसके आधार पर इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है।

  • सोम प्रदोष - सोमवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत।
  • भौम प्रदोष - मंगलवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत।
  • बुध प्रदोष - बुधवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत।
  • गुरु प्रदोष - गुरुवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत।
  • शुक्र प्रदोष - शुक्रवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत।
  • शनि प्रदोष - शनिवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत।
  • रवि प्रदोष - रविवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत।

धार्मिक परंपराओं में सप्ताह के दिन के आधार पर प्रदोष के अलग-अलग महत्व बताए गए हैं। उदाहरण के लिए सोमवार का प्रदोष भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है, जबकि शनिवार को पड़ने वाले प्रदोष को शनि संबंधी पूजा और शिव आराधना से जोड़ा जाता है।

प्रदोष व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने और मन की शांति के लिए किया जाता है। भक्त इस दिन संयम, उपवास और शिव पूजा के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

प्रदोष व्रत के महत्व को लेकर विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं। इसलिए इसके फल को निश्चित परिणाम के रूप में लेने के बजाय इसे आस्था, भक्ति और आत्मसंयम से जुड़ी धार्मिक परंपरा के रूप में समझना उचित है।

प्रदोष व्रत करने के धार्मिक लाभ

  • भगवान शिव की आराधना और भक्ति का अवसर मिलता है।
  • मन को एकाग्र करने और आत्मसंयम का अभ्यास होता है।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नकारात्मकता से मुक्ति और मानसिक शांति की कामना की जाती है।
  • परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • शिव मंत्र, ध्यान और पूजा के माध्यम से आध्यात्मिक अनुशासन विकसित करने का अवसर मिलता है।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

प्रदोष व्रत में पूजा का सबसे महत्वपूर्ण समय प्रदोष काल माना जाता है। पूजा घर में या शिव मंदिर में श्रद्धा के अनुसार की जा सकती है।

सुबह की तैयारी

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
  • व्रत का संकल्प लें।
  • पूरे दिन सात्त्विक विचार और व्यवहार बनाए रखने का प्रयास करें।

प्रदोष काल में शिव पूजा

  • पूजा स्थान को साफ करके भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें। सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें।
  • शिवलिंग पर स्वच्छ जल या अपनी परंपरा के अनुसार पंचामृत से अभिषेक करें।
  • इसके बाद दूध, जल और अन्य पूजन सामग्री श्रद्धा के अनुसार अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र, फूल और फल अर्पित करें।
  • माता पार्वती, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय और नंदी का भी ध्यान करें।
  • ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें।
  • भगवान शिव की आरती करें। अंत में परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

प्रदोष व्रत में कौन-कौन सी सामग्री चाहिए?

  • शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा
  • जल और गंगाजल
  • दूध
  • दही, घी और शहद
  • बेलपत्र
  • आक या अन्य उपलब्ध पारंपरिक पुष्प
  • धूप और दीपक
  • चंदन
  • अक्षत
  • फल और नैवेद्य
  • मौली या कलावा
  • पूजा की थाली

पूजा सामग्री की सूची परंपरा और परिवार की रीति के अनुसार अलग हो सकती है। श्रद्धा से उपलब्ध सामग्री से पूजा करना भी किया जा सकता है।

प्रदोष व्रत में क्या खाना चाहिए?

प्रदोष व्रत में भोजन के नियम अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में अलग हो सकते हैं। कुछ भक्त निर्जल व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार या सात्त्विक भोजन करते हैं। यदि स्वास्थ्य कारणों से उपवास करना कठिन हो, तो अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार व्रत रखना अधिक व्यावहारिक है।

  • फल
  • दूध
  • दही
  • मखाना
  • साबूदाना
  • सिंघाड़े या कुट्टू का आटा
  • आलू और अन्य व्रत योग्य खाद्य पदार्थ
  • सूखे मेवे

व्रत के दौरान भोजन की परंपरा आपके परिवार और स्थानीय धार्मिक रीति पर निर्भर कर सकती है।

प्रदोष व्रत के नियम

  • व्रत के दिन सात्त्विक जीवनशैली अपनाने का प्रयास करें।
  • भगवान शिव का ध्यान और मंत्र जाप करें।
  • क्रोध, विवाद और अनावश्यक नकारात्मक विचारों से बचें।
  • शाम के प्रदोष काल में शिव पूजा अवश्य करें।
  • पूजा में अपनी क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार सामग्री का उपयोग करें।
  • व्रत खोलने का समय अपनी परंपरा या स्थानीय पंचांग के अनुसार तय करें।

प्रदोष व्रत की कथा

प्रदोष व्रत से जुड़ी विभिन्न कथाएं धार्मिक परंपराओं में प्रचलित हैं। एक लोकप्रिय कथा में भगवान शिव की उपासना, प्रदोष काल की महिमा और भक्त की श्रद्धा का वर्णन मिलता है। कथा का मुख्य संदेश यह है कि भक्त को कठिन परिस्थितियों में भी श्रद्धा, संयम और धर्म के मार्ग को नहीं छोड़ना चाहिए।

प्रदोष व्रत की कथा पढ़ने या सुनने की परंपरा कई क्षेत्रों में पूजा का हिस्सा है। अलग-अलग प्रदोषों के लिए अलग कथाएं भी प्रचलित हैं, इसलिए कथा के संस्करण में क्षेत्रीय अंतर मिल सकता है।

प्रदोष काल में ही पूजा क्यों की जाती है?

प्रदोष व्रत की गणना केवल त्रयोदशी तिथि के आधार पर नहीं की जाती। धार्मिक पंचांग परंपरा में यह देखा जाता है कि त्रयोदशी तिथि सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में किस समय विद्यमान है। इसी कारण प्रदोष व्रत की पूजा के लिए सूर्यास्त के बाद का विशेष समय महत्वपूर्ण माना जाता है।

इसी वजह से अलग-अलग शहरों में प्रदोष पूजा का समय अलग हो सकता है। सूर्यास्त के समय में अंतर होने के कारण एक ही प्रदोष के पूजा समय में शहर के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर स्वाभाविक है।

2026 का कौन सा प्रदोष विशेष है?

वर्ष 2026 में कई प्रदोष सोमवार, मंगलवार और शनिवार जैसे दिनों पर पड़ रहे हैं। विशेष रूप से 10 अगस्त 2026 का सोम प्रदोष और 25 अगस्त 2026 का भौम प्रदोष भक्तों के लिए महत्वपूर्ण तिथियां हैं।

25 अगस्त 2026 को मंगलवार होने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। यह श्रावण शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पड़ रहा है।

क्या महिलाएं प्रदोष व्रत रख सकती हैं?

हां, धार्मिक परंपराओं में महिलाएं और पुरुष दोनों प्रदोष व्रत रख सकते हैं। व्रत रखने का तरीका व्यक्ति की क्षमता, स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है। महिलाएं भी भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके परिवार की सुख-शांति तथा अपने मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करती हैं।

क्या प्रदोष व्रत में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाना चाहिए?

धार्मिक परंपरा में बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। बेलपत्र उपलब्ध हो तो उसे श्रद्धा से शिवलिंग पर चढ़ाया जा सकता है। बेलपत्र अर्पित करते समय भगवान शिव का ध्यान और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप किया जा सकता है।

प्रदोष व्रत में कौन सा मंत्र जाप करें?

प्रदोष व्रत के दौरान सबसे सरल और लोकप्रिय शिव मंत्र है - ॐ नमः शिवाय, भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र, शिव स्तोत्र या अन्य शिव मंत्रों का भी जाप कर सकते हैं।

प्रदोष व्रत से जुड़े सामान्य प्रश्न

प्रदोष व्रत 2026 में कब-कब है?

वर्ष 2026 में प्रदोष व्रत की प्रमुख तिथियां 1 जनवरी, 16 जनवरी, 30 जनवरी, 14 फरवरी, 1 मार्च, 16 मार्च, 30 मार्च, 15 अप्रैल, 28 अप्रैल, 14 मई, 28 मई, 12 जून, 27 जून, 12 जुलाई, 26 जुलाई, 10 अगस्त, 25 अगस्त, 8 सितंबर, 24 सितंबर, 8 अक्टूबर, 23 अक्टूबर, 6 नवंबर, 22 नवंबर, 6 दिसंबर और 21 दिसंबर हैं।

प्रदोष व्रत किस भगवान को समर्पित है?

प्रदोष व्रत मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। पूजा में माता पार्वती और शिव परिवार का भी ध्यान किया जाता है।

प्रदोष व्रत कब खोलना चाहिए?

व्रत खोलने की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती है। सामान्यतः प्रदोष काल में शिव पूजा करने के बाद अपनी परंपरा के अनुसार व्रत पूर्ण किया जाता है। विशेष नियमों के लिए स्थानीय पंचांग या परिवार की धार्मिक परंपरा का पालन करना उचित है।

क्या प्रदोष व्रत हर महीने आता है?

हां। सामान्य हिंदू पंचांग में प्रत्येक चंद्र मास की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत मनाया जाता है। इसलिए सामान्यतः एक महीने में दो प्रदोष आते हैं।

सोम प्रदोष क्या होता है?

जब त्रयोदशी तिथि का प्रदोष सोमवार को पड़ता है, तो उसे सोम प्रदोष कहा जाता है। भगवान शिव की उपासना से जुड़े होने के कारण सोमवार के प्रदोष को कई भक्त विशेष श्रद्धा से रखते हैं।

भौम प्रदोष क्या होता है?

मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष कहा जाता है। 2026 में 28 अप्रैल, 25 अगस्त और 8 सितंबर को भौम प्रदोष व्रत पड़ेंगे।