भगवान श्री गणेश जी को प्रथम पूज्य माना गया है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-अनुष्ठान या धार्मिक उत्सव की शुरुआत बिना गणपति बाप्पा के स्मरण के अधूरी मानी जाती है। गणेश चतुर्थी का पावन पर्व हो या दैनिक संध्या वंदन, "जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा" आरती का गायन घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लेकर आता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धापूर्वक गणेश जी की आरती गाने से जीवन के समस्त विघ्न-बाधाएं दूर हो जाती हैं। आइए जानते हैं इस प्रसिद्ध आरती का संपूर्ण पाठ, आरती करने की सही विधि, नियम और इसका धार्मिक महत्व।
संपूर्ण गणेश आरती (Sri Ganesh Aarti Lyrics in Hindi)
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दन्त दयावन्त, चार भुजाधारी।
माथे सिन्दूर सोहे, मूसे की सवारी॥
(जय गणेश...)
अन्धन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
(जय गणेश...)
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा॥
(जय गणेश...)
दीनन की लाज रखो, शम्भु सुत वारी।
कामना को पूरा करो, जग बलिहारी॥
(जय गणेश...)
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा॥
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
श्री गणेश आरती का धार्मिक महत्व (Aarti Mahatva)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 'आरती' शब्द का अर्थ है आर्त भाव से ईश्वर को पुकारना। जब भक्त एकाग्रचित्त होकर कपूर या घी के दीप से गणेश जी की आरती उतारता है, तो पूजा में रह गई अनजानी त्रुटियों की पूर्ति हो जाती है।
- गणेश जी समस्त विघ्नों को हरने वाले देवता हैं। दैनिक आरती से घर के क्लेश और आर्थिक समस्याएं समाप्त होती हैं।
- आरती के समय बजने वाली घंटी, शंख और प्रज्वलित दीपक की लौ से घर का वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं।
- आरती की पंक्तियों में वर्णन है कि गणेश जी भक्तों के दुख दूर कर उन्हें रोगमुक्त, धनवान और आरोग्य प्रदान करते हैं।
गणेश जी की आरती करने की सही विधि (Aarti Vidhi)
आरती हमेशा पूरे विधि-विधान और शुद्ध भाव से करनी चाहिए। क्षेत्रीय परंपराओं के आधार पर पूजन सामग्री में थोड़ा भेद हो सकता है, लेकिन सामान्य विधि इस प्रकार है:
- आरती से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। आरती की थाली में पीतल या तांबे का दीपक, कपूर, फूल, अक्षत, रोली और जल का पात्र रखें।
- शुद्ध गाय के घी का दीपक या कपूर जलाएं।
- गणपति जी के चरणों के सामने 4 बार आरती की थाली घुमाएं। नाभि के सामने 2 बार आरती घुमाएं। मुखमंडल के सामने 1 बार आरती घुमाएं। अंत में सिर से लेकर चरणों तक संपूर्ण शरीर के सामने 7 बार वृत्ताकार (Clockwise) दिशा में आरती घुमाएं।
- आरती के दौरान बाएं हाथ से घंटी बजाएं या परिवार के अन्य सदस्य शंख-मंजीरा बजाएं।
- आरती समाप्त होने के बाद थाली के चारों ओर जल का आचमन कराएं, भगवान को पुष्प अर्पित करें और स्वयं आरती की ऊष्मा लें।
श्री गणेश आरती - धार्मिक मान्यताएं और लाभ (Beliefs and Benefits)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो साधक नित्य नियम से गणेश जी की यह आरती गाता है, उसे निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
- भगवान गणेश के साथ उनकी पत्नियां रिद्धि (बुद्धि) और सिद्धि (सफलता) तथा पुत्र शुभ-लाभ भी गृहांगन में वास करते हैं।
- आरती में कहा गया है 'अन्धन को आँख देत, कोढ़िन को काया' - यह पंक्तियां निष्ठावान भक्त को शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति का विश्वास दिलाती हैं।
- विद्यार्थियों के लिए गणेश आरती का पाठ एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाने वाला माना गया है।

0 Comments