मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का स्थान अत्यंत पूजनीय और उच्च है। प्रभु राम भक्ति, करुणा, मर्यादा और धर्म के प्रतीक माने जाते हैं। राम नवमी का पावन पर्व हो, शाम की नित्य पूजा-अर्चना हो या कोई भी धार्मिक अनुष्ठान - भगवान श्री राम जी की आरती के बिना पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित "श्री रामचंद्र कृपालु भज मन" स्तुति को ही श्रद्धालु परम भक्ति भाव से आरती के रूप में गाते हैं। इसके अतिरिक्त "आरती श्री रामचंद्र जी की" भी अनेक क्षेत्रों में अत्यंत लोकप्रिय है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन और शुद्ध भाव से भगवान श्री राम की आरती गाने से साधक के जीवन के समस्त दुखों का निवारण होता है, मन में शांति का संचार होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। आइए जानते हैं श्री राम जी की आरती का संपूर्ण पाठ, आरती करने की सही विधि, नियम और इसका धार्मिक महत्व।
संपूर्ण श्री राम आरती (Sri Ram Chandra Kripalu Bhaju Man Lyrics in Hindi)
नीचे गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित प्रसिद्ध श्री रामचंद्र स्तुति व आरती का संपूर्ण पाठ दिया गया है। इसे पूर्ण भक्ति भाव और शुद्ध उच्चारण के साथ गाना चाहिए:
श्री रामचंद्र कृपालु भज मन हरण भवभय दारुणं।
नवकंज लोचन, कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणं॥
कंदर्प अगणित अमित छवि, नवनील नीरद सुंदरं।
पटपीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं॥
भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्यवंश निकंदनं।
रघुनंद आनंदकंद कौशलचंद दशरथ नंदनं॥
सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणं।
आजानुभुज शर चाप धर संग्राम जित खर दूषणं॥
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं।
मम हृदय कंज निवास कुरु कामादि खल दल गंजनं॥
मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो वरू सहज सुंदर सांवरो।
करुणा निधान सुजान शीलु सनेहु जानत रावरो॥
एहि भांति गौरी असीस सुनि सिय सहित हिय हर्षित अली।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली॥
छंद:
जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे॥
आरती श्री रामचंद्र जी की (पारंपरिक आरती)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में "आरती श्री रामचंद्र जी की" भी गाई जाती है। पारंपरिक अंतर के कारण आप अपनी कुल-परंपरा के अनुसार किसी भी आरती का गायन कर सकते हैं:
आरती कीजै श्री रामचंद्र जी की। हरिहर पदपदुम परम पद की॥
पहली आरती जनक सुता की। धनुष तोरि रघुवर पटुता की॥
दूसरी आरती लक्ष्मण भ्राता। लखन लाल जाके जनक विधाता॥
तीसरी आरती भरत समेता। रिद्धि-सिद्धि छावे राम निकेता॥
चौथी आरती पवनसुत सेवे। जहां-तहां राम तहां हनुमान रहेवे॥
पांचवीं आरती सब रघुराई। कौसल्या सुत की कीरति गाई॥
जो कोई राम आरती गावे। बसि वैकुंठ परम पद पावे॥
श्री राम जी की आरती का धार्मिक महत्व (Aarti Mahatva)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 'आरती' शब्द का अर्थ है आर्त भाव या व्याकुल होकर ईश्वर को याद करना। जब कोई भक्त भावविभोर होकर भगवान श्री राम की आरती गाता है, तो उसका मन भक्ति के रस में लीन हो जाता है। इसके मुख्य महत्व इस प्रकार हैं:
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम की आरती करने से भक्ति भाव जागृत होता है और साधक के भीतर के भय, अहंकार तथा संशय का नाश होता है।
- आरती के समय जलते हुए दीपक की लौ, घंटी की ध्वनि और सुगंधित धूप से घर का वातावरण पवित्र होता है तथा नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है।
- आरती की पंक्तियों में प्रभु राम के रूप और उनकी लीलाओं का स्मरण होता है, जिससे मन को अपार मानसिक शांति मिलती है।
भगवान श्री राम की आरती करने की सही विधि (Aarti Vidhi)
शास्त्रों व सनातन परंपरा के अनुसार, किसी भी देवता की आरती नियमबद्ध और शुद्ध भाव से करनी चाहिए। यद्यपि अलग-अलग क्षेत्रों में थोड़ी भिन्नता हो सकती है, परंतु सामान्य विधि निम्न प्रकार है:
- आरती से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र (विशेषकर पीले या सफेद रंग के) धारण करें। पूजा स्थान को साफ करें।
- थाली में पीतल या तांबे का दीपक रखें। उसमें शुद्ध गाय का घी या कपूर और रुई की बाती लगाएं। थाली में ताजे पीले या लाल फूल, अक्षत और रोली रखें।
- दीपक जलाएं और आरती की थाली पर थोड़ा सा जल छिड़ककर प्रणाम करें।
- भगवान श्री राम की प्रतिमा या चित्र के सामने थाली को घड़ी की दिशा (Clockwise) में घुमाएं। शास्त्रों के अनुसार: 4 बार चरणों के समक्ष, 2 बार नाभि के समक्ष, 1 बार मुखारविंद के सामने और 7 बार संपूर्ण श्रीविग्रह के सामने गोल घुमाएं।
- आरती गाते समय बाएं हाथ से घंटी बजाएं। परिवार के अन्य सदस्य तालियां बजाकर या शंख/मंजीरा बजाकर सहगान कर सकते हैं।
- आरती समाप्त होने के पश्चात थाली पर जल का आचमन कराएं, पुष्प अर्पित करें और स्वयं दोनों हाथों से आरती की ऊष्मा लें। अंत में जाने-अनजाने हुई भूल के लिए भगवान राम से क्षमा याचना करें।
श्री राम आरती - धार्मिक मान्यताएं और मिलने वाले लाभ (Beliefs and Benefits)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो साधक नित्य नियम से श्री राम जी की आरती व स्तुति करता है, उसे निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
- मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम का नाम लेने और उनकी आरती गाने से पूर्वकृत पापों का निवारण होता है।
- श्री राम का जीवन आदर्शों का प्रतीक है। घर में राम आरती के नियमित पाठ से परिजनों के बीच प्रेम, सम्मान और मर्यादा बनी रहती है।
- प्रभु राम को 'दीनबंधु' और 'दुखहारी' कहा गया है। आरती गाने से जीवन में आने वाले संकट और बाधाएं दूर होती हैं।
- भगवान राम की शरण में जाने से साधक को जीवन की कठिन परिस्थितियों से लड़ने का साहस और मानसिक शक्ति प्राप्त होती है।

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